Prayagraj : कागजों से बाहर नहीं आ सकी पर्यटन विकास की द्वादश माधव सर्किट परियोजना, नहीं हो सका टेंडर
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने द्वादश माधव सर्किट बनाने का निर्णय लिया है। महाकुंभ 2025 के पहले पर्यटन की दृष्टि से सौंदर्यीकरण के साथ ही सुविधाओं से सुसज्जित द्वादश माधव सर्किट तैयार किया जाना है। सीएम की सहमति मिलने के बाद प्रस्ताव तैयार करा लिया गया।
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महाकुंभ से पहले प्रदेश सरकार संगमनगरी को आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर वैश्विक पहचान दिलाने के हर जतन कर रही है। इसके लिए जहां मंदिरों, तीर्थों के कायाकल्प पर जोर दिया जा रहा है, वहीं डिजिटल कुंभ म्यूजियम, द्वादश माधव सर्किट, कल्चरल हॉट, भरद्वाज मुनि आश्रम के विस्तार समेत पर्यटन विकास की 30 से अधिक परियोजनाएं तैयार की गई हैं।
अफसोस की बात है कि इनमें से एक पर भी काम शुरू होना तो दूर अभी टेंडर तक नहीं कराया जा सका। इन्हीं वजहों को लेकर हाल में ही कुंभ मेलाधिकारी ने उप पर्यटन निदेशक वीरेश कुमार को न सिर्फ हटाने तक की चेतावनी दे डाली थी, बल्कि कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। यहां हम महाकुंभ से जुड़ी पर्यटन विभाग की कुछ चुनिंदा परियोजनाओं की स्थिति बताने जा रहे हैं। इस अभियान की पहली कड़ी में द्वादश माधव परियोजना के बारे में जानें।
महाकुंभ के पहले पर्यटन विभाग को द्वादश माधव के सौंदर्यीकरण का पूरा करना है काम
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने द्वादश माधव सर्किट बनाने का निर्णय लिया है। महाकुंभ 2025 के पहले पर्यटन की दृष्टि से सौंदर्यीकरण के साथ ही सुविधाओं से सुसज्जित द्वादश माधव सर्किट तैयार किया जाना है। सीएम की सहमति मिलने के बाद प्रस्ताव तैयार करा लिया गया। इस पर 12.34 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। लेकिन, अभी तक पर्यटन विभाग इस परियोजना को लेकर रत्तीभर आगे नहीं बढ़ सका है।
महाकुंभ के तहत पर्यटन विभाग को 30 स्थलों को विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है। इससे महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को आध्यात्मिक नगरी की अलग छटा देखने को मिल सके। त्रिवेणी के तट पर आने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या नगर देवता द्वादश माधव की परिक्रमा करने वालों की है।
इसी को देखते हुए द्वादश माधव सर्किट तैयार कराया जाना है। इसमें द्वादश माधव के कायाकल्प में उनके मुख्य द्वार बनाए जाने हैं। इसके अलावा चहारदीवारी का निर्माण किया जाएगा। अतिक्रमण को हटाकर वहां पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण व पेयजल की व्यवस्था भी की जानी है। द्वादश माधव मंदिरों के आसपास इंटरलॉकिंग और लैंडस्केप, पाथवे निर्माण का भी निर्माण प्रस्तावित है। मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों को ठीक कराया जाएगा और वहां पर लाइट की व्यवस्था की जानी है।
इतने कार्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय भी चाहिए। इस परियोजना को पूरी कराने के लिए शासन की तरफ से अक्तूबर 2024 तक का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी पर्यटन विभाग की तरफ से अभी तक कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है।
चरणबद्ध तरीके से कार्य कराने की बनी थी योजना
माधव मंदिरों के कायाकल्प का कार्य चरणबद्ध तरीके से होना है। पहले चरण में नौ माधव मंदिरों का कायाकल्प किया जाएगा। इसमें झूंसी स्थित संकष्टहर माधव, शंख माधव, द्रौपदी घाट स्थित बिंदु माधव, चौफटका स्थित अनंत माधव, चौक स्थित मनोहर माधव, बीकर गांव स्थित पद्म माधव, छिवकी स्थित गदा माधव, अरैल स्थित आदिवेणी माधव, चक्र माधव मंदिरों का पर्यटन की दृष्टि से संवारा जाना है। इसके लिए सीएम के सामने विस्तृत प्रजेंटेशन किया जा चुका है और इसे हरी झंडी भी मिल चुकी है।
टेंडर की प्रकिया शुरू होने वाली है। गलती मेरी नहीं है। गलत कोई करे और सजा किसी और को मिले, इसमें यही हो रहा है। पर्यटन विकास की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अभी तक किसी एजेंसी के आगे न आने की वजह से कार्य आरंभ नहीं कराया जा सका है। - वीरेश कुमार, उप निदेशक पर्यटन