Umesh Pal Hatyakand : हत्या के दो दिन पहले ही सदाकत ने छोड़ दिया था प्रयागराज, नेपाल भागते समय एसटीएफ ने दबोचा
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम बोर्डिंग हास्टल में उमेश पाल के षड्यंत्र का पूरा खाका तैयार करने वाले सदाकत खान ने 22 फरवरी की रात ही प्रयागराज छोड़ दिया था। वह सीधा गाजीपुर स्थित गांव पहुंचा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम बोर्डिंग हास्टल में उमेश पाल के षड्यंत्र का पूरा खाका तैयार करने वाले सदाकत खान ने 22 फरवरी की रात ही प्रयागराज छोड़ दिया था। वह सीधा गाजीपुर स्थित गांव पहुंचा। 24 फरवरी की शाम उसके व्हाट्सएप पर जैसे ही हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज पहुंची, वह समझ गया कि पुलिस अब जल्द ही उस तक पहुंच जाएगी। उसने नेपाल भागने का निर्णय ले लिया। इसी दौरान एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया।
मुस्लिम बोर्डिंग में रहते हुए गाजीपुर के सदाकत खान ने छात्र राजनीति शुरू की थी। उसे शौक था कि बड़े बड़े लोगों के साथ उसका उठना बैठना हो। इसी दौरान हास्टल आने जाने वाले गुलाम हसन निवासी मेंहदौरी से उसकी मुलाकात हुई। गुलाम का भी शौक बड़े बड़े लोगों के साथ उठना बैठना था। वह अक्सर अपनी फोटो सोशल मीडिया प्रोफाइल पर डालता था। सदाकत और गुलाम में दोस्ती हुई।
इसी के बाद गुलाम ने अतीक गिरोह से सदाकत का परिचय कराया। धीरे धीरे सदाकत, अतीक और अशरफ तक पहुंच गया। साबरमती जेल में उमेश को खत्म करने का निर्णय लिया गया। इसका अमली जामा पहनाने के लिए मुस्लिम बोर्डिंग हास्टल में सदाकत खान के कमरे को चुना गया। कई बैठकें की गईं। कुछ बैठकों में अतीक और अशरफ भी व्हाट्सएप काॅल के जरिए शामिल हुए।
उमेश को खत्म करने की तारीख तय हुई तो सदाकत 22 फरवरी की रात में यहां से गाजीपुर के लिए निकल गया। वह सीधे अपने गांव बारा गहमर पहुंचा। यहां वह 24 की शाम तक रहा। शाम को जैसे ही उमेश हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज और शूटरों के फोटो वायरल हुए, सदाकत के व्हाट्सएप पर आ गए। उसने गुड्डू मुस्लिम, गुलाम, अरमान, असद और साबिर तो खुले चेहरे में गोली चलाते देखा तो समझ गया अब वह बच नहीं सकता।
उसने तुरंत अपनी मां और बहन को तैयार किया। कहा कि नेपाल जाना है। वह गोरखपुर के लिए निकल गया लेकिन उसने पता लगाया कि गोरखपुर बार्डर पर सख्त चेकिंग हो रही है। इसके बाद वह बस्ती के लिए निकलने की वाला था कि एसटीएफ ने उसे दबोच लिया। घटना के समय उसकी मां और बहन भी साथ में थे। पूछताछ के बाद एसटीएफ ने मां और बहन को जाने दिया गया।
नफीस करता था अतीक के कुनबे की मदद, कई और राज खुले
सिविल लाइंस में ईट आन रेस्टोरेंट के मालिक नफीस अहमद से पूछताछ में पता चला है कि वह कई तरीके से अतीक के कुनबे की मदद करता था। अतीक-अशरफ जो भी इशारा करते, नफीस का काम उसे पूरा करना होता था। उससे पूछताछ में कई राज खुले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी उन राजों का खुलासा नहीं किया है। नफीस की रिश्तेदार रुखसार की आज भी पता नहीं चला।
उमेश पाल हत्याकांड में प्रयुक्त क्रेटा कार नफीस अहमद की थी, जिसे कुछ महीने पहले उसने अपनी रिश्तेदार रुखसार को ट्रांसफर कर दिया था। चकिया में कार मिलने के बाद से ही रुखसार को खोजा जा रहा है। नफीस को भी तभी से पुलिस हिरासत में लिया गया है। पता चला कि अतीक के कुनबे के लिए नफीस फंडिंग करता है।
बेटों को जहां जाना होता है, उनके टिकट से लेकर ठहरने तक की व्यवस्था की जिम्मेदारी नफीस की ही होती है। उसके बैंक एकाउंट्स और हालिया ट्रांजैक्शन से भी कई राज खुले हैं। घटना में कार के अलावा एक बाइक का भी प्रयोग किया गया था। शूटरों ने कार के साथ साथ बाइक को चकिया में खड़ी कर दी थी। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बाइक चोरी की थी। बाइक किसकी थी, इसकी जानकारी अभी पुलिस नहीं दे रही है।