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वैष्णो देवी की तर्ज पर अब संगम क्षेत्र के लिए भी ट्रस्ट, सेना के वरिष्ठ अफसर होंगे अध्यक्ष

Wed, 27 Nov 2019 10:26 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 27 Nov 2019 10:26 PM IST
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Trust of priests in Prayagraj will become like Vaishno Devi Dham
संगम तट - फोटो : prayagraj

तिरुपति और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर प्रयागराज में भी ट्रस्ट बनाकर संगम क्षेत्र विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सेना ने कार्ययोजना पर मंथन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही ट्रस्ट की ही देखरेख में संगम क्षेत्र की दुकानों की निगरानी भी की जाएगी। तीर्थपुरोहित को भी ट्रस्ट के दायरे में लाकर उनका पंजीकरण कराया जाएगा। ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल होगा, उसकी भी कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि, इसके अध्यक्ष का पद सेना के पास ही होगा। 

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दरअसल, तिरुपति और वैष्णो देवी में पूजन-अर्चन आदि ट्रस्ट की ही निगरानी में होता है। इसी तर्ज पर सेना ने प्रयागराज में भी ट्रस्ट बनाने की तैयारी की है। इस संबंध में पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सब एरिया के जीओसी, डिप्टी जीओसी आदि अफसरों ने ट्रस्ट की रूपरेखा बनाने के लिए मंथन किया है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट बनने के बाद संगम क्षेत्र में पूजन सामग्री से लेकर खाने पीने आदि की सामग्री का रेट तय हो जाएगा। 
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इस व्यवस्था से आने वाले श्रद्धालुओं से निर्धारित रेट से ज्यादा कोई वसूली नहीं कर सकेगा। तीर्थपुरोहितों का पंजीकरण और उन्हें बैठने के लिए स्थायी स्थान भी ट्रस्ट के माध्यम से उपलब्ध करवाया जाएगा। इस दौरान सभी की पर्ची आदि भी काटी जाएगी। हवन पूजन, पिंड दान आदि का क्या रेट होगा, वह ट्रस्ट ही तय करेगी। उसी के हिसाब से यजमान तीर्थपुरोहितों को भुगतान करेंगे। 
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हालांकि, यजमान चाहे तो अपनी इच्छा से तीर्थपुरोहितों को अगर ज्यादा दान देना चाहें तो उसमें ट्रस्ट को कोई आपत्ति नहीं होगी। इस दौरान संगम क्षेत्र में चलने वाली नाव का रेट भी फिक्स रहेगा। 

श्रद्धालुओं को काउंटर पर ही नाव आदि का किराया देना होगा। इस हिसाब से बाहर से आने वाले श्रद्धालु किसी की ठगी का शिकार नहीं हो सकेंगे। ट्रस्ट में डिप्टी जीओसी, रक्षा संपदा अधिकारी, छावनी परिषद के सीईओ तो रहेंगे ही, इसके अलावा जिला प्रशासन, तीर्थपुरोहित, नाविक आदि का भी ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व होगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष का पद सेना के पास ही रहेगा। 

सेना दे रही है कैंट एक्ट 2006 का हवाला
सेना अफसरों का कहना है कि अगर उसकी जमीन पर किसी भी तरह की व्यवसायिक गतिविधि चल रही है, तो उससे होने वाले लाभ का शेयर सेना को मिलेगा। कैंट एक्ट 2006 में इसका उल्लेख भी है। सेना का तर्क है कि संगम क्षेत्र आदि में सारी जमीन उसी की है। 


वरिष्ठ अफसरों के निर्देशन में ट्रस्ट बनाने की कवायद चल रही है। इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं को भी खासी सुविधा मिलेगी। - माने अमित कुमार बाबू राव, सीईओ, छावनी परिषद

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