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डीएम-एसपी से बहस का नतीजा माना जा रहा मुकदमा
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राजा उदय प्रताप सिंह।
- फोटो : PRATAPGARH
पूर्व मंत्री उदय प्रताप सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे को मोहर्रम से पहले सोमवार की रात डीएम-एसपी के साथ हुई उनकी बहस के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। मोहर्रम की पूर्व संध्या पर दोनों अधिकारी उदय प्रताप को अपने साथ हनुमान मंदिर पर ले गए थे।
इस दौरान उनसे अगले वर्ष से अधिक केसरिया झंडे न लगवाने और भंडारा न करने के समझौते पर हस्ताक्षर कराना चाह रहे थे। इसे लेकर उदय प्रताप की दोनों अफसरों से बहस हुई थी। उन्होंने डीएम-एसपी की बात मानने से इनकार कर दिया और नाराज होकर वहां से चले गए।
कुंडा के शेखपुर आशिक में मोहर्रम के दिन हनुमान मंदिर पर भंडारे को लेकर केसरिया झंडे लगाए गए थे। मोहर्रम के पहले ही अधिक झंडे होने के चलते ताजियादारों ने ताजिया उठाने से मना कर दिया था। हालांकि बाद में सीओ और एसडीएम ने उन्हें ताजिया उठाने के लिए मना लिया था। इसके बाद भी इसी मामले को लेकर नौ सितंबर की शाम जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही व एसपी अभिषेक सिंह भदरी किला पहुंचे थे।
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किले में दोनों अधिकारियों ने उदय प्रताप सिंह से बात की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिलाधिकारी व एसपी ने उनसे मौके पर चलकर झंडे गिनवाने की बात कही थी। हनुमान मंदिर पहुंचने के बाद अधिकारियों के तेवर बदल गए। वहां उन्होंने आगे से ज्यादा झंडे न लगाने और मोहर्रम के दिन भंडारा नहीं करने के लिए उदय प्रताप सिंह से एक कागज पर साइन करने के लिए कहा। इस पर ताजिएदारों को भी हस्ताक्षर करना था। इस कागज पर उदय प्रताप सिंह ने साइन करने से मना कर दिया।
इसे लेकर डीएम-एसपी के साथ उनकी बहस हो गई। उदय प्रताप ने कहा कि वह किसी भी सूरत में इस तरह के कागज पर साइन नहीं करेंगे। अधिकारियों ने अपने किसी कर्मचारी या समर्थक से साइन कराने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माने। बाद में अधिकारियों के रुख को देखने के बाद वह नाराज होकर वहां से चले गए थे।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी लौट गए। कुंडा कोतवाल ने 10 सितंबर की रात 11 बजे उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि इस मुकदमे के जरिए उन्हें प्रशासन की ताकत का अहसास कराने का प्रयास किया गया है।
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इस दौरान उनसे अगले वर्ष से अधिक केसरिया झंडे न लगवाने और भंडारा न करने के समझौते पर हस्ताक्षर कराना चाह रहे थे। इसे लेकर उदय प्रताप की दोनों अफसरों से बहस हुई थी। उन्होंने डीएम-एसपी की बात मानने से इनकार कर दिया और नाराज होकर वहां से चले गए।
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कुंडा के शेखपुर आशिक में मोहर्रम के दिन हनुमान मंदिर पर भंडारे को लेकर केसरिया झंडे लगाए गए थे। मोहर्रम के पहले ही अधिक झंडे होने के चलते ताजियादारों ने ताजिया उठाने से मना कर दिया था। हालांकि बाद में सीओ और एसडीएम ने उन्हें ताजिया उठाने के लिए मना लिया था। इसके बाद भी इसी मामले को लेकर नौ सितंबर की शाम जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही व एसपी अभिषेक सिंह भदरी किला पहुंचे थे।
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किले में दोनों अधिकारियों ने उदय प्रताप सिंह से बात की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिलाधिकारी व एसपी ने उनसे मौके पर चलकर झंडे गिनवाने की बात कही थी। हनुमान मंदिर पहुंचने के बाद अधिकारियों के तेवर बदल गए। वहां उन्होंने आगे से ज्यादा झंडे न लगाने और मोहर्रम के दिन भंडारा नहीं करने के लिए उदय प्रताप सिंह से एक कागज पर साइन करने के लिए कहा। इस पर ताजिएदारों को भी हस्ताक्षर करना था। इस कागज पर उदय प्रताप सिंह ने साइन करने से मना कर दिया।
इसे लेकर डीएम-एसपी के साथ उनकी बहस हो गई। उदय प्रताप ने कहा कि वह किसी भी सूरत में इस तरह के कागज पर साइन नहीं करेंगे। अधिकारियों ने अपने किसी कर्मचारी या समर्थक से साइन कराने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माने। बाद में अधिकारियों के रुख को देखने के बाद वह नाराज होकर वहां से चले गए थे।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी लौट गए। कुंडा कोतवाल ने 10 सितंबर की रात 11 बजे उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि इस मुकदमे के जरिए उन्हें प्रशासन की ताकत का अहसास कराने का प्रयास किया गया है।