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विजय ने दिया कहानी को नया संगीत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 27 Jun 2016 01:20 AM IST
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विजय मोहन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जनवादी लेखक संघ और डॉ.विजय मोहन सिंह स्मृति ट्रस्ट की ओर से रविवार को अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र में विजय मोहन सिंह की स्मृतियां सहेजी गईं। इस अवसर पर उनके द्वारा 1965 में संपादित-प्रकाशित किताब ‘60 के बाद की कहानियां’ की पुनर्र्पकाशित प्रति विजय मोहन की पत्नी आशालता सिंह को भेंट करते हुए प्रसिद्ध कथाकार दूधनाथ सिंह ने कहा, जब यह किताब 1965 में छपी तब हम 14 कहानीकारों की कोई भी किताब नहीं छपी थी। इसके जरिये विजय मोहन ने हम सबको पहली बार छापा। उनका मानना था कि कहानी को कहानीपन से दूर होना चाहिए। उन्होंने कहानी का नया संगीत विकसित किया।
कथाकार अखिलेश ने कहा, इस संग्रह की कहानियां नए रूप की तलाश की कहानियां हैं। वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा, अपनी भूमिका से विजय मोहन ने अपने समय और समाज का विश्लेषण किया। कथाकार विभूति नारायण राय ने कहा, विजयमोहन एक स्पष्ट पसंद के व्यक्ति थे। बतौर अध्यक्ष वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह ने कहा, यह किताब एक ऐतिहासिक दस्तावेज के साथ विजयमोहन को सच्ची श्रद्धांजलि भी है। नामवर के बाद वह हमारे दौर के सबसे बड़े व्याख्याता और प्रवक्ता थे।
जलेस के सचिव कवि संतोष चतुर्वेदी ने संचालन और स्मृति ट्रस्ट के सचिव अविचल गौतम ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में सुधीर कुमार सिंह ने मुद्राराक्षस और सतीश जमाली को श्रद्धांजलि के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ा। कार्यक्रम में अजामिल, प्रणय कृष्ण, असरार गांधी, अनीता गोपेश, अनिल रंजन भौमिक, प्रो.संतोष भदौरिया, संध्या नवोदिता, जयप्रकाश धूमकेतु आदि मौजूद थे।
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कथाकार अखिलेश ने कहा, इस संग्रह की कहानियां नए रूप की तलाश की कहानियां हैं। वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा, अपनी भूमिका से विजय मोहन ने अपने समय और समाज का विश्लेषण किया। कथाकार विभूति नारायण राय ने कहा, विजयमोहन एक स्पष्ट पसंद के व्यक्ति थे। बतौर अध्यक्ष वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह ने कहा, यह किताब एक ऐतिहासिक दस्तावेज के साथ विजयमोहन को सच्ची श्रद्धांजलि भी है। नामवर के बाद वह हमारे दौर के सबसे बड़े व्याख्याता और प्रवक्ता थे।
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जलेस के सचिव कवि संतोष चतुर्वेदी ने संचालन और स्मृति ट्रस्ट के सचिव अविचल गौतम ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में सुधीर कुमार सिंह ने मुद्राराक्षस और सतीश जमाली को श्रद्धांजलि के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ा। कार्यक्रम में अजामिल, प्रणय कृष्ण, असरार गांधी, अनीता गोपेश, अनिल रंजन भौमिक, प्रो.संतोष भदौरिया, संध्या नवोदिता, जयप्रकाश धूमकेतु आदि मौजूद थे।
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