UP TET : शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्रश्नपत्र रहा उलझाऊ, 150 मिनट में पूछे गए डेढ़ सौ प्रश्न
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) परीक्षा की प्रथम पाली में 150 मिनट में 150 सवाल पूछे गए। परीक्षार्थियों को उपस्थिति आदि भरने के लिए पांच मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया।
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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) परीक्षा की प्रथम पाली में 150 मिनट में 150 सवाल पूछे गए। परीक्षार्थियों को उपस्थिति आदि भरने के लिए पांच मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। प्रदेश भर से 19 लाख 94 हजार 661 पंजीकृत परीक्षार्थी इस परीक्षा के लिए पंजीकृत थे। तीन और चार जुलाई को भी परीक्षा 60 जिलों के 955 परीक्षा केंद्रों पर होगी।
आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो पंजीकृत परीक्षार्थियों में 1 लाख 85 हजार 791 कार्यरत अध्यापक और 3 लाख 95 हजार 023 ऐसे अभ्यर्थी थे जो प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों परीक्षाओं में बैठे। परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण विधि, हिंदी, संस्कृत और सामाजिक अध्ययन जैसे मुख्य विषयों से प्रश्न पूछे गए। प्रश्नपत्र का स्तर बहुत कठिन नहीं था, इसके बावजूद कई परीक्षार्थी सवालों में उलझे रहे। परीक्षा में विभिन्न शिक्षण सिद्धांतों, भाषा व्याकरण और सामाजिक-ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़े सवाल शामिल थे।
बाल विकास एवं शिक्षण विधि के प्रश्न
बाल विकास एवं शिक्षण विधि में पहला सवाल आसान से कठिन की ओर बढ़ने वाले शिक्षण सिद्धांत पर था। किशोरों की स्वायत्तता की आवश्यकता, भावनात्मक परामर्श और पढ़ने की खराब आदतों पर कई प्रश्न थे। सामाजिक चिंता, गणित सीखने में ठहराव और समावेशी स्कूल वातावरण भी प्रश्नों का हिस्सा थे। सुकरात की शिक्षण पद्धति और आधुनिक कक्षाओं में शिक्षक की भूमिका भी पूछी गई।
भाषा और सामाजिक अध्ययन के प्रश्न
हिंदी में वाक्य पहचान (मेज पर पुस्तक रखीं हैं ) और संज्ञा (भैंस का दूध कितने रुपये लीटर हैं) पर सवाल थे। तरंग, तुरंग जैसे युग्म शब्दों का अर्थ और चुल्लू भर पानी में डूब मरना मुहावरे का अर्थ भी पूछा गया। संस्कृत में आकाशम का पर्यायवाची और उपरि का विलोम शब्द चुनने को कहा गया। सामाजिक अध्ययन में वैदिक भारत में जनपद शब्द का अर्थ, प्राथमिक उपचार का क्रम और 86 वें सांविधानिक संशोधन के तहत मौलिक कर्तव्य पर प्रश्न थे।