UP Board 10th 12th Result 2022 : महामारी में भी दिखाया जज्बा, दिया बेहतर परिणाम
यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में हालांकि 30 फीसदी की कटौती भी की गई थी, लेकिन परीक्षा की तैयारियों के लिए विद्यार्थियों को जो वक्त मिला, उसमें खुद को साबित करना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद उन्होंने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
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पिछले साल 2021 में कोविड के कारण यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी थी और सभी परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा प्रमोट कर दिया गया था। महामारी से उबरने के बाद स्कूल खुले तो छात्र-छात्राओं ने भी जज्बा दिखाया। महामारी को मात देते हुए प्रदेश के मेधावियों ने हर लिहाज से बेहतर प्रदर्शन किया। वर्ष 2020 में हुई परीक्षा के मुकाबले इस बार यूपी बोर्ड का हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम बेहतर रहा।
यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में हालांकि 30 फीसदी की कटौती भी की गई थी, लेकिन परीक्षा की तैयारियों के लिए विद्यार्थियों को जो वक्त मिला, उसमें खुद को साबित करना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद उन्होंने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। वर्ष 2020 के हाईस्कूल के परिणाम के मुकाबले इस बार कुल परीक्षार्थियों के उत्तीर्ण प्रतिशत में 4.87 फीसदी, बालकों के उत्तीर्ण प्रतिशत में 5.37 फीसदी और बालिकाओं के उत्तीर्ण प्रतिशत में 4.40 की वृद्धि हुई।
संस्थागत बालक परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 5.32, संस्थागत बालिका परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 4.39, व्यक्तिगत बालक परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 6.40 और व्यक्तिगत बालिका परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 3.79 बढ़ा है। इंटरमीडिएट में भी वर्ष 2020 की तुलना में परिणाम बेहतर रहा। संपूर्ण परीक्षार्थियों के उत्तीर्ण प्रतिशत में 10.70 फीसदी, बालकों के उत्तीर्ण प्रतिशत में 12.33, बालिकाओं के उत्तीर्ण प्रतिशत में 8.19, ससम्मान प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों के प्रतिशत में 2.11 और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की संख्या में 7.58 की वृद्धि हुई है।
पिछली 11 परीक्षाओं में हाईस्कूल का रिजल्ट सर्वश्रेष्ठ
वर्ष 2011 से अब तक यूपी बोर्ड की ओर से 12 बार हाईस्कूल का रिजल्ट घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में कोविड के कारण बिना परीक्षा कराए परीक्षार्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया गया था और 99.53 फीसदी परिणाम आया था। वहीं, 2011 से अब हाईस्कूल की 11 परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं और इनमें से वर्ष 2022 का परिणाम सर्वश्रेष्ठ रहा है। वर्ष 2011 में हाईस्कूल का रिजल्ट 70.82 फीसदी, 2012 में 83.75 फीसदी, 2013 में 86.63 फीसदी, 2014 में 86.71 फीसदी, 2015 में 83.74 फीसदी, 2016 में 87.66 फीसदी, 2017 में 81.18 फीसदी, 2018 में 75.16 फीसदी, 2019 में 80.07 फीसदी, 2020 में 83.31 फीसदी और वर्ष 2022 में 88.18 फीसदी रिजल्ट रहा।
इंटर के परिणाम में भी हुआ सुधार
यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2021 को छोड़ दें तो 2017 से अब तक हुईं पांच परीक्षाओं में इस बार इंटर का परिणाम सर्वश्रेष्ठ रहा। वर्ष 2017 मे इंटरमीडिएट का रिजल्ट 82.62 फीसदी, 2018 में 72.43 फीसदी, 2019 में 70.06 फीसदी और 2020 की परीक्षा में 74.63 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण घोषित किए गए थे। इस बार इंटर का रिजल्ट 85.33 फीसदी रहा। वहीं, वर्ष 2021 में कोविड के कारण 97.88 फीसदी परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा उत्तीर्ण घोषित किया गया था।