Prayagraj : दीप पर्व इस बार छह दिन का, खरीदारी का है विशेष मुहुर्त
दीप महापर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी शनिवार से शुरू होगा। दीपोत्सव त्रयोदशी अर्थात धनतेरस से भैयादूज तक मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक तिथियों की वजह से बार दीप पर्व पांच नहीं, छह दिन का होगा।
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दीप महापर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी शनिवार से शुरू होगा। दीपोत्सव त्रयोदशी अर्थात धनतेरस से भैयादूज तक मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक तिथियों की वजह से बार दीप पर्व पांच नहीं, छह दिन का होगा। शनिवार को शनि प्रदोष होने से धनतेरस का मान बढ़ेगा। भैया दूज 23 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
-18 अक्तूबर को धनतेरस अर्थात धन्वंतरि जयंती।
- 19 अक्तूबर को मास शिवरात्रि, नरक चतुर्दशी और हनुमत जयंती।
- 20 अक्तूबर को सुबह हनुमत दर्शन एवं दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा।
- 21 अक्तूबर को स्नानदान की अमावस्या मनाई जाएगी।
-22 अक्तूबर को काशी के अतिरिक्त अन्नकूट और गोवर्धन पूजा।
- 23 अक्तूबर को काशी में गोवर्धन पूजा, भैयादूज, भ्रातृ द्वितीया, कलम दावत की पूजा तथा चित्रगुप्त का पूजन किया जाएगा।
धन्वंतरि जयंती समेत प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी तिथि में धनतेरस का प्रसिद्ध परम पुनीत एवं शुभफलदायक पर्व 18 अक्तूबर शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन गृहोपयोगी सामान खरीदने की प्राचीन परंपरा है। धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी की पूजा कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन, सोना, चांदी, रत्न, आभूषण एवं बर्तन आदि की खरीदारी कर घर लाना अति शुभ फलदायक होता है।
धनतेरस पर मिट्टी का कलश जरूर खरीदें
समुद्र मंथन के समय कलश के साथ माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ। उसी के प्रतीक के रूप में ऐश्वर्य वृद्धि, सौभाग्य वृद्धि, धन वृद्धि के लिए बर्तन खरीदने की परंपरा शुरू हुई। साथ ही आयुर्वेद के प्रवर्तक धन्वंतरि महाराज की जयंती दिवस के आधार पर भी यह तिथि पुनीत एवं प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि का अवतरण इसी दिन प्रदोष बेला अर्थात प्रदोष काल में होने का शास्त्रों में उल्लेख है। इसी कारण प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी में ही धनतेरस का अति पवित्र पर्व मनाया जाता है। इस दिन स्थिर लग्न व प्रदोष कालीन स्थिर लग्न में बर्तन आदि सहित कोई भी धातु खरीदना शुभ फलदायक होता है। विशेषकर इस मुहूर्त में धातु या मिट्टी का कलश अवश्य खरीदना चाहिए ।
शनिवार दोपहर 1:20 से रविवार दिन से रविवार दिन में 1:54 बजे तक शुभ मुहूर्त
ज्योतिर्विद पं.दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी शुभ फल प्रदायक होती है। इस वर्ष त्रयोदशी तिथि का मान 18 अक्तूबर को दिन में 1:20 बजे से शुरू होकर 19 अक्तूबर रविवार को दिन में 1:54 बजे तक व्याप्त रहेगा। अतः गृहोपयोगी सामान त्रयोदशी तिथि के स्थिर लग्न में खरीदना श्रेयस्कर होता है। शनिवार को त्रयोदशी तिथि में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र सायं 5:36 बजे तक रहेगा। तत्पश्चात उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र मान शुरू होकर रविवार शाम 6:52 बजे तक रहेगा। इसके बाद हस्त नक्षत्र आरंभ हो जाएगा । उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य व हस्त नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा को माना जाता है। चंद्रमा ब्रह्म योग रात में 4:10 बजे तक व्याप्त रहेगा। उसके बाद ऐंद्र योग रहेगा। चंद्रमा का संचरण 18 अक्तूबर की रात 11:55 बजे तक होगा। उसके बाद कन्या राशि में संचरण होगा।
शनि प्रदोष व्रत से बढ़ा धनतेरस का महत्व
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक 18 अक्तूबर को शनि प्रदोष व्रत भी होने के कारण इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। क्योंकि, संतान सुख एवं संपन्नता में वृद्धि के लिए शनि प्रदोष व्रत को अति श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इस कारण से प्रदोष काल में माता लक्ष्मी-श्री हरि विष्णु सहित भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से धन का आवक बढ़ेगा बढ़ता है तथा संतान से संबंधित सभी कष्टों से मुक्ति मिलेगी।
त्रयोदशी तिथि में आज पूजन के लिए स्थिर लग्न
-शनिवार को स्थिर लग्न कुंभ दोपहर बाद 2:21 से 3:46 बजे तक।
-शनिवार को स्थिर लग्न वृष रात में 06:59 से 8:56 बजे तक ।
-शनिवार को मध्य रात्रि बाद स्थिर लग्न सिंह 01:27 से 3:40 बजे रात तक।
-रविवार को स्थिर लग्न वृश्चिक सुबह 8:10 से 10:25 बजे तक।