फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Trial court order upheld in Kashi royal family property dispute; High Court refuses interim stay.

High Court : काशी राजपरिवार संपत्ति विवाद में ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार, अंतरिम स्टे से हाईकोर्ट का इनकार

Fri, 07 Aug 2026 08:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 07 Aug 2026 08:09 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में वादी को अंतरिम स्टे देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम की एकलपीठ ने कहा कि जब अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी में यह स्पष्ट ही नहीं किया गया कि किन विशिष्ट संपत्तियों के संबंध में राहत मांगी जा रही है।

विज्ञापन
Trial court order upheld in Kashi royal family property dispute; High Court refuses interim stay.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में वादी को अंतरिम स्टे देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम की एकलपीठ ने कहा कि जब अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी में यह स्पष्ट ही नहीं किया गया कि किन विशिष्ट संपत्तियों के संबंध में राहत मांगी जा रही है, तब ऐसे अस्पष्ट आवेदन पर अंतरिम संरक्षण नहीं दिया जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग खारिज कर दी गई थी।

विज्ञापन


महाराज कुमारी विष्णुप्रिया की ओर से दायर संपत्ति बंटवारा और घोषणा संबंधी वाद से जुड़ा है। वादी का दावा है कि माता-पिता की छोड़ी गई संपत्तियों में उनका एक-चौथाई हिस्सा है। उन्होंने संपत्तियों के बंटवारे के साथ ही अनुसूची ‘जेड’ में वर्णित अपनी व्यक्तिगत संपत्तियों के शांतिपूर्ण उपयोग और कब्जे की सुरक्षा की भी मांग की थी। साथ ट्रायल कोर्ट की ओर से अंतरिम स्टे की मांग खारिज करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन


वहीं, डॉ. अनंत नारायण सिंह ने सिविल कोर्ट में वाद नहीं चलाने की मांग में दायर अर्जी खारिज होने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि वाद में अंतरिम निषेधाज्ञा के आवेदन में यह नहीं बताया गया कि राहत किन संपत्तियों के संबंध में मांगी जा रही है। आवेदन में केवल प्रतिवादियों को संपत्ति बेचने, हस्तांतरित करने अथवा कब्जे में हस्तक्षेप करने से रोकने की सामान्य प्रार्थना की गई है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित संपत्ति का स्पष्ट विवरण देना जरूरी है। अस्पष्ट आवेदन अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके चलते ट्रायल कोर्ट की ओर से अंतरिम निषेधाज्ञा देने से इनकार करने के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। हाईकोर्ट ने पांच मार्च 2024 के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। साथ ही 31 मई 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली सिविल रिवीजन भी खारिज कर दी, जिससे ट्रायल कोर्ट के दोनों आदेश यथावत बने रहेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed