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अंतिम समय में पर्चा खारिज करना बना फांस

Wed, 30 Sep 2015 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 30 Sep 2015 01:21 AM IST
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The last time France made ??dismiss Form
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में वैध प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद नामांकन पत्र खारिज करना कुलपति के लिए गले की फांस बन गया। 24 घंटे तक न वे सो पाए और न ही चुनाव तथा सुरक्षा से जुड़े शिक्षक व अफसर। कुलपति तथा उनके साथ कई अन्य शिक्षक कुलपति आवास पर भीतर पैक होकर रह गए। बाहर छात्रों का दिन भर जमावड़ा रहा। वे रजनीश सिंह का नामांकन वैध करने की मांग कर रहे थे। इतने मंथन के बाद भी विवाद पूरी तरह से सुलझा नहीं है। हालांकि मतदान कराने का निर्णय ले लिया गया है लेकिन अलग-अलग बिंदुओं पर गतिरोध बना हुआ है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने वैध प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद रविवार देर रात संयुक्त मंत्री पद के दो तथा अगले दिन सोमवार आधी रात को अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रजनीश का नामांकन रद्द कर दिया। इससे पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा हो गया। साथ में कुलपति और अन्य अफसरों की नींद उड़ गई है। तनाव का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि सोमवार रात तकरीबन 11.30 बजे नामांकन रद्द करने का फैसला हुआ और रात में दो घंटे बाद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य कुलपति के आवास पर पहुंच गए। रात भर बैठकों का दौर चलता रहा जो मंगलवार को दिन भर जारी रहा। दिन में अन्य शिक्षकों के आने-जाने का क्रम भी जारी रहा।
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वहीं कुलपति आवास के बाहर छात्रों का जमावड़ा रहा। छात्रों में चुनाव अधिकारी तथा अन्य अफसरों के खिलाफ काफी नाराजगी रही। बवाल की आशंका को देखते हुए वहां भारी संख्या में फोर्स तैनात रही।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मंगलवार को एक बार फिर इस्तीफे देने और मान-मनौव्वल का ड्रामा चला। पहले कुलपति के इस्तीफा देने की बात सामने आई तो फिर चुनाव अधिकारी और एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों की। हालांकि किसी का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है।

हर तरफ से दबाव बढ़ने के बाद कुलपति प्रोफेसर ए.सत्यनारायण ने इस्तीफा देने की बात कह दी। हालांकि उनका इस्तीफा आगे नहीं बढ़ा। अभी यह सब चल ही रहा था कि प्रोफेसर आरएस पांडेय ने एक बार फिर चुनाव अधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों ने भी त्यागपत्र दे दिया। मतदान से एक दिन पहले इस तरह से इस्तीफा दिए जाने से कई तरह के सवाल खड़े हो गए। चुनाव न होने की भी आशंका बन गई। हालांकि किसी का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ। देर शाम तक सभी को मनाने का खेल भी चलता रहा।

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रजनीश सिंह का नामांकन कुलपति के विरोध के बावजूद निरस्त कर दिया गया। मंगलवार को कुलपति आवास पर पहुंचे छात्रों को कुलपति प्रोफेसर ए.सत्यनारायण ने बताया कि वह नामांकन पत्र खारिज करने के पक्ष में नहीं थे। बिना उनसे पूछे पीआरओ की ओर से विज्ञप्ति जारी कर दी गई। कुलपति का यह भी कहना है कि चुनाव अधिकारी प्रोफेसर आरएस पांडेय उनकी बात नहीं मान रहे। उन्होंने कहा था कि दक्षता भाषण तथा बैलेट पेपर छपने के बाद नामांकन रद्द करना गलत होगा। मतदान के बाद निर्णय लिया जाएगा लेकिन वह नहीं माने। कुलपति ने कहा कि चुनाव कराना उनका अधिकार है। उनका यह भी कहना है कि चुनाव संबंधी फैसलोें से उनका कोई वास्ता नहीं है लेकिन उन्हें बदनाम किया जा रहा है।


इलाहाबाद। छात्रसंघ चुनाव में शिक्षकों और अफसरों के बीच तालमेल न होने की वजह से एक बार फिर माहौल बिगड़ गया है। इससे चुनाव से जुड़े शिक्षकों की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वैध प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद तीन लोगों का नामांकन रद्द होने पर कहा जाने लगा है कि विश्वविद्यालय में सब गड़बड़ चल रहा है। जिस तरह से आखिरी समय में परीक्षा नियंत्रक की ओर से रिपोर्ट भेजी गई उससे भी कई सवाल उठने लगे हैं।

चुनाव से जुड़े अफसरों का कहना है कि परीक्षा नियंत्रक से स्क्रीनिंग से पहले ही सभी दावेदारों के बारे में जानकारी मांगी गई थी लेकिन उसमें रजनीश के फेल होने की बात नहीं थी। इसके विपरीत परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि  उनसे 27 सितंबर को रजनीश के पूर्व में फेल होने की बाबत जानकारी मांगी गई थी। यह पत्र भी उन्हें 28 सितंबर को मिला। इसके बाद उन्होंने रिपोर्ट भेज दी। इसके अलावा भी कई स्तर पर शिक्षकों के बीच तालमेल का अभाव दिखा। इसकी वजह से परिसर का माहौल बिगड़ गया है।

छात्रसंघ चुनाव को लेकर शुरू अटकलों के बीच सबकी हाईकोर्ट के फैसले पर नजर रही। नामांकन रद्द करने के विरोध में छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इसके विरोध में छात्रों का कुलपति आवास पर भी जमावड़ा रहा। इसके अलावा चुनाव अधिकारी समेत कई लोगों ने इस्तीफा दे दिया। इससे चुनाव हो पाएगा इस पर ही सवाल खड़ा हो गया। ऐसे में सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर रही।


पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणालि की कठोर शब्दों में निंदा की है। पूर्व अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में पदाधिकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव को मजाक बना दिया हैै। कुलपति और चुनाव अधिकारी का हर निर्णय हास्यास्पद हो गया है। मर्जी फैसले ले लिए जा रहे हैं। कुछ देर बाद ही वे उससे पलट भी जा रहे हैं। पूर्व पदाधिकारियाें का कहना था कि निर्वाचक मंडल ने नियमों को ताक पर रख दिया है। उन्होंने नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की। बैठक में कृष्ण मूर्ति सिंह यादव, केके राय, हेमंत कुमार टुन्नू, लक्ष्मी शंकर ओझा, संजय तिवारी, भूपेंद्र सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
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