दो दिनी आम महोत्सव आज से
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उन्होंने बताया कि महोत्सव का उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश बीके शुक्ला सुबह 11 बजे करेंगे। इसमें आमों के विभिन्न प्रकार के पौधों की बिक्री की जाएगी। साथ ही किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। बच्चों, युवाओं और वृद्धों के लिए अलग से कार्यक्रम होंगे। साथ ही पर्यावरण, जल संरक्षण और आम से संबंधित क्विज, पोस्टर, पेंटिंग और निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। बच्चों और महिलाओं के लिए आम खाने की प्रतिस्पर्धा भी गई है। विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। आम महोत्सव की पूर्व संध्या पर डीएम संजय कुमार ने महोत्सव स्थल का निरीक्षण किया। बताया कि महोत्सव के शुभारंभ के दौरान आरएएफ के बैंड भी धुनों का आनंद भी शहरी उठा सकेंगे।
वैसे तो संगम नगरी के लाल सुर्खा जैसे अमरूद दुनिया भर के लोगों की मिठास बन चुके हैं। यहां की जलवायु में जाने कौन सही आबोहवा है कि दुनिया के किसी कोने में ऐेसे अमरूदों को पनपाया ही नहीं जा सकता है लेकिन अब इसकी पहचान आमों से भी हो सकेगी। इसकी एक कोशिश जिला प्रशासन की ओर से की जा रही है। शनिवार से एनसीजेडसीसी में शुरू हो रहे आम महोत्सव में आमों की कई नई प्रजातियों को न केवल शहरियों से बल्कि किसानों से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे उसका उत्पादन कर सकें।
हालांकि संगम नगरी में आम के पेड़ों के संख्या कम नहीं है। जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में जिले में 445 हेक्टेयर में आम के पेड़ों का फैलाव है। यहां दशहरा, लगड़ा, चौसा समेत तमाम देसी प्रजातियों का उत्पादन हो रहा है लेकिन इससे किसान मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। खेती से झटका खा रहे किसानों को इन आमों के जरिए लाभाविंत कराए जाने की मंशा है। जिला उद्यान अधिकारी उमेश उत्तम कहते हैं कि सुर्खा जैसे अमरूद कुछ खास जगहों पर ही हो सकते हैं। दूसरे स्थानों पर इसके पेड़ों में वैसे फल नहीं आते। गंगापार और यमुनापार में काफी एरिया ऐसा है जहां किसान आमों की नई प्रजातियों का उत्पादन कर लाभ अर्जित कर सकते हैं।
आम महोत्सव में किसानों के लिए ऐसे आमों की प्रजातियों के पौधों को कोलकाता से निजी पौधशाला से मंगाया गया है। इनका ट्रायल खुसरोबाग में पहले ही कर लिया गया है। सिंधु, आम्रपाली, दशहरी-51 जैसी प्रजातियों के तो पेड़ भी तैयार हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से लोग सस्ते में इसके स्वाद का आनंद ले सकेंगे।