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Prayagraj News: ओबीसी जातियों के पिछड़ेपन के आकलन में जुटे आयोग से हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 02:48 AM IST
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The High Court has sought a report from the commission tasked with assessing the backwardness of OBC castes.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की विभिन्न जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन करने के लिए गठित आयोग के कामकाज की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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कोर्ट ने कहा कि आगरा जिले में तीन लाख से अधिक ओबीसी आबादी के मुकाबले आयोग के सामने केवल 179 लोग पहुंचे, जबकि इनमें से भी सिर्फ 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए।
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कोर्ट ने आयोग से अब तक किए गए कार्यों और पिछड़ेपन के आकलन की प्रक्रिया का ब्योरा तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों और स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित है।
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सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि प्रदेश के 40 जिलों में आंकड़े जुटाने का 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष जिलों में भी प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करने और प्रश्नावलियां जारी करने के बावजूद आयोग के सामने अपेक्षा से काफी कम लोग पहुंचे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग करीब पांच महीने से आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया में लगा है लेकिन उसके गठन के बाद बनाई गई सलाहकार समिति की अब तक आयोग के साथ कोई बैठक नहीं हुई है।
समिति की पहली बैठक 12 अक्तूबर को प्रस्तावित है। खंडपीठ ने सवाल किया कि छह महीने की निर्धारित समयसीमा में पूरे प्रदेश का काम कैसे पूरा किया जाएगा।
कोर्ट ने आयोग से स्पष्ट करने को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के डॉ. के. कृष्णमूर्ति बनाम भारत संघ और सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य के फैसलों में निर्धारित ट्रिपल टेस्ट के तहत जातिवार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन के अनुभवजन्य आंकड़े किस तरह जुटाए जा रहे हैं और उनका आकलन कैसे किया जाएगा।

कोर्ट ने आगरा जिले में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण सीलबंद लिफाफे में 14 अक्तूबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे होगी।
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