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विवि, कॉलेजों में शिक्षकों को मिलेगा सत्र लाभ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 15 Oct 2016 02:22 AM IST
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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शुक्रवार को लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत शिक्षकों को सत्र लाभ दिए जाने की व्यवस्था फिर से बहाल कर दी गई है। इसके तहत दो जुलाई 2016 से 30 जून 2017 के बीच रिटायर होने वाले विश्वविद्यालय और संघटक कॉलेजाें के सभी अध्यापकों को इसका लाभ मिलेगा। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के खिलाफ जांच की राष्ट्रपति से संस्तुति मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिए गए इस फैसले को डैमेज कंट्रोल के रूप में देख जा रहा है। इतना ही नहीं इस बाबत गठित कमेटी की संस्तुति पर वर्तमान सत्र से पहले रिटायर अध्यापकों की पुनर्नियुक्ति के लिए भी आवेदन मांगा गया है।
कुलपति की ओर से आदेश जारी किया गया था कि अध्यापकों को सत्र लाभ नहीं दिया जाएगा। 65 साल की आयु पूरी करने वाले महीने की आखिरी तारीख को ही वे सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जबकि, इससे पहले अध्यापकों को सत्र लाभ के तहत 30 जून तक पढ़ाने का मौका मिलता था। इसके अलावा कुलपति ने पुनर्नियुक्ति का प्रावधान खत्म करने भी आदेश जारी कर दिया था। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्नियुक्ति के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन को कदम वापस खींचना पड़ा था लेकिन सत्र लाभ के फैसले पर अफसर अडिग रहे। इन दोनों फैसलों को लेकर अध्यापकों में कुलपति के खिलाफ काफी नाराजगी रही। कुलपति के कई अन्य निर्णयों की भी अध्यापकाें तथा अन्य लोगों ने राष्ट्रपति तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय में शिकायत की है। इस पर राष्ट्रपति ने जांच की संस्तुति भी कर दी है। इसके अलावा अकेले विश्वविद्यालय में वर्तमान सत्र में 12 अध्यापक रिटायर हो रहे हैं। कॉलेजों में यह संख्या काफी अधिक है। कई अध्यापक तो रिटायर भी हो चुके हैं। ऐसे में अध्यापकों की कमी से जूझ रहे विश्वविद्यालय और कॉलेजों के सामने नियमित कक्षाओं की समस्या और बढ़ गई थी। ऐसे में सत्र लाभ की व्यवस्था खत्म करने का फैसला वापस लिए जाने की मांग लगातार की जा रही थी। इन घटनाक्रमाें के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्र लाभ की व्यवस्था बहाल करने आदेश जारी कर दिया है। जुलाई से अब तक रिटायर हो चुके शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा। पीआरओ प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार सत्र 2015-16 में रिटायर शिक्षक पुनर्नियुक्ति के लिए सभी डाक्यूमेंट के साथ रजिस्ट्रार के यहां आवेदन कर सकते हैं।
विवि में छात्रों का निष्कासन होगा वापस
तीन सदस्यीय कमेटी ने कर दी है संस्तुति, एक-दो दिन में जारी हो सकता है आदेश
इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह समेत आठ छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को इस बाबत तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। जानकारी के अनुसार सदस्यों ने निलंबन और निष्कासन वापस लेने की संस्तुति भी कर दी है। एक-दो दिनों में इस बाबत आदेश जारी कर दिया जाएगा। छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस लेने का कुलपति पर काफी दबाव था। उनके खिलाफ जांच की संस्तुति के बाद यह दबाव और बढ़ गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अचानक लिए गए इस फैसले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अफसर इस बाबत कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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प्रवेश परीक्षा में धांधली समेत कई मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले आंदोलनरत छात्रों ने दो अगस्त को कुलपति दफ्तर में तालाबंदी कर दी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पांच अगस्त को लिए गए आदेश में इसमें शामिल छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, संयुक्त मंत्री श्रवण जायसवाल, छात्र नेता आनंद सिंह निक्कू और सूर्य कुमार मिश्रा को निष्कासित कर दिया गया था। इनके अलावा सांस्कृतिक सचिव जितेंद्र शुक्ला, अनुभव उपाध्याय, नलिनी मिश्रा और हिमांशु पांडेय के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। छात्रों के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी इसकी शिकायत मानव संसाधन विकास मंत्रालय में की है। इनमें से हाईकोर्ट के आदेश पर नलिनी मिश्रा का निलंबन पहले ही वापस लिया जा चुका है। हर तरफ से दबाव बढ़ने के बाद अब सात अन्य छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि कुछ शर्तों के साथ कमेटी के सदस्यों ने निष्कासन और निलंबन वापस लेने की संस्तुति कर दी है। हालांकि चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार ने कमेटी गठित किए जाने की बात तो स्वीकार की लेकिन किसी तरह की संस्तुति या अन्य किसी निर्णय से उन्होंने इंकार किया। संघटक कॉलेज अध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा ने छात्रों का निलंबन और निष्कासन वापस लिए जाने की पहल तथा सत्र लाभ की व्यवस्था फिर से बहाल करने के विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का स्वागत किया है।
कुलपति छुट्टी पर
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सत्र लाभ की व्यवस्था बहाल करने के फैसले तथा छात्र नेताओं के निलंबन और निष्कासन वापस लिए जाने की कार्रवाई शुरू करने के बाद कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू दो सप्ताह की छुट्टी पर जा रहे हैं। हालांकि, उनके अवकाश पर जाने को लेकर तरह-तरह की कयासबाजी भी शुरू हो गई है। इसके विपरीत विश्वविद्यालय के अफसरों का कहना है कि उनके बेटे की शादी है। इसी सिलसिले में वह छुट्टी पर जा रहे हैं।
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कुलपति की ओर से आदेश जारी किया गया था कि अध्यापकों को सत्र लाभ नहीं दिया जाएगा। 65 साल की आयु पूरी करने वाले महीने की आखिरी तारीख को ही वे सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जबकि, इससे पहले अध्यापकों को सत्र लाभ के तहत 30 जून तक पढ़ाने का मौका मिलता था। इसके अलावा कुलपति ने पुनर्नियुक्ति का प्रावधान खत्म करने भी आदेश जारी कर दिया था। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्नियुक्ति के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन को कदम वापस खींचना पड़ा था लेकिन सत्र लाभ के फैसले पर अफसर अडिग रहे। इन दोनों फैसलों को लेकर अध्यापकों में कुलपति के खिलाफ काफी नाराजगी रही। कुलपति के कई अन्य निर्णयों की भी अध्यापकाें तथा अन्य लोगों ने राष्ट्रपति तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय में शिकायत की है। इस पर राष्ट्रपति ने जांच की संस्तुति भी कर दी है। इसके अलावा अकेले विश्वविद्यालय में वर्तमान सत्र में 12 अध्यापक रिटायर हो रहे हैं। कॉलेजों में यह संख्या काफी अधिक है। कई अध्यापक तो रिटायर भी हो चुके हैं। ऐसे में अध्यापकों की कमी से जूझ रहे विश्वविद्यालय और कॉलेजों के सामने नियमित कक्षाओं की समस्या और बढ़ गई थी। ऐसे में सत्र लाभ की व्यवस्था खत्म करने का फैसला वापस लिए जाने की मांग लगातार की जा रही थी। इन घटनाक्रमाें के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्र लाभ की व्यवस्था बहाल करने आदेश जारी कर दिया है। जुलाई से अब तक रिटायर हो चुके शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा। पीआरओ प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार सत्र 2015-16 में रिटायर शिक्षक पुनर्नियुक्ति के लिए सभी डाक्यूमेंट के साथ रजिस्ट्रार के यहां आवेदन कर सकते हैं।
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विवि में छात्रों का निष्कासन होगा वापस
तीन सदस्यीय कमेटी ने कर दी है संस्तुति, एक-दो दिन में जारी हो सकता है आदेश
इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह समेत आठ छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुक्रवार को इस बाबत तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। जानकारी के अनुसार सदस्यों ने निलंबन और निष्कासन वापस लेने की संस्तुति भी कर दी है। एक-दो दिनों में इस बाबत आदेश जारी कर दिया जाएगा। छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस लेने का कुलपति पर काफी दबाव था। उनके खिलाफ जांच की संस्तुति के बाद यह दबाव और बढ़ गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अचानक लिए गए इस फैसले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अफसर इस बाबत कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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प्रवेश परीक्षा में धांधली समेत कई मुद्दों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले आंदोलनरत छात्रों ने दो अगस्त को कुलपति दफ्तर में तालाबंदी कर दी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पांच अगस्त को लिए गए आदेश में इसमें शामिल छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, संयुक्त मंत्री श्रवण जायसवाल, छात्र नेता आनंद सिंह निक्कू और सूर्य कुमार मिश्रा को निष्कासित कर दिया गया था। इनके अलावा सांस्कृतिक सचिव जितेंद्र शुक्ला, अनुभव उपाध्याय, नलिनी मिश्रा और हिमांशु पांडेय के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। छात्रों के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी इसकी शिकायत मानव संसाधन विकास मंत्रालय में की है। इनमें से हाईकोर्ट के आदेश पर नलिनी मिश्रा का निलंबन पहले ही वापस लिया जा चुका है। हर तरफ से दबाव बढ़ने के बाद अब सात अन्य छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि कुछ शर्तों के साथ कमेटी के सदस्यों ने निष्कासन और निलंबन वापस लेने की संस्तुति कर दी है। हालांकि चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार ने कमेटी गठित किए जाने की बात तो स्वीकार की लेकिन किसी तरह की संस्तुति या अन्य किसी निर्णय से उन्होंने इंकार किया। संघटक कॉलेज अध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा ने छात्रों का निलंबन और निष्कासन वापस लिए जाने की पहल तथा सत्र लाभ की व्यवस्था फिर से बहाल करने के विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का स्वागत किया है।
कुलपति छुट्टी पर
इलाहाबाद (ब्यूरो)। सत्र लाभ की व्यवस्था बहाल करने के फैसले तथा छात्र नेताओं के निलंबन और निष्कासन वापस लिए जाने की कार्रवाई शुरू करने के बाद कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू दो सप्ताह की छुट्टी पर जा रहे हैं। हालांकि, उनके अवकाश पर जाने को लेकर तरह-तरह की कयासबाजी भी शुरू हो गई है। इसके विपरीत विश्वविद्यालय के अफसरों का कहना है कि उनके बेटे की शादी है। इसी सिलसिले में वह छुट्टी पर जा रहे हैं।