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UGC regulations Act : यूजीसी एक्ट के समर्थन में आइसा ने निकाला मार्च, सुप्रीम कोर्ट फैसले को बताया गलत

Sat, 31 Jan 2026 04:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 31 Jan 2026 04:34 PM IST
सार

ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने यूजीसी रेगुलेशन पर रोक लगाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के तहत प्रयागराज में मार्च कर विरोध दर्ज किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन गेट से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला गया। 

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UGC Regulations Act: AISA marches in support of UGC Act, calls Supreme Court decision wrong
यूजीसी रेगुलेशन एक्ट लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते आईसा कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने यूजीसी रेगुलेशन पर रोक लगाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के तहत प्रयागराज में मार्च कर विरोध दर्ज किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन गेट से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला गया।  मार्च की शुरुआत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन गेट पर सभा के साथ हुई जिसमें विभिन्न छात्र छात्राओं ने अपनी बात रखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर सवाल खड़ा किए। कोर्ट के फैसले को सामाजिक न्याय की अवहेलना और विश्वविद्यालय में व्याप्त सामाजिक हिंसा के पक्ष में बताया। 

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आइसा अध्यक्ष सोनाली यादव ने कहा कि सरकार की ही रिपोर्ट के अनुसार 118% की जातिगत भेदभाव में बढ़ोतरी हुई है। आइसा रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के बाद से ही रोहित एक्ट लागू करने की लड़ाई लड़ता रहा है। इन संघर्षों का ही परिणाम रहा की यूजीसी रेगुलेशन का निर्देश सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आया था और जब यूजीसी का रेगुलेशन बंद करके आया तो सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ही पक्षपात पूर्ण, तथ्यों की अवहेलना करते हुए इस पर रोक लगा दिया गया है।
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यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला विश्वविद्यालय परिसर में व्याप्त जातिगत लैंगिक की हिंसा को बढ़ावा देने वाला है। इस पर निर्णय पर तत्काल रोक लगाते हुए यूजीसी रेगुलेशन को और अधिक जवाबदेही और भागीदारी के साथ लागू किया जाना चाहिए। अन्यथा देश भर में इस शोषण और अन्याय  के खिलाफ लोग सड़कों पर आएंगे। 
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र केतन ने कहा कि जब-जब दलित और पिछड़े अपने हक और अधिकार के लिए आवाज उठाते हैं तब तब शोषणकारी तबके के अंदर डर सताने लगता है और अपने इस शोषण के अधिकार को बनाए रखने के लिए वह सड़कों पर आ जाता है। इसी के खिलाफ यह रेगुलेशन बनाया गया था जिसको सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह रोहित वेमुला, दर्शन सोलंकी जैसी सैकड़ों घटनाओं को वैध ठहराने की कोशिश है, जो बेहद शर्मनाक है। 


इकाई सहसचिव मानवेंद्र ने कहा कि मौजूदा सरकार सामाजिक विषमता के खिलाफ कानून लाने का दिखावा तो कर रही है, लेकिन उसे कानून को बचाने के लिए जरूरी तथ्य और आधार न्यायालय में नहीं रख रही है। शोध छात्र निखिल और आरवाईए के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने भी अपनी बात रखी। कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर आइसा इकाई उपाध्यक्ष सौम्या, शशांक, सुजीत, अमित, आर्यन, सुधीर, प्रदीप, साक्षी, पूजा, गोविंद, राधा, अभिषेक, प्रदीप्त, दिवाकर, अंकुल, अभिषेक, पारस, विश्वेंद्र, प्रिंस, श्वेतांक आदि रहे। 

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