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UP BOARD : लगातार 22 साल तक ब्रितानी हुकूमत के अधीन रहा यूपी बोर्ड
Thu, 07 Jan 2021 11:04 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 07 Jan 2021 11:04 AM IST
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यूपी बोर्ड फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
शताब्दी वर्ष मना रहे माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के इतिहास में पन्नों में उपलब्धियों के साथ-साथ कई सुनहरी यादें भी दर्ज हैं। यूपी बोर्ड की स्थापना के बाद इसकी कमान लगातार 22 साल तक ब्रिटिश सरकार के पास रही। हालांकि आजादी के पूर्व ही बोर्ड को अध्यक्ष व सचिव के रूप में भारतीय अधिकारी मिल गए थे।
1921 में इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम पारित होने और एक अप्रैल 1922 को भारत सरकार की ओर से अधिनियम लागू किए जाने के बाद पहली बार 1924 में अंग्रेज अधिकारी एएच मैकेंजी बोर्ड के पहले सभापति अर्थात अध्यक्ष नियुक्त हुए। उनके सभापति नियुक्त होने से पहले ही 1923 में माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से पहली बोर्ड की परीक्षा हुई थी। बोर्ड के सभापति को माध्यमिक शिक्षा विभाग का निदेशक कहा जाता है, वर्तमान में इस पद पर विनय कुमार पांडेय 2018 से कार्यरत हैं।
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1921 में इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम पारित होने और एक अप्रैल 1922 को भारत सरकार की ओर से अधिनियम लागू किए जाने के बाद पहली बार 1924 में अंग्रेज अधिकारी एएच मैकेंजी बोर्ड के पहले सभापति अर्थात अध्यक्ष नियुक्त हुए। उनके सभापति नियुक्त होने से पहले ही 1923 में माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से पहली बोर्ड की परीक्षा हुई थी। बोर्ड के सभापति को माध्यमिक शिक्षा विभाग का निदेशक कहा जाता है, वर्तमान में इस पद पर विनय कुमार पांडेय 2018 से कार्यरत हैं।
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पहले पांच अध्यक्ष अंग्रेज अधिकारी रहे
यूपी बोर्ड की स्थापना के बाद 1924 में इसके पहले सभापति ब्रितानी हुकूमत के एएच मैकेंजी नियुक्त हुए। वह इस पद पर लगातार 10 वर्ष 1934 तक रहे। बोर्ड में इसके बाद 1935 से 1937 तक एचआर हैरप को सभापति नियुक्त किया गया। 1937 से 1939 तक आरएस बेयर, 1939 से 1943 तक जेसी पालब्राइट एवं 1943 से 1946 तक डब्ल्यू जीपी वाल को माध्यमिक शिक्षा परिषद का सभापति नियुक्त किया गया।
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