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अनट्रेंड परीक्षक जांचेंगे 62 लाख स्टुडेंट्स के पेपर
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Wed, 24 Apr 2013 01:31 PM IST
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परीक्षाओं की तरह ही यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल, इंटर की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए भी भारी भरकम तैयारियां की लेकिन सब धरी रह गईं।
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बेहतर नंबरिंग के टिप्स तैयार किए, प्रशिक्षण के लिए सीडी बनी लेकिन सब बेकार।
परीक्षार्थियों को अधिक से अधिक नंबर मिलें, इसके लिए मूल्यांकन की नई नीति तैयार की गई थी लेकिन इसका उपयोग परीक्षकों को करना है और उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई है।
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मूल्यांकन बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। मूल्यांकन में बेहतरी के लिए परीक्षा के दौरान कई कोशिशें की गईं। परीक्षार्थियों को अच्छे अंक मिलें, इसके लिए मूल्यांकन का खाका बनाया गया।
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शासन की तमाम कोशिशों के बाद भी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के 62 लाख परीक्षार्थियों की कापियां ऐसे हाथों में जा रही हैं, जिन्हें नए मूल्यांकन नियमों की कोई जानकारी नहीं है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने ऐलान किया है कि इस बार मूल्यांकन का जो तरीका अपनाया गया है, उससे यूपी बोर्ड के छात्र सीबीएसई, सीआईएससीई वालों के बराबर या आगे खड़े नजर आएंगे।
ट्रेनिंग की तैयारियां पूरी होने के बाद भी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के परीक्षकों को प्रशिक्षित नहीं किया जा सका। यूपी बोर्ड ने डीआईओएस और प्रधानाचार्यों को नए बदलावों के बारे में जानकारी दी लेकिन परीक्षकों को कुछ नहीं बताया गया।
मूल्यांकन समीक्षा बैठक में निदेशक ने अबकी नंबर देने के नियमों के साथ परीक्षकों को सोच बदलने को कहा था। सलाह दी थी कि केवल नंबर काटने के ध्येय से कापियां न जांचें। सवालों में सही अंश तलाशे जाएं और उन पर नंबर देने की कोशिश हो।
यह सब तब संभव होगा जब परीक्षक जवाब जांचने के तरीकों की ट्रेनिंग लेंगे। बिना परीक्षण के तय है कि पुराने ढर्रे पर कापियां जांची जाएंगी जिससे परीक्षार्थियों को नुकसान ही होगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव ने यह तो माना कि मंगलवार तक परीक्षकों को ट्रेनिंग नहीं दी गई। उनके मुताबिक सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि बृहस्पतिवार को मूल्यांकन शुरू होने से पहले सभी परीक्षकों को प्रशिक्षित किया जाए लेकिन जो तैयारियां हैं, उसमें यह संभव नहीं दिख रहा।