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हत्या, अपहरण जैसे अपराधों में भी जांच नहीं कर रही यूपी पुलिस: हाईकोर्ट
Sat, 29 Feb 2020 05:42 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 29 Feb 2020 05:42 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आपराधिक मामलों की विवेचना में लापरवाही से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी यूपी और कन्नौज के एसएसपी को तलब कर लिया है। कोर्ट ने डीजीपी से पिछले एक साल के दौरान दर्ज हुए उन मुकदमों की सूची तलब की है जिनमें विवेचना अभी भी लंबित है, कोर्ट ने उनको यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि किस कारण से इन गंभीर अपराधों में विवेचना पूरी नहीं हो सकी है। इसके लिए उन्होंने जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। यदि कार्रवाई नहीं की गई है तो उसका भी कारण स्पष्ट करें।
कन्नौज के धर्मपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने कहा कि आश्चर्यजनक है कि हत्या जैसे संवेदनशील मामले में भी ठीक से जांच नहीं की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी भी इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं कि विवेचना ठीक से नहीं हो रही है।
पीठ ने कहा कि हमारी नजर में इसके लिए एसएसपी कन्नौज से लेकर के डीजीपी तक जिम्मेदार है, क्योंकि उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों की निगरानी करेंगे।
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धर्मपाल के मामले में कहा गया कि उसने कन्नौज के विश्वगढ़ थाने में 22 जुलाई 2018 को हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट बलवा आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन इस मामले में पुलिस विवेचना नहीं कर रही है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था।
सरकार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे को देखने से पता चला कि वास्तव में इतने गंभीर मामले में पुलिस ने कोई जांच नहीं की है। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा की पुलिस हत्या अपहरण और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी प्रभावी तरीके से विवेचना नहीं कर रही है। उन्होंने डीजीपी से पूछा है कि गंभीर मुकदमों में त्वरित और प्रभावी विवेचना सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की है। मामले अब अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी।
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कन्नौज के धर्मपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने कहा कि आश्चर्यजनक है कि हत्या जैसे संवेदनशील मामले में भी ठीक से जांच नहीं की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी भी इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं कि विवेचना ठीक से नहीं हो रही है।
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पीठ ने कहा कि हमारी नजर में इसके लिए एसएसपी कन्नौज से लेकर के डीजीपी तक जिम्मेदार है, क्योंकि उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों की निगरानी करेंगे।
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धर्मपाल के मामले में कहा गया कि उसने कन्नौज के विश्वगढ़ थाने में 22 जुलाई 2018 को हत्या, हत्या का प्रयास, मारपीट बलवा आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन इस मामले में पुलिस विवेचना नहीं कर रही है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था।
सरकार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे को देखने से पता चला कि वास्तव में इतने गंभीर मामले में पुलिस ने कोई जांच नहीं की है। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा की पुलिस हत्या अपहरण और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी प्रभावी तरीके से विवेचना नहीं कर रही है। उन्होंने डीजीपी से पूछा है कि गंभीर मुकदमों में त्वरित और प्रभावी विवेचना सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की है। मामले अब अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी।