up assembly election 2022 : विधानसभा चुनाव से पहले प्रयागराज में बसपा को लगा जोरदार झटका
हंडिया और प्रतापपुर सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। मुस्लिम और पिछड़ी जाति को सपा का बेस वोट भी माना जाता है। इन्हीं बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले दोनों विधायकों के सपा की सदस्यता ग्रहण करने पर सपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है। यह जमीन पर तभी असर करेगी जब पार्टी अंतर्कलह से निपटने में सफल होगी। दोनों विधानसभा में पांच साल से खून पसीना एक करके पार्टी का झंडा उठाए कई नेता टिकट की कतार में हैं। आयातित नेता को टिकट मिलने पर मतभेद सामने आ सकता है।
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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बसपा को बड़ा झटका लगा है। बसपा के दो विधायकों हंडिया के हाकिमलाल बिंद और प्रतापपुर के विधायक मुज्तबा सिद्दीकी ने लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन विधायकों का सपा में क्या भविष्य होगा। आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें सपा से टिकट मिलेगा या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन दो विधायकों के पार्टी छोड़ने से बसपा को प्रयागराज में जोरदार झटका लगा है।
हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती इन दोनों विधायकों को करीब छह महीने पहले ही अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया था। तब से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि यह दोनों सपा का दामन थाम सकते हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले बसपा विधायकों के सपा ज्वाइन करने को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस बहाने पार्टी ने कई सियासी समीकरणों को साधा है। पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ पार्टी ने संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा के खिलाफ सपा ही मुख्य विपक्षी दल है।
अंतर्कलह रोकना सपा के लिए होगी चुनौती
विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सभी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। सपा के साथ कांग्रेस भी इस बार आक्रामक दिख रही है। सभी विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत होने की होड़ है, ताकि मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जा सके। इस कवायद के बीच प्रतापपुर के बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद का साथ सपा के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। सपा का बेस वोट मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग माना जाता है।
इसी बिरादरी से ताल्लुकात रखने वाले दो विधायकों के पार्टी में शामिल होने पर प्रयागराज में पार्टी की स्थिति मजबूत हो सकती है, बशर्ते पार्टी जिले में अंतर्कलह रोकने में सफल होगी तभी यह संभव होगा। क्योंकि पिछले चुनाव में सपा से प्रत्याशी रहीं निधि यादव के साथ कई और नेता पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से ही क्षेत्र में सक्रिय हैं और आगामी चुनाव में सपा से टिकट के लिए एड़ी चोटी का पसीना एक किए हुए हैं।
प्रयागराज की सियासी समीकरण को देखें तो सपा के पूरे मंडल में एक मात्र विधायक उज्जवल रमण सिंह हैं। ऐसे में हाकिम लाल और मुज्तबा सिद्दीकी की बसपा से नाराजगी पर सपा नेताओं शुरू से ही इन पर नजर रही और इनको अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए कोशिशें की जाती रहीं।
लोकसभा चुनाव में बगावत का था आरोप
हाकिमलाल बिंद और मुज्तबा सिद्दीकी पर लोकसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार के खिलाफ जाने का भी आरोप लगा था। मौजूदा विधायक होने के बावजूद इनके टिकट कटने की बात भी सामने आने लगी थी। ऐसे में बसपा विधायकों ने दूसरे दलों में संपर्क साधना शुरू कर दिया था। इस नाराजगी को बगावती रूप देने के लिए सपा हाईकमान ने कभी बसपा में रहे अपने वरिष्ठ नेता को आगे किया। बताया जा रहा है कि उन्हीं सपा नेता की अगुवाई में बगावत की पूरी पटकथा लिखी गई और दोनों विधायकों की अखिलेश यादव से मुलाकात भी कराई गई। राज्यसभा चुनाव के दौरान यह विधायक बसपा प्रत्याशी के प्रस्तावक बने थे लेकिन एन मौके पर अपना नाम वापस ले लिया। इनकी कूटनीतिक चाल के बावजूद बसपा प्रत्याशी को नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन इनकी सपा से नजदीकी जरूर बढ़ गई थी।
हंडिया, प्रतापपुर में है सपा का मजबूत आधार
जिले की सियासत को देखें तो खासतौर पर पिछड़ी जाति बहुल वाले हंडिया और प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में इन दोनों विधायकों के आने से सपा को अपने परंपरागत मतों के ध्रुवीकरण में मदद मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बसपा से बगावत करने वाले दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता बची रहती है तो सपा जिले में तीन मौजूदा विधायकों के साथ आगामी चुनाव में उतरेगी। वहीं अन्य विपक्षी दलों के खाते में एक भी विधायक नहीं होगा। इसका भी सपा को फायदा हो सकता है। ऐसे में बसपा विधायकों के बगावत को सपा के लिए उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।