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फिर बाहुबली का बोलबाला
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माफिया अतीक अहमद
- फोटो : amar ujala
जुर्म की दुनिया से निकलकर सियासत में धमक दिखाने वाले कई बाहुबली नेताओं की इस लोकसभा चुनाव में भी बोलबाला होगा। पूर्व सांसद अतीक अहमद, भदोही से विधायक विजय मिश्रा और वहीं से लोकसभा चुनाव में कंाग्रेस प्रत्याशी रमाकांत यादव का रसूख कुछ ऐसा ही है। ये तीनों बड़ी पार्टियों के शीर्ष नेताओं के कृपापात्र माने जाते हैं। वोटरों में तगड़ी पैठ के बावजूद राजनीतिक दलों ने अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें दूर रखा, टिकट रमाकांत ही हासिल कर सके।
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जबकि चर्चा में अतीक और विजय के नाम तैरते रहे हैं। अतीक की नैनी जेल में वापसी और विजय की हंडिया से भदोही तक सक्रियता नए सियासी समीकरणों का कारण बनेगी। इसके दूरगामी प्रभाव चुनाव परिणाम में साफ दिखेंगे।
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जेल से अतीक दिखाएंगे सियासी कौशल
अतीक अहमद ने वर्ष 1989 में पहला विधानसभा चुनाव शहर पश्चिमी से लड़ा। वह चुनाव जीते और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1991 और 1993 का निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते। 1996 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट से अतीक फिर विधायक चुने गए। इस बीच उनकी माफिया छवि में और गहरी हो गई। वर्ष 2004 में फूलपुर से सांसद भी चुने गए लेकिन बाहुबली और माफिया की छवि से उबर नहीं पाए। उनके कारनामे हमेशा उन्हें सुर्खियों में रखा।
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अतीक अहमद पर हत्या, अपहरण जैसे संगीन मामलों समेत चार दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस लोकसभा चुनाव से कई दलों से उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा रही, लेकिन सपा ने उनकी तरफ देखा तक नहीं। 25 जनवरी 2005 में विधायक राजू पाल की हत्या के बाद अतीक का सियासी ट्रैक गड़बड़ा गया। पहले देवरिया फिर बरेली जेल में बंद अतीक की सुरक्षा कारणों से केंद्रीय कारागार नैनी में वापसी हो चुकी है। नामांकन का दौर समाप्ति पर है लेकिन बिना प्रत्याशी बने उनके खासकर मुस्लिम वोटरों पर प्रभाव को महसूस किया जा सकता है।
विजय के क्षेत्र में रमाकांत ठोंक रहे ताल
पड़ोसी जनपद भदोही से कांग्रेस प्रत्याशी रमाकांत यादव का प्रदेश के बाहुबली नेताओं ने शुमार है। भाजपा ने उनसे किनारा काटा तो उन्होंने कांग्रेस का दामन पकड़कर टिकट भी हासिल कर लिया। यहां उनका सामना अप्रत्यक्ष रूप से विधायक विजय मिश्रा से होगा। विजय मिश्र की धमक भदोही ही नहीं प्रयागराज के कई इलाकों में है। रमाकांत यादव के चुनावी क्षेत्र में प्रयागराज की दो विधानसभा क्षेत्र हंडिया और प्रतापपुर भी शामिल हैं। दोनों क्षेत्रों के दिग्गज नेता अपने-अपने दलों के प्रत्याशी की नैय्या पार लगाने को बाहुबली रमाकांत की सियासी काट में लगे हैं। लोगों के बीच में उनके आपराधिक रिकार्ड को प्रचारित किया जा रहा है।
पति की विरासत नहीं संभाल पाईं पूजा पाल
25 जनवरी 2005 को शहर पश्चिमी विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई खालिद अजीम अशरफ को आरोपी बनाया गया। बाहुबली नेताओं के क्षेत्र में पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने बसपा के टिकट पर दो बार विजय पताका फहराई लेकिन पिछले चुनाव में वह पति की विरासत नहीं संभाल पाईं। बदली परिस्थितियों में बसपा से दूरी बनी तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। सपा ने उन्हें इस लोकसभा चुनाव में उन्नाव से प्रत्याशी घोषित किया लेकिन बाद में वहां प्रत्याशी बदल दिया गया।