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मुख्य न्यायमूर्ति बोले : इलाहाबाद हाईकोर्ट से रहती है लोगों को ज्यादा उम्मीद, इसलिए बढ़ जाती है जिम्मेदारी

Fri, 03 Feb 2023 09:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Feb 2023 09:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 150वें स्थापना दिवस पर मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल न केवल बार के योगदानों के इतिहास को याद किया, बल्कि अधिवक्ताओं को उससे सीख लेने की नसीहत दी।

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There is more expectation from the Allahabad High Court, hence the responsibility increases
Prayagraj News : राजेश बिंदल, मुख्य न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 150वें स्थापना दिवस पर मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल न केवल बार के योगदानों के इतिहास को याद किया, बल्कि अधिवक्ताओं को उससे सीख लेने की नसीहत दी। कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एशिया के सबसे बड़े हाईकोर्ट होने के नाते इस पर जिम्मेदारी भी सबसे अधिक होती है। देश में न्यायिक क्षेत्र में कहीं भी कुछ हो रहा हो, सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ देखा जाता है कि वहां क्या हो रहा है। इसलिए हाईकोर्ट की जिम्मेदारी भी बहुत बड़ी है।

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इसके पहले मुख्य न्यायमूर्ति ने अपने शुरुआती संबोधन में देश की आजादी से लेकर अधिवक्ताओं के योगदानों को याद किया। कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी अधिवक्ता थे। इसके बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू भी अधिवक्ता थे। ऐसे में देश की सबसे बड़ी बार होने से हाईकोर्ट बार एसो. के अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने अधिवक्ताओं की पीठ थपथपाई।
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कहा कि यहां के अधिवक्ता अपने वादियों के प्रति दृढ़ संकल्प हैं। अगर अदालतें देर तक वादों की सुनवाई कर रही हैं तो अधिवक्ता भी बैठकर अपने वादों की पैरवी करते हैं। उन्होंने अपने अनुभव को भी अधिवक्ताओं के साथ साझा किया। कहा कि हाल ही में दिवंगत हुए पूर्व केंद्रीय विधि मंत्री शांति भूषण के साथ भी काम करने का मौका मिला था। बहुत कुछ सीखने को मिला। आज के अधिवक्ताओं को भी अपने वरिष्ठों से अनुभवों को साझा करना चाहिए।

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जजों के खाली पड़े पदों का भी किया जिक्र

मुख्य न्यायमूर्ति ने कार्यक्रम के दौरान जजों के खाली पड़े पदों का भी जिक्र किया। कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कुल क्षमता 160 है, लेकिन वर्तमान में केवल 96 जज ही कार्यरत हैं। जजों की कमी से लंबित वादों की संख्या भी अधिक है। इसके बावजूद जितने केस फाइल हो रहे हैं उतने ही निस्तारित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केसों के निस्तारण में बार की बड़ी भूमिका है। यहां के जजों और अधिवक्ताओं ने कोविड के दौरान भी फ्रंट लाइन वर्कर की तरह काम किया है।

फ्लाईओवर के नीचे न बैठें अधिवक्ता

मुख्य न्यायमूर्ति ने अधिवक्ताओं के लिए बन रही मल्टी स्टोरी पार्किंग और चैंबर्स के लिए यूपी सरकार की सराहना की। कहा कि इतना बड़ा प्रोजेक्ट कहीं और पर अभी नहीं है। इस दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं से कहा कि वे हाईकोर्ट के सामने बने फ्लाईओवर के नीचे कुर्सी, मेज लगाकर न बैठें। उन्होंने कहा कि पेशे की एक गरिमा है, उसको बनाए रखें। फ्लाईओवर के नीचे बैठना सही नहीं है।

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