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Umesh Pal Murder Case: हत्या के बाद 4 दिन तक शहर में रहा था शूटर साबिर, इस शख्स ने रुपये दे बस से कानपुर भेजा
Wed, 12 Apr 2023 11:36 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 12 Apr 2023 11:36 AM IST
सार
उमेश पाल हत्याकांड में शामिल पांच लाख का इनामी शूटर साबिर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने साबिर के मददगार को उठाया है। शूटर को 50 हजार रुपये देकर बस से कानपुर भेजा था।
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उमेश पाल हत्याकांड। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
उमेश पाल हत्याकांड में शामिल पांच लाख का इनामी शूटर साबिर वारदात के चार दिन बाद तक शहर में छिपा रहा था। उसे शरण करेली के एक प्लॉटर ने दी थी जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ में यह बात सामने आई है कि उसने साबिर को 50 हजार रुपये भी दिए थे।
पूरामुफ्ती स्थित मरियाडीह निवासी साबिर अतीक का ड्राइवर है। अतीक के जेल जाने के बाद वह शाइस्ता परवीन की गाड़ी चलाने लगा। वह शाइस्ता व उसके बेटों के साथ साए की तरह रहता था और उनके साथ उसके कई वीडियो भी सामने आए। उमेश पाल हत्याकांड के सीसीटीवी फुटेज में वह राइफल से गोलियां बरसाते नजर आया था। उसने ही गाड़ी में बैठे उमेश के गनर संदीप को गोली मारी थी।
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि हत्याकांड के बाद वह करेली के ऐनुुद्दीनपुर गांव में ठहरा था। तफ्तीश आगे बढ़ाने पर पता चला कि करेली में ही करामात की चौकी मोहल्ले में रहने वाले एक शख्स ने ऐनुद्दीनपुर में छिपने में उसकी मदद की थी। यह शख्स प्लॉटिंग का काम करता है। जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पुख्ता सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में उसने साबिर को छिपने में मदद करने की बात कबूली है।
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उसने पुलिस को बताया कि साबिर से उसकी पुरानी जान पहचान थी। चार दिन रहने के बाद साबिर ने कहा कि वह उसे किसी तरह शहर से बाहर भेजवा दे। इसके बाद उसने उसे 50 हजार रुपये दिए और फिर वह बस से कानपुर चला गया। इसके बाद से उसने कभी कोई संपर्क नहीं किया। फिलहाल करेली पुलिस उससे पूछताछ में जुटी है।
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पूरामुफ्ती स्थित मरियाडीह निवासी साबिर अतीक का ड्राइवर है। अतीक के जेल जाने के बाद वह शाइस्ता परवीन की गाड़ी चलाने लगा। वह शाइस्ता व उसके बेटों के साथ साए की तरह रहता था और उनके साथ उसके कई वीडियो भी सामने आए। उमेश पाल हत्याकांड के सीसीटीवी फुटेज में वह राइफल से गोलियां बरसाते नजर आया था। उसने ही गाड़ी में बैठे उमेश के गनर संदीप को गोली मारी थी।
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पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि हत्याकांड के बाद वह करेली के ऐनुुद्दीनपुर गांव में ठहरा था। तफ्तीश आगे बढ़ाने पर पता चला कि करेली में ही करामात की चौकी मोहल्ले में रहने वाले एक शख्स ने ऐनुद्दीनपुर में छिपने में उसकी मदद की थी। यह शख्स प्लॉटिंग का काम करता है। जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पुख्ता सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में उसने साबिर को छिपने में मदद करने की बात कबूली है।
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उसने पुलिस को बताया कि साबिर से उसकी पुरानी जान पहचान थी। चार दिन रहने के बाद साबिर ने कहा कि वह उसे किसी तरह शहर से बाहर भेजवा दे। इसके बाद उसने उसे 50 हजार रुपये दिए और फिर वह बस से कानपुर चला गया। इसके बाद से उसने कभी कोई संपर्क नहीं किया। फिलहाल करेली पुलिस उससे पूछताछ में जुटी है।
अतीक की बहन आयशा नूरी ने दी आत्मसमर्पण की अर्जी
उमेश पाल हत्याकांड में एक बार फिर सरगर्मियां बढ़ गईं हैं। एक तरफ जहां बरेली से प्रयागराज लाए जा रहे अशरफ ने सीजीएम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर अपना मेडिकल परीक्षण कराए जाने की मांग की है। वहीं, अतीक और अशरफ की बहन आयशा नूरी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दाखिल की है। इस पर सीजीएम न्यायालय ने 13 अप्रैल तक आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
उमेश पाल हत्याकांड में एक बार फिर सरगर्मियां बढ़ गईं हैं। एक तरफ जहां बरेली से प्रयागराज लाए जा रहे अशरफ ने सीजीएम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर अपना मेडिकल परीक्षण कराए जाने की मांग की है। वहीं, अतीक और अशरफ की बहन आयशा नूरी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दाखिल की है। इस पर सीजीएम न्यायालय ने 13 अप्रैल तक आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
अतीक की बहन आयशा नूरी ने अपनी अर्जी में कहा है कि उसे समाचार पत्रों एवं न्यूज चैनलों के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई है कि उमेश पाल अपहरण कांड में उसे भी आरोपित बना दिया गया है। वह न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहती है। इसलिए संबंधित थाना धूमनगंज से आख्या तलब कर लें, जिससे न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर वह अपनी जमानत करा सके।
शाइस्ता के दोनों नाबालिग बेटों के मामले में भी सुनवाई बृहस्पतिवार को
उधर, बरेली जेल से प्रयागराज लाए जा रहे अशरफ की तरफ से अर्जी देकर मांग की गई है कि उसे प्रयागराज की अदालत लाने के दौरान जब जेल से निकाला जाए तो उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाए और न्यायालय में प्रस्तुत करने के पूर्व भी मेडिकल परीक्षण कराया जाए। यह दोनों रिपोर्ट न्यायालय में उसे पेश किए जाते समय साथ में सौंपी जाए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों ही मामलों में आख्या तलब की है। उधर, शाइस्ता की अर्जी पर उसके दोनों नाबालिग बच्चों को पुलिस द्वारा हिरासत में रखे जाने को लेकर 13 अप्रैल को सीजीएम कोर्ट में सुनवाई होगी।
उधर, बरेली जेल से प्रयागराज लाए जा रहे अशरफ की तरफ से अर्जी देकर मांग की गई है कि उसे प्रयागराज की अदालत लाने के दौरान जब जेल से निकाला जाए तो उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाए और न्यायालय में प्रस्तुत करने के पूर्व भी मेडिकल परीक्षण कराया जाए। यह दोनों रिपोर्ट न्यायालय में उसे पेश किए जाते समय साथ में सौंपी जाए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों ही मामलों में आख्या तलब की है। उधर, शाइस्ता की अर्जी पर उसके दोनों नाबालिग बच्चों को पुलिस द्वारा हिरासत में रखे जाने को लेकर 13 अप्रैल को सीजीएम कोर्ट में सुनवाई होगी।