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prayagraj : गंगा किनारे के क्षेत्रों में गॉल ब्लेडर के कैंसर का खतरा अधिक, पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्य

Wed, 08 Nov 2023 12:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 08 Nov 2023 12:04 PM IST
सार

विशेषज्ञों के अनुसार, गैंगेटिक बेल्ट में गंगा के पानी में आर्सेनिक, कैडमियम, शीशा, मैगनीज, मरकरी जैसे खतरनाक तत्व अधिक मात्रा में घुल गए हैं। इसके अलावा गंगा के किनारे उगने वाली फसलों में भारी मात्रा में कीटनाशक छिड़के जाने के कारण भी गंगा और भूमिगत जल प्रदूषित हुआ है।

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The risk of gall bladder cancer is higher in the areas along the banks of Ganga
हेल्थ एंड फिटनेस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जिले में गॉल ब्लेडर मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। आलम यह है कि ब्रस्ट कैंसर के बाद दूसरे नंबर पर गॉल ब्लेडर कैंसर के मामले हैं। वहीं, पिछले साल तक दूसरे नंबर पर सर्वाइकल कैंसर था। पिछले एक साल के अंदर कमला नेहरू अस्पताल में गॉल ब्लेडर के कैंसर के लगभग 400 मरीज आए हैं। इनमें से 80 फीसदी मामले गंगेटिक बेल्ट (गंगा के किनारे) के हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, गैंगेटिक बेल्ट में गंगा के पानी में आर्सेनिक, कैडमियम, शीशा, मैगनीज, मरकरी जैसे खतरनाक तत्व अधिक मात्रा में घुल गए हैं। इसके अलावा गंगा के किनारे उगने वाली फसलों में भारी मात्रा में कीटनाशक छिड़के जाने के कारण भी गंगा और भूमिगत जल प्रदूषित हुआ है। इससे गैंगेटिक बेल्ट के लोगों में गॉल ब्लेडर कैंसर (पित्त की थैली में कैंसर) तेजी से फैल रहा है।
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कैंसर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जीवनदायिनी गंगा को प्रदूषित होने से बचाया नहीं गया तो भविष्य की तस्वीर भयावह होगी। रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों में हर तीसरा मरीज गॉल ब्लेडर कैंसर से जूझ रहा है। इनमें ज्यादातर गैंगेटिक बेल्ट में शामिल कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, पटना आदि शहरों के हैं।

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दुखद यह है कि मरीजों को गॉल ब्लेडर कैंसर का पता चौथे चरण में चल पा रहा है। इससे इलाज में काफी मुश्किल आ रही है। इतना ही नहीं गॉल ब्लेडर कैंसर का प्रभाव सबसे ज्यादा महिलाओं पर है। 400 मरीजों में से 300 महिलाएं हैं। वहीं, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो महिलाओं में गॉल ब्लेडर की समस्या अधिक क्यों है और गंगेटिक बेल्ट में इस बीमारी का खतरा अधिक क्यों है, यह अभी भी शोध का विषय है।

गंगा में प्रदूषण के कारण इसके मामले बढ़ रहे हैं, यह फिलहाल परिकल्पना है। कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सपन श्रीवास्तव के मुताबिक जल्द ही गॉल ब्लेडर के बढ़ते मामलों पर एक नए शोध की शुरूआत की जाएगी। इसको लेकर रूप-रेखा तैयारी की जा रही है। इस शोध में मुंबई के कैंसर विशेषज्ञों व रेडियोलॉजिस्ट की सहायता ली जाएगी।

ऐसे होगा शोध

कमला नेहरू अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञों द्वारा शुरू किए जा रहे शोध में साधारण जनसंख्या की स्क्रीनिंग व अल्ट्रासाउंड किया जाएगा। यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चलेगी। इसके अलावा जिन मरीजों को गॉल ब्लेडर का कैंसर हुआ है उनकी भी अनुवांशिक जांच के आधार पर अध्ययन किया जाएगा।

जिले में गॉल ब्लेडर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और थोड़ी सी परेशानी महसूस होने पर चिकित्सक से संपर्क करें। - डॉ. सपन श्रीवास्तव, कैंसर रोग विशेषज्ञ, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल

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