गुरु पूर्णिमा : शिष्य को सद्मार्ग पर पर लाने वाला ही सद्गुरु, सच्चा गुरु लोहार और सोनार जैसा
स्वामी जी ने कहा कि जिससे हम कुछ सीखते हैं वह गुरु होता है लेकिन जो हमें भगवान से मिलवाता है वह सद्गुरु होता है। गुरु कभी भी अपने शिष्य को कटु वचन नहीं बोलता है। क्योंकि उसका कहीं न कहीं शिष्य से स्वार्थ हो सकता है, लेकिन सद्गुरु हमेशा सदैव वचन बोलता है।
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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यमुना तट पर स्थित ओम नम: शिवाय आश्रम गऊघाट पर भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने स्वामी प्रभु जी महाराज का चरण पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान कई जनपदों से भक्त यहां पहुंचे थे। सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध आश्रम के लोग ही संभाल रहे थे। यहां सुबह से ही भंडारा प्रसाद का वितरण शुरू हो गया जो देर शाम तक चलता रहा। आश्रम के बच्चों की ओर से विभिन्न धार्मिक नाटक, नृत्य और गीत प्रस्तुत किए गए।
स्वामी जी ने कहा कि जिससे हम कुछ सीखते हैं वह गुरु होता है लेकिन जो हमें भगवान से मिलवाता है वह सद्गुरु होता है। गुरु कभी भी अपने शिष्य को कटु वचन नहीं बोलता है। क्योंकि उसका कहीं न कहीं शिष्य से स्वार्थ हो सकता है, लेकिन सद्गुरु हमेशा सदैव वचन बोलता है। सद्गुरु और शिष्य का संबंध लोहा और हथौड़ा एवं सोना और सोनार का है। सोनार और लोहार की तरह सद्गुरु भी शिष्य को सद्मार्ग पर लाता है।
सद्गुरु के कटु वचन सुनकर जो विचलित हो गया वह परमात्मा की प्राप्ति नहीं कर सकता। सद्गुरु को भगवान से भी बड़ा माना गया है। कहा गया है गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काकै लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय। गुरु की महिमा को भगवान ने भी माना है। व्यक्ति को सद्मार्ग पर ले जाने वाले सद्गुरु ही है।