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छात्रसंघ पदाधिकारियों का आज से बेमियादी अनशन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 04 May 2016 01:39 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की परास्नातक, क्रेट समेत अन्य पाठ्यक्रमों के लिए भी ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर गतिरोध थमता नहीं दिख रहा। छात्रसंघ पदाधिकारियों और कई अन्य छात्रों ने इस मांग के समर्थन तथा कुलपति पर तानाशाही रवैया का आरोप लगाते हुए बुधवार से बेमियादी अनशन की घोषणा कर दी है। छात्रों के साथ वार्ता में डीएम ने कुलपति से उनकी वार्ता कराने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद छात्र अनशन के फैसले पर अडिग हैं।
ऑफलाइन के मुद्दे पर छात्रसंघ पदाधिकारियों की अगुवाई में छात्रों का कुलपति दफ्तर के सामने धरना-प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। तनाव को देखते हुए पूरा परिसर छावनी में तब्दील रहा। आसपास के क्षेत्रों में भी भारी फोर्स मौजूद रही। छात्रसंघ भवन पर जुटे छात्रों ने पहले बैठक की। इसके बाद उन्होंने परिसर में जुलूस निकाला। इसके बाद वे कुलपति ऑफिस के सामने धरना पर बैठ गए।
हालांकि मंगलवार को छात्रों ने कार्यालय बंद नहीं कराए। छात्र कुलपति से वार्ता पर अड़े रहे, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। इस दौरान हुई सभा में छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने कुलपति पर उनके गाइड को परेशान करने का आरोप लगाया। ऋचा ने बाबत राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है। ऋचा ने कहा कि वह और छात्र कुलपति की कार्रवाई से डरकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। छात्रहित में ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। अन्य छात्र नेताओं ने भी कुलपति पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए तेज आंदोलन की चेतावनी दी। तकरीबन चार बजे कुलपति को भारी फोर्स की मौजूदगी में परिसर से बाहर निकाला गया। कुलपति के जाने के बाद छात्रों ने बुधवार से आमरण अनशन की चेतावनी दी। छात्रसंघ पदाधिकारियों के अलावा मानस शर्मा आदि ने भी अनशन पर बैठने की घोषणा की है।
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हस्तक्षेप की मांग को लेकर रात में तकरीबन सात बजे छात्रसंघ पदाधिकारियों ने डीएम से वार्ता की। उन्होंने डीएम से कुलपति के साथ वार्ता की मध्यस्तता की मांग की। छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने बताया कि डीएम ने आश्वासन दिया है कि वे कुलपति से वार्ता कराने का प्रयास करेंगे। धरना-प्रदर्शन में छात्रसंघ पदाधिकारियों के अलावा दिनेश यादव, चंदन सिंह, राघवेंद्र यादव, अजीत यादव, अखिलेश गुप्ता, मानस शर्मा आदि शामिल रहे।
छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने छात्रसंघ पदाधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता के कुलपति के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विक्रांत का कहना है कि उनका बिल काफी पुराना है। उनके खर्च को एडवाइजरी कमेटी ने मंजूरी दे दी थी। वित्त अधिकारी ने भी उसे मंजूरी दे दी थी, लेकिन ऑफलाइन के मुद्दे शुरू आंदोलन को दबाने के लिए कुलपति ने इस तरह के आरोप लगाए हैं। विक्रांत ने सवाल उठाया कि फाइल पर शुरू में ही क्यों नहीं आपत्ति लगाई गई। विक्रांत का कहना है कि प्रोफेसर बीएन सिंह पर एक करोड़ 72 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप है। इसके बावजूद उन्हें फिर से प्रवेश प्रकोष्ठ का निदेशक बना दिया गया। उन्हाेंने कुलपति के कई अन्य फैसलों पर भी सवाल उठाया। विक्रांत का कहना है कि विजिलेंस जांच तथा अन्य कार्रवाई का डर दिखाने से आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज से गुस्सा बढ़ गया है। छात्र तथा कई अन्य संगठनों की ओर से इसकी कड़े शब्दों में निंदा की गई है। संगठनों ने छात्रों की ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग का समर्थन भी किया है।
एबीवीपी की बैठक में कुलपति के कई फैसलों पर आपत्ति उठाई गई। सदस्यों ने ऑफलाइन के मुद्दे पर आंदोलन की घोषणा की। बैठक में सूर्य प्रकाश मिश्रा, डॉ.राजेंद्र प्रसाद तिवारी, देवेंद्र प्रकाश, शैलेंद्र मौर्या, अजीत उपाध्याय आदि मौजूद रहे। अजीत ने बताया कि संगठन विरोधी कार्य करने के कारण तीन छात्रों को संगठन से बाहर कर दिया गया है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स एंड यूथ वेलफेयर एसोसिएशन की एएन झा हॉस्टल में हुई बैठक में विजय द्विवेदी, अनिल पांडेय, सर्वम द्विवेदी आदि छात्र नेताओं ने परिसर के बिगड़ते हालात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने छात्रों पर लाठी चार्ज की निंदा करने के साथ ऑफलाइन का विकल्प देने की मांग का समर्थन किया।
आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राजेश सचान, अनुराग वर्मा, सुनील यादव, हरिओम सिंह, आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के मनीष देव, अजीत सिंह, अमितांशू, छात्र युवा संघर्ष समिति अनुपम सिंह, प्रखर श्रीवास्तव आदि ने छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा की और छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। कांग्रेस नेता मुकुंद तिवारी, तारिक सईद अज्जू, शिव मनोरथ शुक्ल, हरदेव सिंह, निजामउद्दीन आदि ने भी लाठीचार्ज की निंदा की और दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने छात्रों के आंदोलन का समर्थन भी किया।
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ऑफलाइन के मुद्दे पर छात्रसंघ पदाधिकारियों की अगुवाई में छात्रों का कुलपति दफ्तर के सामने धरना-प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। तनाव को देखते हुए पूरा परिसर छावनी में तब्दील रहा। आसपास के क्षेत्रों में भी भारी फोर्स मौजूद रही। छात्रसंघ भवन पर जुटे छात्रों ने पहले बैठक की। इसके बाद उन्होंने परिसर में जुलूस निकाला। इसके बाद वे कुलपति ऑफिस के सामने धरना पर बैठ गए।
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हालांकि मंगलवार को छात्रों ने कार्यालय बंद नहीं कराए। छात्र कुलपति से वार्ता पर अड़े रहे, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। इस दौरान हुई सभा में छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने कुलपति पर उनके गाइड को परेशान करने का आरोप लगाया। ऋचा ने बाबत राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है। ऋचा ने कहा कि वह और छात्र कुलपति की कार्रवाई से डरकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। छात्रहित में ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। अन्य छात्र नेताओं ने भी कुलपति पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए तेज आंदोलन की चेतावनी दी। तकरीबन चार बजे कुलपति को भारी फोर्स की मौजूदगी में परिसर से बाहर निकाला गया। कुलपति के जाने के बाद छात्रों ने बुधवार से आमरण अनशन की चेतावनी दी। छात्रसंघ पदाधिकारियों के अलावा मानस शर्मा आदि ने भी अनशन पर बैठने की घोषणा की है।
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हस्तक्षेप की मांग को लेकर रात में तकरीबन सात बजे छात्रसंघ पदाधिकारियों ने डीएम से वार्ता की। उन्होंने डीएम से कुलपति के साथ वार्ता की मध्यस्तता की मांग की। छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने बताया कि डीएम ने आश्वासन दिया है कि वे कुलपति से वार्ता कराने का प्रयास करेंगे। धरना-प्रदर्शन में छात्रसंघ पदाधिकारियों के अलावा दिनेश यादव, चंदन सिंह, राघवेंद्र यादव, अजीत यादव, अखिलेश गुप्ता, मानस शर्मा आदि शामिल रहे।
छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने छात्रसंघ पदाधिकारियों पर वित्तीय अनियमितता के कुलपति के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विक्रांत का कहना है कि उनका बिल काफी पुराना है। उनके खर्च को एडवाइजरी कमेटी ने मंजूरी दे दी थी। वित्त अधिकारी ने भी उसे मंजूरी दे दी थी, लेकिन ऑफलाइन के मुद्दे शुरू आंदोलन को दबाने के लिए कुलपति ने इस तरह के आरोप लगाए हैं। विक्रांत ने सवाल उठाया कि फाइल पर शुरू में ही क्यों नहीं आपत्ति लगाई गई। विक्रांत का कहना है कि प्रोफेसर बीएन सिंह पर एक करोड़ 72 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप है। इसके बावजूद उन्हें फिर से प्रवेश प्रकोष्ठ का निदेशक बना दिया गया। उन्हाेंने कुलपति के कई अन्य फैसलों पर भी सवाल उठाया। विक्रांत का कहना है कि विजिलेंस जांच तथा अन्य कार्रवाई का डर दिखाने से आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज से गुस्सा बढ़ गया है। छात्र तथा कई अन्य संगठनों की ओर से इसकी कड़े शब्दों में निंदा की गई है। संगठनों ने छात्रों की ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने की मांग का समर्थन भी किया है।
एबीवीपी की बैठक में कुलपति के कई फैसलों पर आपत्ति उठाई गई। सदस्यों ने ऑफलाइन के मुद्दे पर आंदोलन की घोषणा की। बैठक में सूर्य प्रकाश मिश्रा, डॉ.राजेंद्र प्रसाद तिवारी, देवेंद्र प्रकाश, शैलेंद्र मौर्या, अजीत उपाध्याय आदि मौजूद रहे। अजीत ने बताया कि संगठन विरोधी कार्य करने के कारण तीन छात्रों को संगठन से बाहर कर दिया गया है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स एंड यूथ वेलफेयर एसोसिएशन की एएन झा हॉस्टल में हुई बैठक में विजय द्विवेदी, अनिल पांडेय, सर्वम द्विवेदी आदि छात्र नेताओं ने परिसर के बिगड़ते हालात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने छात्रों पर लाठी चार्ज की निंदा करने के साथ ऑफलाइन का विकल्प देने की मांग का समर्थन किया।
आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राजेश सचान, अनुराग वर्मा, सुनील यादव, हरिओम सिंह, आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के मनीष देव, अजीत सिंह, अमितांशू, छात्र युवा संघर्ष समिति अनुपम सिंह, प्रखर श्रीवास्तव आदि ने छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा की और छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। कांग्रेस नेता मुकुंद तिवारी, तारिक सईद अज्जू, शिव मनोरथ शुक्ल, हरदेव सिंह, निजामउद्दीन आदि ने भी लाठीचार्ज की निंदा की और दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने छात्रों के आंदोलन का समर्थन भी किया।