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इविवि का नाम बचाने आगे आए शिक्षक, छात्र

Mon, 11 May 2020 12:21 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 11 May 2020 12:21 AM IST
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to save the name of allahabad university teachers and students came ahead
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) का नाम बदलकर ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ किए जाने से संबंधित प्रस्ताव मांगे जाने का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। इस मामले में केवल प्रयागराज ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले इविवि के पुरा छात्र भी अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी, केशरीनाथ त्रिपाठी और नरेंद्र सिंह गौर तक यह मामला ले जाने की तैयारी है। वहीं, शिक्षक और छात्र संगठन भी इस प्रस्ताव के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं।
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ऑटा अध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे का कहना है कि इलाहाबाद के नाम में परिवर्तन तो समझ में आता है लेकिन, इविवि का नाम बदलना समझ से परे है। यह नाम इविवि को जन्म से मिला है और जन्म से मिला नाम भला कैसे बदला जा सकता है। इविवि में भूगोल के विभागध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी का कहना है कि हमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्टेकहोल्डर्स के बीच यह बात ले जानी चाहिए। छात्रों, पुरा छात्रों प्रयागराज वासियों से बात करनी चाहिए। साथ ही इविवि प्रशासन को इविवि के पूर्व शिक्षक एवं पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, इविवि से जुड़े रहे पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ् त्रिपाठी और पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर को भी पत्र भेजकर इस मामले से अवगत कराना चाहिए।
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इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि नाम बदलने के बाद किस तरह की दुश्वारियां सामने आएंगी। यह मुद्दा संवेदनशील है और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। इसका नाम बदलने से पूरी दुनिया भर में जो यहां के पुरा छात्र हैं और उसके अलावा इस विश्वविद्यालय से जितना भी शोध कार्य का हुआ है, विश्व स्तर पर डेटाबेस में परिवर्तन असंभव सा प्रतीत होता है। ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि यह प्रस्ताव हास्यास्पद है। नाम बदलना विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास से छेडख़ानी करना है।
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इविवि के पुरा छात्र एवं एमएलसी बासुदेव यादव ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इविवि का नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर अपना विरोध दर्ज कराया है। एमएलसी ने पत्र के माध्यम से कहा है कि नाम बदले जाने के प्रस्ताव से छात्रों, बुद्धिजीवियों, व्यापारियों सहित स्थानीय लोगों की भावनाओं को जबर्दस्त ठेस पहुंची है।
इविवि के नाम बदले जाने के प्रस्ताव के खिलाफ पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों ने भी मोर्चा खोल दिया है। पूर्व अध्यक्ष श्यामकृष्ण पांडेय का कहना है कि अगर इविवि का नाम बदलने का प्रयास भी हुआ तो जबर्दस्त आंदोलन होगा और मैं जिंदगी के आखिरी सोपान में जेल जाने के लिए भी तैयार हूं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद दुबे का कहना है कि नाम बदला गया तो राजनैतिक जंग होगी और इस जंग में देश-विदेश से पुरा छात्र भी शामिल होंगे। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव का कहना है कि इविवि के नाम से कोई छेड़छाड़ न की जाए। अगर कोई बदलाव हुआ तो लॉक डाउन का पालन करते हुए तत्काल आंदोलन शुरू होगा।

इविवि का नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, छात्र नेता अदील हमजा, अजय सम्राट, अविनाश विद्यार्थी आदि ने अपना विरोध दर्ज कराया है। रविवार को हुई आपदा छात्र संघर्ष समिति की ऑनलाइन बैठक में छात्रों ने निर्णय लिया कि अगर नाम बदलने का प्रस्ताव भेजा जाता है तो सभी विचारधाराओं के छात्र नेता एक मंच पर आकर विरोध करेंगे और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसके अलावा समाजवादी छात्रसभा ने भी प्रस्ताव को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर शोध छात्रा नेहा यादव ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग की है कि देश की चौथी सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी के नाम से कोई छेड़छाड़ न की जाए। इस मुद्दे को कार्य परिषद के एजेंडा से हटाया जाए।
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