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इस माह हजारों शादियां, कैसे विदा होंगी बेटियां
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 12 Nov 2016 02:41 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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झूंसी/होलागढ़/मेजा। उरुवा के अखिलेश गुप्ता की बेटी की 24 नवंबर को शादी है। शादी की खरीदारी के लिए बैंक से पैसा इकट्ठा निकालकर रख लिया था लेकिन पांच सौ और एक हजार की भी नोट अखिलेश के लिए कूड़ा हो गईं। उन्हें अब चिंता सता रही है कि बेटी को कैसे विदा करेंगे। कुछ काम तो उधार से चल जाएगा लेकिन हर जगह ऐसा नहीं हो सकता। पंडित को दक्षिणा देनी हो या बेटी को उपहार, वहां तो कैश की जरूरत ही पड़ेगी। अगर बैंक में रोज चार हजार वापस करके उसके बाद नई नोटें लेते हैं तो भी काम नहीं चलेगा। शादी तो होगी लेकिन अखिलेश की तरह हजारों परिवार इस समस्या से जूझ रहे हैं।
उनके सामने सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। पैसे का इंतजाम नहीं हो पा रहा। किसी से उधार भी नहीं ले सकते, क्योंकि हर घर की यही स्थिति है। सभी परेशान हैं और पांच सौ-हजार की नोट के लिए चक्कर काट रहे हैं। आवास विकास कालोनी निवासी मूलचंद्र वर्मा के घर में दस दिन बाद 21 नवंबर को बेटे की बारात जानी है। पांच सौ और हजार के नोट चलन से बाहर हो जाने के कारण घर के लोग परेशान है। शादी की तैयारियां लगभग ठप हो गई हैं और बैंक से निकाल कर रखे गए रुपये बेकार हो गए हैं।
आवास विकास कालोनी निवासी मूलचंद्र के बेटे का भी 21 नवंबर को विवाह है। शादी में खर्च के लिए तीन दिन पहले ही बैंक से ढाई लाख रुपये निकाले थे। सवाल यह कि अगर पूरी रकम एक साथ बैंक में जमा भी कर दें तो रिटर्न नहीं मिलेगा। इसके लिए लंबा इंतजार करना होगा, जो शादी तक संभव नहीं है। पूरा परिवार अब दिनभर पैसे का इंतजाम करने के लिए दौड़भाग में लगा रहता है। टाउन एरिया झूंसी निवासी रवि वर्मा की बहन का विवाह तीन दिसंबर को है। इनके यहां भी शादी से चंद रोज पहले पांच सौ और हजार के नोट बंद हो जाने से तैयारियों बाधित हो गई हैं। हनुमानगंज के विभवनाथ तिवारी और बेलवार गांव के राजेंद्र प्रसाद की बेटियों का भी तीन दिसंबर को विवाह होना है। इनके यहां भी पैसे को लेकर भारी समस्या खड़ी हो गई है।
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वहीं, होलागढ़ के बदली के पुरा निवासी राम बहादुर यादव का कहना बेटी की सगाई 16 नवंबर को है और 13 दिसंबर को तिलक होना है। अभी तो सब्जी, राशन के लाले पड़े हैं, ऐसे में खरीदारी के बारे में सोचना भी बेमानी है। आशंका सता रही है कि सगाई की तिथि टालनी न पड़ जाए। मेजा खास के राजेश मिश्र के भतीजे का तिलक है। सात नवंबर को बैंक से रुपया निकाला था लेकिन 1000-500 की नोट बंद हो जाने से निकाली गई पूरी रकम बैंक में जमा करनी पड़ गई। परानीपुर के अशोक यादव, देवहटा के तौलन राम, उरनाह के रामलाल यादव की बेटी की भी इसी महीने शादी है। सब लोग परेशान हैं। सभी का कहना है कि किसी तरह शादी करेंगे लेकिन सब कुछ बदरंग हो गया है।
शहर में शुक्रवार को सैकड़ों शादियां हुई। तकरीबन सभी विवाहघर और गेस्ट हाउस बुक थे लेकिन वह उत्साह और उल्लास नजर नहीं आया। हाजं इतना जरूर हुआ कि शादियों में पांच सौ और एक हजार के नोट भी उड़ाए गए। ज्यादातर विवाह सादगी के साथ हुए। सजावट आदि तो दिखी लेकिन जिनके घरों में शादियां पड़ी थीं, उनके चेहरे पर उत्साह कम नजर आया। चाहकर भी खर्च नहीं करने में हाथ रोकना पड़ा। जहां बहुत जरूरी था, वहीं जेब से कैश निकला।
दो दिन पहले झूंसी के एक गांव में तिलकोत्सव के दौरान दहेज में चढ़ाए गए रुपये शुक्रवार को वर पक्ष ने लौटा दिए। वर पक्ष के इस कदम से वधू पक्ष की सांसें थम गईं हैं। विवाह को लेकर तरह-तरह की आशंका घर कर गई है। झूंसी के एक गांव में प्रतापगढ़ की एक युवती का विवाह तय हुआ है। दो दिन पहले तिलकोत्सव समारोह पूरे धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान वधू पक्ष ने पांच सौ और हजार के नोट तिलक पर दिए। कार्यक्रम के दूसरे ही दिन केंद्र सरकार ने पांच सौ और हजार के नोट को चलन से बाहर कर दिया। इससे वर पक्ष में नोटों को लेकर भूचाल आ गया। शुक्रवार को वर पक्ष के लोगों ने वधू पक्ष को रुपये वापस कर दिए।
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उनके सामने सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। पैसे का इंतजाम नहीं हो पा रहा। किसी से उधार भी नहीं ले सकते, क्योंकि हर घर की यही स्थिति है। सभी परेशान हैं और पांच सौ-हजार की नोट के लिए चक्कर काट रहे हैं। आवास विकास कालोनी निवासी मूलचंद्र वर्मा के घर में दस दिन बाद 21 नवंबर को बेटे की बारात जानी है। पांच सौ और हजार के नोट चलन से बाहर हो जाने के कारण घर के लोग परेशान है। शादी की तैयारियां लगभग ठप हो गई हैं और बैंक से निकाल कर रखे गए रुपये बेकार हो गए हैं।
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आवास विकास कालोनी निवासी मूलचंद्र के बेटे का भी 21 नवंबर को विवाह है। शादी में खर्च के लिए तीन दिन पहले ही बैंक से ढाई लाख रुपये निकाले थे। सवाल यह कि अगर पूरी रकम एक साथ बैंक में जमा भी कर दें तो रिटर्न नहीं मिलेगा। इसके लिए लंबा इंतजार करना होगा, जो शादी तक संभव नहीं है। पूरा परिवार अब दिनभर पैसे का इंतजाम करने के लिए दौड़भाग में लगा रहता है। टाउन एरिया झूंसी निवासी रवि वर्मा की बहन का विवाह तीन दिसंबर को है। इनके यहां भी शादी से चंद रोज पहले पांच सौ और हजार के नोट बंद हो जाने से तैयारियों बाधित हो गई हैं। हनुमानगंज के विभवनाथ तिवारी और बेलवार गांव के राजेंद्र प्रसाद की बेटियों का भी तीन दिसंबर को विवाह होना है। इनके यहां भी पैसे को लेकर भारी समस्या खड़ी हो गई है।
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वहीं, होलागढ़ के बदली के पुरा निवासी राम बहादुर यादव का कहना बेटी की सगाई 16 नवंबर को है और 13 दिसंबर को तिलक होना है। अभी तो सब्जी, राशन के लाले पड़े हैं, ऐसे में खरीदारी के बारे में सोचना भी बेमानी है। आशंका सता रही है कि सगाई की तिथि टालनी न पड़ जाए। मेजा खास के राजेश मिश्र के भतीजे का तिलक है। सात नवंबर को बैंक से रुपया निकाला था लेकिन 1000-500 की नोट बंद हो जाने से निकाली गई पूरी रकम बैंक में जमा करनी पड़ गई। परानीपुर के अशोक यादव, देवहटा के तौलन राम, उरनाह के रामलाल यादव की बेटी की भी इसी महीने शादी है। सब लोग परेशान हैं। सभी का कहना है कि किसी तरह शादी करेंगे लेकिन सब कुछ बदरंग हो गया है।
शहर में शुक्रवार को सैकड़ों शादियां हुई। तकरीबन सभी विवाहघर और गेस्ट हाउस बुक थे लेकिन वह उत्साह और उल्लास नजर नहीं आया। हाजं इतना जरूर हुआ कि शादियों में पांच सौ और एक हजार के नोट भी उड़ाए गए। ज्यादातर विवाह सादगी के साथ हुए। सजावट आदि तो दिखी लेकिन जिनके घरों में शादियां पड़ी थीं, उनके चेहरे पर उत्साह कम नजर आया। चाहकर भी खर्च नहीं करने में हाथ रोकना पड़ा। जहां बहुत जरूरी था, वहीं जेब से कैश निकला।
दो दिन पहले झूंसी के एक गांव में तिलकोत्सव के दौरान दहेज में चढ़ाए गए रुपये शुक्रवार को वर पक्ष ने लौटा दिए। वर पक्ष के इस कदम से वधू पक्ष की सांसें थम गईं हैं। विवाह को लेकर तरह-तरह की आशंका घर कर गई है। झूंसी के एक गांव में प्रतापगढ़ की एक युवती का विवाह तय हुआ है। दो दिन पहले तिलकोत्सव समारोह पूरे धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान वधू पक्ष ने पांच सौ और हजार के नोट तिलक पर दिए। कार्यक्रम के दूसरे ही दिन केंद्र सरकार ने पांच सौ और हजार के नोट को चलन से बाहर कर दिया। इससे वर पक्ष में नोटों को लेकर भूचाल आ गया। शुक्रवार को वर पक्ष के लोगों ने वधू पक्ष को रुपये वापस कर दिए।