High Court : तीन मासूम बच्चियों के कातिलों को मिली फांसी, उम्रकैद में तब्दील, 22 वर्ष पहले हुई थी घटना
शाहजहांपुर जिले के निगोह थाना क्षेत्र में 22 वर्ष पूर्व तीन सगी बहनों की गोली मारकर हत्या करने के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी चाचा भतीजे को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने मामले को विरलतम केस नहीं माना और आरोपियों को मिली फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जो कि बीस वर्ष की होगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 वर्ष पहले तीन मासूम बच्चियों को गोलियों से भूनने वाले कातिल चाचा-भतीजे को मिली फांसी को बीस वर्ष की उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार संगवान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए ट्रायल कोर्ट की ओर से भेजे गए संदर्भ पर सुनवाई करते हुए कहा, मामला विरलतम श्रेणी का नहीं है।
सत्र न्यायालय के आदेश में अनियमितता हो सकती है, लेकिन अवैधानिकता परिलक्षित नहीं होती। इसलिए इन्हें अपनी बची हुई सजा पूरी करनी होगी। मामला शाहजहांपुर के निगोही थाना क्षेत्र का है। जेंबा मुकुंदपुर गांव के अवधेश कुमार के घर पर उसके सगे चचेरे भाई छुटकन्नू, राजेंद्र कुमार और छुटकन्नू के बेटे नर्वेश ने 15 अक्तूबर 2002 की रात हमला बोल दिया।
देसी बंदूकों से लैस तीनों ने चारपाई पर लेटे अवधेश पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। जान बचा कर अवधेश तो किसी तरह मौके से भाग निकला, लेकिन मच्छरदानी में साथ सो रहीं बेटियां रोहिणी (9), नीता (8) और सुरभि (7) के शरीर गोलियों से छलनी हो गए। दो बेटियां मौके पर ही मर गईं जबकि तीसरी बेटी की मौत अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में हुई। अवधेश हमलावरों के खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले में गवाह था।
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने बेटियों की निर्मम हत्या के आरोप में पिता अवधेश को ही आरोपी बना कर गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान के आधार पर जिला सत्र न्यायालय ने राजेंद्र कुमार और नर्वेश को तिहरे हत्याकांड का दोषी पाया।
कोर्ट ने राजेंद्र और नर्वेश को फांसी की सजा सुनाई, जबकि हमलावर छुटकन्नू की ट्रायल के दौरान वर्ष 2010 में मौत हो चुकी थी। फांसी की सजा की पुष्टि के लिए ट्रायल कोर्ट की ओर से भेजे गए संदर्भ पर हाईकोर्ट ने दोनों को मिली फांसी को बीस वर्ष की उम्रकैद में तब्दील कर दिया।
75 वर्ष का हो गया राजेंद्र , 50 के नर्वेश...छुटकन्नु की मौत, विवेचना लापता
इस बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में जेल में सजा काट रहे राजेंद्र की उम्र अब 75 वर्ष है, जबकि नर्वेश 50 वर्ष का हो चुका है। वहीं ट्रायल के दौरान छुटकन्नू की वर्ष 2010 में मौत हो चुकी थी। जबकि मृत बेटियों के निर्दोष पिता अवधेश को मुल्जिम बनाने वाले विवेचक होशियार सिंह के खिलाफ ट्रायल कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन वह लापता है।