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कोई भेदिया जरूर था शामिल, आज ही आया था बैंक में कैश
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There was definitely an informer involved, cash came in the bank today
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। मऊआइमा में बैंक के भीतर लूट की वारदात जिस तरह अंजाम दी गई, उससे माना जा रहा है कि घटना में कोई भेदिया जरूर शामिल था। दरअसल, बैंक मेें पिछले तीन दिनों से नगदी नहीं थी और बृहस्पतिवार को घटना से कुछ देर पहले ही कैश वैन रकम लेकर आई थी। इससे माना जा रहा है कि घटना के वक्त बैंक के भीतर या बाहर कोई भेदिया जरूर मौजूद था। पुलिस का कहना है कि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच पड़ताल की जा रही है।
घटना के बाद पुलिस अफसर मौके पर जांच पड़ताल कर रहे थे तो यह बात सामने आई। बैंक कर्मचारियों से पूछताछ में पता चला कि तीन दिनों से नगदी नहीं थी। इसकी वजह से लेनदेन भी लगभग ठप पड़ा था। बृहस्पतिवार को कैशवैन नगदी लेकर आई, जिसके बाद लेेनदेन का काम शुरू हुआ। बताया कि कैशवैन के जाने के बाद अभी नगदी चेस्ट में भी नहीं रखी जा सकी थी कि तभी बदमाश वहां आ धमके। इसके बाद कैशियर की मेज पर पहुंचकर असलहा दिखाया और हाथों में लिए काले रंग के बैग में नगदी भरकर भाग निकले। जिस तरह से कैशवैन के जाने के कुछ मिनटों बाद ही बदमाश वहां आए, इससे साफ है कि कोई ऐसा जरूर था जो बदमाशों को पल-पल की खबर दे रहा था। पुलिस का कहना है कि यह बैंक के भीतर मौजूद कोई व्यक्ति हो सकता है। ऐसे में घटना के वक्त बैंक में मौजूद हर शख्स के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बैंककर्मियोें से भी पूछताछ की जा रही है।
10 दिन से बंद था सीसीटीवी कैमरा
घटना के बाद पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो बैंक में लगा सीसीटीवी कैमरा बंद मिला। दरअसल, पहले बैंककर्मियों से पूछताछ में पता चला कि कैमरा खराब है। लेकिन जब एक सिपाही ने देखा तो पता चला कि कनेक्शन ठीक ढंग से न होने के कारण कैमरा बंद हो गया था। पुलिस इस बात की भी जांच में जुटी है कि कैमरा बंद पड़े होने में किसी तरह की साजिश तो नहीं।
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30-40 साल के थे लुटेरे
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लुटेरे 30-40 साल के थे। सभी ने चेहरे पर रूमाल बांध रखा था। साथ ही उनकी बोली भी ग्रामीण परिवेश की ही लग रही थी। उन्होंने चेहरा छिपाने की कोशिश की, ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि लुटेरे स्थानीय या आसपास के क्षेत्र के रहे हों। उन्हें अपने पहचाने जाने का डर था और यही वजह थी कि उन्होंने चेहरा ढककर वारदात को अंजाम दिया। प्रत्यक्षदर्शियोें ने बताया कि लुुटेरे पल्सर व अपाचे बाइक से घटना को अंजाम देने पहुंचे थे।
पीछा भी किया लेकिन, रहे नाकाम
बैंक में दिनदहाड़े लूट की सूचना के बाद पुलिस अफसरों ने चौतरफा घेराबंदी कराकर चेकिंग के निर्देश दिए। जिसके बाद पमरेशपुर के पास डायल 100 की एक गाड़ी ने बदमाशों का पीछा भी किया। लेकिन वह उन्हें पकड़ने में नाकाम रही। बाद में आसपास के कुछ ग्रामीणों ने भी चार युवकों को बैग लेकर भागते देखने की पुष्टि की।
छत में मिले फायरिंग के निशान
बदमाशों की ओर से की गई फायरिंग में गोलियां बैंक के भवन के छत में लगीं। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को छत पर गोलियों के निशान भी मिले। गनीमत रही कि घटना में कोई कर्मचारी व ग्राहक हताहत नहीं हुआ। घटना के बाद जुटे प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बैंक के भीतर से निकले कई ग्राहक व कर्मचारी दहशत के चलते कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे।
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घटना के बाद पुलिस अफसर मौके पर जांच पड़ताल कर रहे थे तो यह बात सामने आई। बैंक कर्मचारियों से पूछताछ में पता चला कि तीन दिनों से नगदी नहीं थी। इसकी वजह से लेनदेन भी लगभग ठप पड़ा था। बृहस्पतिवार को कैशवैन नगदी लेकर आई, जिसके बाद लेेनदेन का काम शुरू हुआ। बताया कि कैशवैन के जाने के बाद अभी नगदी चेस्ट में भी नहीं रखी जा सकी थी कि तभी बदमाश वहां आ धमके। इसके बाद कैशियर की मेज पर पहुंचकर असलहा दिखाया और हाथों में लिए काले रंग के बैग में नगदी भरकर भाग निकले। जिस तरह से कैशवैन के जाने के कुछ मिनटों बाद ही बदमाश वहां आए, इससे साफ है कि कोई ऐसा जरूर था जो बदमाशों को पल-पल की खबर दे रहा था। पुलिस का कहना है कि यह बैंक के भीतर मौजूद कोई व्यक्ति हो सकता है। ऐसे में घटना के वक्त बैंक में मौजूद हर शख्स के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बैंककर्मियोें से भी पूछताछ की जा रही है।
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10 दिन से बंद था सीसीटीवी कैमरा
घटना के बाद पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो बैंक में लगा सीसीटीवी कैमरा बंद मिला। दरअसल, पहले बैंककर्मियों से पूछताछ में पता चला कि कैमरा खराब है। लेकिन जब एक सिपाही ने देखा तो पता चला कि कनेक्शन ठीक ढंग से न होने के कारण कैमरा बंद हो गया था। पुलिस इस बात की भी जांच में जुटी है कि कैमरा बंद पड़े होने में किसी तरह की साजिश तो नहीं।
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30-40 साल के थे लुटेरे
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लुटेरे 30-40 साल के थे। सभी ने चेहरे पर रूमाल बांध रखा था। साथ ही उनकी बोली भी ग्रामीण परिवेश की ही लग रही थी। उन्होंने चेहरा छिपाने की कोशिश की, ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि लुटेरे स्थानीय या आसपास के क्षेत्र के रहे हों। उन्हें अपने पहचाने जाने का डर था और यही वजह थी कि उन्होंने चेहरा ढककर वारदात को अंजाम दिया। प्रत्यक्षदर्शियोें ने बताया कि लुुटेरे पल्सर व अपाचे बाइक से घटना को अंजाम देने पहुंचे थे।
पीछा भी किया लेकिन, रहे नाकाम
बैंक में दिनदहाड़े लूट की सूचना के बाद पुलिस अफसरों ने चौतरफा घेराबंदी कराकर चेकिंग के निर्देश दिए। जिसके बाद पमरेशपुर के पास डायल 100 की एक गाड़ी ने बदमाशों का पीछा भी किया। लेकिन वह उन्हें पकड़ने में नाकाम रही। बाद में आसपास के कुछ ग्रामीणों ने भी चार युवकों को बैग लेकर भागते देखने की पुष्टि की।
छत में मिले फायरिंग के निशान
बदमाशों की ओर से की गई फायरिंग में गोलियां बैंक के भवन के छत में लगीं। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को छत पर गोलियों के निशान भी मिले। गनीमत रही कि घटना में कोई कर्मचारी व ग्राहक हताहत नहीं हुआ। घटना के बाद जुटे प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बैंक के भीतर से निकले कई ग्राहक व कर्मचारी दहशत के चलते कुछ बोल भी नहीं पा रहे थे।

There was definitely an informer involved, cash came in the bank today- फोटो : CITY DESK

There was definitely an informer involved, cash came in the bank today- फोटो : CITY DESK