फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Took work from female peon for 45 years at a salary of Rs 15

Prayagraj News: महिला चपरासी से 45 साल तक 15 रुपये वेतन पर लिया काम, हाईकोर्ट ने लगाया एक लाख हर्जाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Mar 2024 02:45 AM IST
विज्ञापन
Took work from female peon for 45 years at a salary of Rs 15
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग बांदा पर महिला चपरासी से पूर्णकालिक कर्मचारी के बतौर काम लेने के बावजूद निर्धारित वेतन नहीं देने पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। महिला 45 साल तक 15 रुपये वेतन पर काम करते हुए 2016 में सेवानिवृत्त भी हो गईं। उन्होंने दो बार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हक हासिल नहीं हो सका। खफा कोर्ट ने हर्जाने सहित बकाया वेतन देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन

यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने बांदा जिले की भगोनिया देवी की 14 साल से लंबित याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। वह 1971 में बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित कन्या जूनियर हाईस्कूल में 15 रुपये वेतन पर सेविका के रूप में नियुक्त की गईं थीं। 1981 में उन्हें पूर्णकालिक चपरासी के रूप में प्रोन्नति देते हुए वेतन 165 रुपये निर्धारित हुआ। लेकिन, यह उन्हें दिया नहीं गया।
विज्ञापन

इसके खिलाफ उन्होंने 1985 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी बांदा को वेतन संबंधी मांग निस्तारित करने का निर्देश दिया। बीएसए ने 165 रुपये वेतन देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनकी सेवाओं और वेतन का अनुमोदन नहीं हुआ है। यह नियुक्ति अनियमित है। फिर, 1996 में उनकी पूर्णकालिक सेवा समाप्त कर दी गई। हालांकि, वह 2016 तक काम करतीं रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

वह 2010 में निर्धारित वेतन की मांग को लेकर फिर हाईकोर्ट आईं। वर्ष 2016 में वह सेवानिवृत हो गईं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने बढ़े वेतन का भुगतान नहीं किया। 35 साल की पूर्णकालिक सेवा के बावजूद मात्र 15 रुपये प्रतिमाह वेतन ही मिलता रहा।
कोर्ट ने कहा कि पूर्णकालिक नियुक्ति रद्द करने के आदेश को याची ने चुनौती नहीं दी, लेकिन इसमें कोई विवाद नहीं है कि वह लंबे समय तक पूर्णकालिक चपरासी के रूप में काम करती रही हैं। लिहाजा, याची को पूर्णकालिक चपरासी के रूप में नियुक्त करने का आदेश लागू मानने योग्य है।
कोर्ट ने याची की पूर्णकालिक नियुक्ति की तारीख से 165 रुपये की दर से 35 साल की सेवा के लिए 69,300 रुपये अदा करने का आदेश दिया। साथ ही, दो बार कोर्ट आने के लिए विवश करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाते हुए याची को भुगतान करने का आदेश दिया।


कोर्ट ने कहा...प्रजा के सुख में ही राजा का सुख निहित
हाईकोर्ट ने कहा, विपक्षियों ने अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया है, जो एक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के खिलाफ है। कोर्ट ने कौटिल्य के अर्थशास्त्र के राजधर्म के नीति वचन संबंधी श्लोक प्रजा सुखे सुखं राज्ञः प्रजानां तु हिते हितम्, नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्... का भी उल्लेख किया। अर्थात, प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है। जो स्वयं को प्रिय लगे उसमें राजा का हित नहीं है। उसका हित तो प्रजा को जो प्रिय लगे, उसमें है।
----
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed