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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP: Allahabad High Court Upholds Life Sentence of Stepfather in Two-Year-Old’s Murder

UP: मां के आंसुओं ने दी गवाही, मासूम के कातिल सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार; कोर्ट ने की ये टिप्पणी

Sat, 04 Jul 2026 12:59 PM IST
Sharukh Khan सुनील यादव, अमर उजाला, प्रयागराज
सुनील यादव, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 04 Jul 2026 12:59 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मासूम के कातिल सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा-लाल के असली कातिल को नहीं छोड़ सकती है मां, न पति को फंसा सकती है।
 

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UP: Allahabad High Court Upholds Life Sentence of Stepfather in Two-Year-Old’s Murder
Allahabad High Court - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां की गवाही पर मासूम के कातिल सौतेले पिता की उम्रकैद पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने कहा कि भले ही सारे गवाह मुकर जाएं पर मां के आंसुओं पर संदेह नहीं किया जा सकता। दो साल बाद हुई गवाही के दौरान भी उनके आंसू नहीं थमे थे। कोई मां अपने लाल के असली कातिल को नहीं छोड़ सकती है।
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इस भावुक टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने गोरखपुर के प्रदीप उर्फ अमन चौरसिया की अपील खारिज कर दी। प्रदीप को ट्रायल कोर्ट ने 27 मई 2022 को दो साल के सौतेले बेटे की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। वह 31 अक्तूबर 2015 से जेल में है।
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मामला गोरखपुर चिलुवाटल थाना क्षेत्र का है। 28 अक्तूबर 2015 को मुन्नी देवी ने अपने दूसरे पति प्रदीप के खिलाफ बेटे की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि महाराजगंज निवासी अपने पहले पति से जन्मे बेटे अभिमन्यु संग दूसरे पति प्रदीप संग किराये के मकान में रहती थी। दूसरे पति से एक बेटा पैदा हुआ। इसके बाद प्रदीप अभिमन्यु से नफरत से नफरत करने लगा। इस कारण प्रदीप ने उसकी हत्या कर दी।
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पुलिस ने प्रदीप को गिरफ्तार कर जेल भेजा। विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया। इस पर करीब पांच साल चले ट्रायल में नौ गवाह पेश किए गए। इनमें से पांच गवाह मुकर गए। मां की गवाही में भी कई विरोधाभास आए। इन्हें आधार बनाकर प्रदीप ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।

 
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अपीलार्थी की दलील
अभियोजन पक्ष के नौ गवाहों में से पांच गवाहों ने बयान बदले। वादी मां ने भी विरोधाभासी बयान दिए। चिकित्सा साक्ष्य अभियोजन की कहानी से मेल नहीं खाते। घटनास्थल का नक्शा नजरी नहीं बनाया गया था। जघन्य अपराध का कोई उद्देश्य नहीं उजागर होता है। मुन्नी देवी दूसरे पति को फंसाना चाहती हैं। ट्रायल कोर्ट ने केवल अनुमानों और अटकलों के आधार पर सजा सुनाई है।

अभियोजन के तर्क
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि दो साल के बच्चे को गला घोंटकर मारा गया था। यह क्रूरता की पराकाष्ठा है। मुकरने वाले गवाह आरोपी के रिश्तेदार ही हैं। मां के बयान पर संदेह जताना गलत है। बयानों में भिन्नता हो सकती है लेकिन वह घटना की एकमात्र चश्मदीद हैं। घटना के वक्त घर में थीं।
तस्वीर में गवाही के दौरान रोती दिखीं मां

तस्वीर में रोती दिखी मां
कोर्ट को दस्तावेज में एक तस्वीर मिली। घटना के करीब दो साल बाद 29 जून 2017 को गवाही के दौरान मां बेहद भावुक थी। उनके आंसू लगातार बह रहे थे। इस गमगीन माहौल को देखते हुए कोर्ट को मां की गवाही छह महीने से ज्यादा समय तक टालनी पड़ी थी। ट्रायल कोर्ट ने फैसले में मां के इस आचरण पर भी विचार किया था।

 

कोर्ट की टिप्पणी- भारतीय महिला पति को नहीं फंसा सकती
अपील खारिज कर कोर्ट ने कहा कि मां से जिरह में विरोधाभास भले हों लेकिन गवाही में ऐसा दाग नहीं है उसे संदिग्ध माना जा सके। भारतीय परंपरा व संस्कृति में कोई महिला अपने दूसरे पति को अपने ही मासूम बच्चे के कत्ल में नहीं फंसा सकती जिसके लिए उसने पहले पति को छोड़ दिया हो। 
 
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