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संविधान मानने वालों की बात तो सुनते प्रधानमंत्री
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सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर मंसूर अली पार्क में 49वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहा। महिलाओं ने अलग-अलग मोहल्लों से जुलूस निकाला और पार्क में पहुंचकर सरकार विरोधी नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा, पीएम संगम क्षेत्र में आए थे, हमारे बीच न आकर उन्होंने हमें मायूस किया। वह हमारे बीच आते तो सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर बनी उलझनें दूर होती।
हमनेे उन्हें मंसूर अली पार्क में आने का न्योता भी भेजा था लेकिन वह आए नहीं।
महिलाओं ने पीएम के नाम का पत्र भी पढ़ा। कहा, हमारी दिली इच्छा थी कि वह हमारे बीच आकर हमारी एक प्याली चाय पीते और हमारी बातें सुनकर समझ पाते। हिंदू और मुसलमानों के बीच न बांटकर बल्कि देश के नागरिक के तौर पर हमारी बातें सुनकर समस्याओं को हल करें।
डॉ.आशीष मित्तल ने कहा कि दिल्ली में आयोजित हमलों के सभी पीड़ितों के रहने खाने के लिए गुरुद्वारों ने अपने द्वार खोल दिए। अधिवक्ता राजवेंद्र सिंह ने कहा कि शासन पुलिस का सांप्रदायीकरण करके सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के हथियार के रूप में प्रयोग कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है। अविनाश मिश्रा, जीशान रहमानी, फरह नाज, निशु, शिवा, फौजिया, इशिता, पद्मा सिंह, इरशाद उल्ला, शोएब अंसारी, मोहम्मद साहब आदि ने भी अपनी बात रखी।
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हमनेे उन्हें मंसूर अली पार्क में आने का न्योता भी भेजा था लेकिन वह आए नहीं।
महिलाओं ने पीएम के नाम का पत्र भी पढ़ा। कहा, हमारी दिली इच्छा थी कि वह हमारे बीच आकर हमारी एक प्याली चाय पीते और हमारी बातें सुनकर समझ पाते। हिंदू और मुसलमानों के बीच न बांटकर बल्कि देश के नागरिक के तौर पर हमारी बातें सुनकर समस्याओं को हल करें।
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डॉ.आशीष मित्तल ने कहा कि दिल्ली में आयोजित हमलों के सभी पीड़ितों के रहने खाने के लिए गुरुद्वारों ने अपने द्वार खोल दिए। अधिवक्ता राजवेंद्र सिंह ने कहा कि शासन पुलिस का सांप्रदायीकरण करके सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के हथियार के रूप में प्रयोग कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है। अविनाश मिश्रा, जीशान रहमानी, फरह नाज, निशु, शिवा, फौजिया, इशिता, पद्मा सिंह, इरशाद उल्ला, शोएब अंसारी, मोहम्मद साहब आदि ने भी अपनी बात रखी।
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