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पुलिस कांस्टेबल की भर्ती के नियमों में बदलाव करे यूपी सरकार - हाईकोर्ट
Fri, 20 Aug 2021 05:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 20 Aug 2021 05:33 PM IST
सार
- हाईकोर्ट ने कहा, एक ही भर्ती में दो बार लंबाई नापने का औचित्य नहीं
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को उत्तर प्रदेश नागरिक पुलिस और पीएसी कांस्टेबल भर्ती के लिए बने यूपी पुलिस कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल सर्विस रूल्स में संशोधन करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक ही भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी की लंबाई दो बार नापे जाने का औचित्य नहीं है। प्रदेश सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति एससी शर्मा ने यह आदेश दिया है।
याची अमन कुमार के अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि याची ने कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया था। शारीरिक दक्षता परीक्षा में उसकी लंबाई निर्धारित मानक 168 सेमी से कम पाई गई। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। एकल न्यायपीठ के आदेश पर सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने जांच की तो लंबाई 168 सेमी से अधिक पाई गई। इस पर कोर्ट ने उसकी नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है। जिसे प्रदेश सरकार ने विशेष अपील में चुनौती दी है।
सरकारी वकील का कहना था कि भर्ती नियमावली के अनुसार शारीरिक दक्षता परीक्षा में लंबाई मानक के अनुरूप पाए जाने के बाद ही मेडिकल कराने का प्रावधान है, जिसमें दोबारा लंबाई की जांच होती है। एकल पीठ द्वारा शारीरिक परीक्षा में अनफिट अभ्यर्थी की मेडिकल जांच कराने का आदेश देते समय इस तथ्य की अनदेखी की गई है।
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खंडपीठ का कहना था कि जब कोर्ट के आदेश से मेडिकल जांच कराई गई है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मगर सरकार इस पर पुनर्विचार करे कि शारीरिक दक्षता और मेडिकल जांच दोनों में लंबाई नापने का औचित्य नहीं है। क्योंकि यदि दोनों के परिणाम में अंतर आएगा तो भर्ती बोर्ड का टेस्ट स्वयं में विरोधाभासी हो जाएगा। कई राज्यों में लंबाई और सीने की नाप एक बार ही की जाती है। पीठ का यह भी कहना था कि अदालतों को भी ऐसे मामलों रूटीन तरीके मेडिकल जांच करने का आदेश देने से बचना चाहिए।
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याची अमन कुमार के अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि याची ने कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया था। शारीरिक दक्षता परीक्षा में उसकी लंबाई निर्धारित मानक 168 सेमी से कम पाई गई। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। एकल न्यायपीठ के आदेश पर सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने जांच की तो लंबाई 168 सेमी से अधिक पाई गई। इस पर कोर्ट ने उसकी नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है। जिसे प्रदेश सरकार ने विशेष अपील में चुनौती दी है।
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सरकारी वकील का कहना था कि भर्ती नियमावली के अनुसार शारीरिक दक्षता परीक्षा में लंबाई मानक के अनुरूप पाए जाने के बाद ही मेडिकल कराने का प्रावधान है, जिसमें दोबारा लंबाई की जांच होती है। एकल पीठ द्वारा शारीरिक परीक्षा में अनफिट अभ्यर्थी की मेडिकल जांच कराने का आदेश देते समय इस तथ्य की अनदेखी की गई है।
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खंडपीठ का कहना था कि जब कोर्ट के आदेश से मेडिकल जांच कराई गई है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मगर सरकार इस पर पुनर्विचार करे कि शारीरिक दक्षता और मेडिकल जांच दोनों में लंबाई नापने का औचित्य नहीं है। क्योंकि यदि दोनों के परिणाम में अंतर आएगा तो भर्ती बोर्ड का टेस्ट स्वयं में विरोधाभासी हो जाएगा। कई राज्यों में लंबाई और सीने की नाप एक बार ही की जाती है। पीठ का यह भी कहना था कि अदालतों को भी ऐसे मामलों रूटीन तरीके मेडिकल जांच करने का आदेश देने से बचना चाहिए।