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UP: अब भूलने की बीमारी का होगा खात्मा... रसायन विज्ञानियों की बड़ी कामयाबी, वैज्ञानिकों ने खोजे 14 यौगिक
Thu, 13 Mar 2025 01:09 PM IST
शाहरुख खान
अमित सरन, अमर उजाला, प्रयागराज
अमित सरन, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 13 Mar 2025 01:09 PM IST
सार
भूलने की बीमारी के खात्मे के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) वैज्ञानिकों ने 14 यौगिक खोज लिए हैं। रसायन विज्ञानियों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। अमेरिका में दूसरे चरण का परीक्षण शुरू हो गया है।
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भूलने की बीमरी का होगा खात्मा
- फोटो : Adobe stock
विस्तार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने भूलने की बीमारी यानी अल्जाइमर्स के इलाज के लिए 14 यौगिक (मॉलिक्यूल) खोजे हैं। रसायन विज्ञानियों ने कंप्यूटर से परख करके सफलता की पहली सीढ़ी पार कर ली है। अब अमेरिका में नमूनों का अंतिम परीक्षण किया जा रहा है।
इससे पता लगेगा कि कौन-सा यौगिक इस लाइलाज बीमारी पर सर्वाधिक असरदार है। यह शोध नीदरलैंड के जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर ने प्रकाशित किया है। इविवि के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह और उनकी टीम ने शोध का पहला पड़ाव पार कर लिया है।
इनसिलिको यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षण में यह यौगिक भूलने की बीमारी में प्रभावी असर दिखाते पाए गए हैं। प्रो. सिंह के मुताबिक, भूलने की बीमारी हाइपर फास्फोराइलेटेड टाउ प्रोटीन के कारण होती है।
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मस्तिष्क में इस प्रोटीन का निर्माण एसिटिलकोलीन नामक न्यूरो ट्रांसमीटर की कमी से होता है। बताते हैं कि इस ट्रांसमीटर की कमी के लिए एसिटिलकोलीन एस्टरेज एंजाइम जिम्मेदार है। एंजाइम की इस क्रिया को रोकने में कई यौगिकों का प्रयोग लाभकारी पाया गया है।
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इससे पता लगेगा कि कौन-सा यौगिक इस लाइलाज बीमारी पर सर्वाधिक असरदार है। यह शोध नीदरलैंड के जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर ने प्रकाशित किया है। इविवि के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह और उनकी टीम ने शोध का पहला पड़ाव पार कर लिया है।
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इनसिलिको यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षण में यह यौगिक भूलने की बीमारी में प्रभावी असर दिखाते पाए गए हैं। प्रो. सिंह के मुताबिक, भूलने की बीमारी हाइपर फास्फोराइलेटेड टाउ प्रोटीन के कारण होती है।
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मस्तिष्क में इस प्रोटीन का निर्माण एसिटिलकोलीन नामक न्यूरो ट्रांसमीटर की कमी से होता है। बताते हैं कि इस ट्रांसमीटर की कमी के लिए एसिटिलकोलीन एस्टरेज एंजाइम जिम्मेदार है। एंजाइम की इस क्रिया को रोकने में कई यौगिकों का प्रयोग लाभकारी पाया गया है।
शोध टीम ने इसके लिए लैब में कई प्रकार के यौगिकों की कंप्यूटर के जरिये खोज की। फिर, मॉलिक्यूलर डॉकिंग व कंप्यूटर सिमुलेशन विधियों से यौगिकों की सक्रियता और कोशिकाओं को मारने या नुकसान पहुंचाने की क्षमता का विस्तृत अध्ययन किया।
बकौल प्रो. रमेंद्र, कंप्यूटर आधारित अध्ययन में यह यौगिक काफी प्रभावशाली पाए गए। अब इन 14 यौगिकों को इनविट्राे (परखनली या चीनी मिट्टी की प्याली में) अध्ययन के लिए अमेरिका स्थित कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी फुलर्टन की लैब में भेजा गया है।
अमेरिका में सेल लाइंस पर शुरू हुआ परीक्षण
प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह के अनुसार अमेरिकी लैब में यौगिकों का प्रयोग उन सेल लाइंस पर किया जा रहा है, जिनमें अल्जाइमर्स के लिए जिम्मेदार हाइपर फास्फोराइलेटेड टाउ प्रोटीन मौजूद हैं।
प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह के अनुसार अमेरिकी लैब में यौगिकों का प्रयोग उन सेल लाइंस पर किया जा रहा है, जिनमें अल्जाइमर्स के लिए जिम्मेदार हाइपर फास्फोराइलेटेड टाउ प्रोटीन मौजूद हैं।
इस जांच से पता चलेगा कि खोजे गए 14 योगिकों में से कौन सा यौगिक भूलने की बीमारी के इलाज में कितना प्रभावी है। दो से तीन महीने में परिणाम आ जाने के बाद सर्वाधिक प्रभावी यौगिक से दवा का निर्माण शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।