हाईकोर्ट ने पूछा, किस प्रावधान में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नाम कॉज लिस्ट में छपते हैं
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कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं की आबद्धता पर कानूनी स्थिति साफ करने का दिया निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा है कि हाईकोर्ट के मुकदमों की कॉज लिस्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नाम किस प्रावधान के तहत छापे जाते हैं और वरिष्ठ अधिवक्ता के बहस में उपस्थित न होने पर मुकदमे की सुनवाई टलवाने का जूनियर अधिवक्ता को क्या अधिकार है। कोर्ट ने इन मुद्दों पर एडवोकेट्स एक्ट के प्रावधानों और बार कौंसिल ऑफ इंडिया तथा यूपी बार कौंसिल द्वारा निर्मित नियमों के आलोक में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। पूछा है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की आबद्धता का क्या प्रावधान है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता शशिप्रकाश सिंह और उनके सहयोग के चंद्र प्रकाश यादव तथा वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम को न्यायमित्र नियुक्त किया है।
प्रमेंद्र यादव की याचिका की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की पीठ के समक्ष याची के अधिवक्ता यादवेंद्र सिंह ने उपस्थित होकर कहा कि उन्होंने मुकदमा तैयार नहीं किया है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे को बहस करनी है। इसलिए मुकदमे की सुनवाई टाली जाए।
कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस कानूनी प्रावधान के तहत कॉज लिस्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता का नाम छापा गया है। क्या वरिष्ठ अधिवक्ता निर्देश लेने वाले अधिवक्ता के निर्देश पर उपस्थित होंगे। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता का मुकदमे की बहस के लिए उपस्थित न होना सुनवाई टालने का आधार नहीं हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।