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कुंभ 2019- किन्नर अखाडे़ की देवत्व यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
Mon, 07 Jan 2019 02:28 AM IST
shailendra Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: shailendra Kumar
Updated Mon, 07 Jan 2019 02:28 AM IST
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देवत्व
- फोटो : अमर उजाला, प्रयागराज
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संगम की रेती पर रविवार को नया इतिहास रचा गया। उज्जैन में गठन के बाद प्रयागराज के कुंभपर्व में पहली बार किन्नर अखाड़े ने देवत्व यात्रा निकाली। ऊंट, घोड़ा, बग्घी, डीजे व डमरू की मंगलध्वनि के साथ गाड़ियों का लंबा काफिला था। आरंभ से लेकर कुंभ मेला स्थित शिविर तक पूरे रास्ते में शहरियों ने उत्साहपूर्वक इसका स्वागत किया। रामभवन चौराहे से लेकर दारागंज तक कई-कई स्थानों पर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी एवं महामंडलेश्वरों पर फूल बरसाए गए। रास्ते भर जयकारे गूंजते रहे।
आरंभ में आचार्य महामंडलेश्वर ने रामभवन चौराहा स्थित भगवान शिव के मंदिर में विधि विधान से पूजन-अर्चन करके आशीष मांगा। हर-हर महादेव, जयश्रीराम के जयकारों के बीच रामभवन चौराहे से आरंभ देवत्व यात्रा सेक्टर बारह स्थित शिविर पहुंचकर पूरी हुई। सबसे आगे बग्घी पर महाकाल की सवारी चली। किन्नर अखाडे़ के संत-महात्माओं ने दाएं हाथ में तलवार ले रखी थी। सजे हुए ऊंट पर आचार्य जबकि घोड़ों और फूलों से सजे हुए रथ पर महामंडलेश्वर, संत-महात्मा बैठे। शिव डमरू सहित कई अन्य आकर्षक झाकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। बैंडबाजे की धुन पर लोगों ने नृत्य भी किया।
देवत्व यात्रा में उत्तर भारत की प्रभारी महामंडलेश्वर भवानी मां, महामंडलेश्वर डा. राजराजेश्वरी शिवप्रिया जी, अंतरराष्ट्रीय सेविका महामंडलेश्वर कामिनी कोहली, महामंडलेश्वर मयूरी माई, संजना माई, ऋषि अजयदास, दुर्गादास, प्रभारी पीठाधीश्वर पवित्रा, डाली माई, पुष्पामाई,पायल माई, गंगा माई, शोभा माई, रजनी रावत, आशा माई, सोनिया माई, प्रांजल, प्रिया माई, देवी माई, किरन माई, अनीता माई, सोनिया माई, पिंकी माई,प्रीती माई, हसीना माई, सतपुत्र अनुराग शुक्ला सहित बडी संख्या में संत-महात्माओं ने मौजूदगी दर्ज कराई। शिविर पहुंचने पर संतों का स्वागत किया गया। अंत में सभी ने भोजन प्रसाद लिया।
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देवत्व यात्रा के दौरान अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम पहुंचकर यात्रा कुछ देर के लिए रोकी गई। इस बीच आचार्य महामंडलेश्वर ने उतरकर जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का पूजन करके उनका आशीर्वाद लिया। उनके प्रतिनिधि शिष्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी अखाड़ा प्रमुख को शुभकामनाएं दीं। किन्नर अखाडे़ की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी सहित अन्य संत-महात्माओं के स्वागत सहित लोगों ने उनके पांव छूकर आशीर्वाद भी लिया। बाद में अखाडे़ के संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को सिक्का और फूल का आशीष भी दिया। देवत्व यात्रा के दौरान कई जगहों पर शहरियों, श्रद्धालुओं की ओर से चाय-पानी और मिठाई के स्टाल भी लगाए गए। अनेक संस्थाओं ने यात्रा में शामिल संतों-श्रद्धालुओं को आग्रह करके चाय पिलाई, मिठाई खिलाई।
देवत्व यात्रा जिधर से होकर गुजरी, सड़क केदोनों ओर खड़े होकर और छतों, बारजों से महिलाओं, बच्चों ने संतों को निहारा। जिसे जो ऊंची जगह मिली, वह वहीं जाकर जम गया। यात्रा में शामिल आचार्य, महामंडलेश्वर, संतों का सम्मान किया गया। मेजा की विधायक नीलम करवरिया ने रामभवन चौराहे पर माल्यार्पण किया। संस्था ओम नम:शिवाय के शांतनु सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ नें देवत्व यात्रा में शामिल संतों का माल्यार्पण करके स्वागत किया। हालांकि बतौर अखाड़ा न अखाड़ा परिषद और न ही प्रशासन की ओर से किन्नर अखाड़े का स्वागत किया।
किन्नर अखाड़ा प्रमुख के मुताबिक अखाड़े के महामंडलेश्वर, महंत सभी मुख्य स्नानपर्वो पर त्रिकाल संध्या स्नान करेंगे। उज्जैन कुंभ में भी किन्नर अखाडे़ ने त्रिकाल संध्या स्नान किया था। खास यह भी कि किन्नर अखाड़ा सभी छह स्नानपर्वों तक रेती पर रुकेगा। किन्नर अखाडे की देवत्व यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही। भारी पुलिस बल, कई कंपनी पीएसी और पैरामिलिट्री के जवान, अधिकारी पूरे रास्ते व्यवस्था में जुटे रहे। इसके अतिरिक्त किन्नर अखाडे़ की सुरक्षा में मुंबई से आए दो सौ बाउंसर भी लगे रहे। ये किन्नर संत-महात्माओं को सुरक्षा के घेरे में लेकर चले। आमतौर पर अखाड़े पेशवाई के साथ छावनी प्रवेश करने के बाद रेती पर ही रुकते हैं लेकिन किन्नर अखाड़े की ओर से ऐसा नहीं रहा। आचार्य महामंडलेश्वर के मुताबिक सोमवार को शुभ मुहूर्त में पूजन-अनुष्ठान के बाद छावनी में डेरा डाला जाएगा।
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आरंभ में आचार्य महामंडलेश्वर ने रामभवन चौराहा स्थित भगवान शिव के मंदिर में विधि विधान से पूजन-अर्चन करके आशीष मांगा। हर-हर महादेव, जयश्रीराम के जयकारों के बीच रामभवन चौराहे से आरंभ देवत्व यात्रा सेक्टर बारह स्थित शिविर पहुंचकर पूरी हुई। सबसे आगे बग्घी पर महाकाल की सवारी चली। किन्नर अखाडे़ के संत-महात्माओं ने दाएं हाथ में तलवार ले रखी थी। सजे हुए ऊंट पर आचार्य जबकि घोड़ों और फूलों से सजे हुए रथ पर महामंडलेश्वर, संत-महात्मा बैठे। शिव डमरू सहित कई अन्य आकर्षक झाकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। बैंडबाजे की धुन पर लोगों ने नृत्य भी किया।
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देवत्व यात्रा में उत्तर भारत की प्रभारी महामंडलेश्वर भवानी मां, महामंडलेश्वर डा. राजराजेश्वरी शिवप्रिया जी, अंतरराष्ट्रीय सेविका महामंडलेश्वर कामिनी कोहली, महामंडलेश्वर मयूरी माई, संजना माई, ऋषि अजयदास, दुर्गादास, प्रभारी पीठाधीश्वर पवित्रा, डाली माई, पुष्पामाई,पायल माई, गंगा माई, शोभा माई, रजनी रावत, आशा माई, सोनिया माई, प्रांजल, प्रिया माई, देवी माई, किरन माई, अनीता माई, सोनिया माई, पिंकी माई,प्रीती माई, हसीना माई, सतपुत्र अनुराग शुक्ला सहित बडी संख्या में संत-महात्माओं ने मौजूदगी दर्ज कराई। शिविर पहुंचने पर संतों का स्वागत किया गया। अंत में सभी ने भोजन प्रसाद लिया।
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देवत्व यात्रा के दौरान अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम पहुंचकर यात्रा कुछ देर के लिए रोकी गई। इस बीच आचार्य महामंडलेश्वर ने उतरकर जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का पूजन करके उनका आशीर्वाद लिया। उनके प्रतिनिधि शिष्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी अखाड़ा प्रमुख को शुभकामनाएं दीं। किन्नर अखाडे़ की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी सहित अन्य संत-महात्माओं के स्वागत सहित लोगों ने उनके पांव छूकर आशीर्वाद भी लिया। बाद में अखाडे़ के संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को सिक्का और फूल का आशीष भी दिया। देवत्व यात्रा के दौरान कई जगहों पर शहरियों, श्रद्धालुओं की ओर से चाय-पानी और मिठाई के स्टाल भी लगाए गए। अनेक संस्थाओं ने यात्रा में शामिल संतों-श्रद्धालुओं को आग्रह करके चाय पिलाई, मिठाई खिलाई।
देवत्व यात्रा जिधर से होकर गुजरी, सड़क केदोनों ओर खड़े होकर और छतों, बारजों से महिलाओं, बच्चों ने संतों को निहारा। जिसे जो ऊंची जगह मिली, वह वहीं जाकर जम गया। यात्रा में शामिल आचार्य, महामंडलेश्वर, संतों का सम्मान किया गया। मेजा की विधायक नीलम करवरिया ने रामभवन चौराहे पर माल्यार्पण किया। संस्था ओम नम:शिवाय के शांतनु सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ नें देवत्व यात्रा में शामिल संतों का माल्यार्पण करके स्वागत किया। हालांकि बतौर अखाड़ा न अखाड़ा परिषद और न ही प्रशासन की ओर से किन्नर अखाड़े का स्वागत किया।
किन्नर अखाड़ा प्रमुख के मुताबिक अखाड़े के महामंडलेश्वर, महंत सभी मुख्य स्नानपर्वो पर त्रिकाल संध्या स्नान करेंगे। उज्जैन कुंभ में भी किन्नर अखाडे़ ने त्रिकाल संध्या स्नान किया था। खास यह भी कि किन्नर अखाड़ा सभी छह स्नानपर्वों तक रेती पर रुकेगा। किन्नर अखाडे की देवत्व यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही। भारी पुलिस बल, कई कंपनी पीएसी और पैरामिलिट्री के जवान, अधिकारी पूरे रास्ते व्यवस्था में जुटे रहे। इसके अतिरिक्त किन्नर अखाडे़ की सुरक्षा में मुंबई से आए दो सौ बाउंसर भी लगे रहे। ये किन्नर संत-महात्माओं को सुरक्षा के घेरे में लेकर चले। आमतौर पर अखाड़े पेशवाई के साथ छावनी प्रवेश करने के बाद रेती पर ही रुकते हैं लेकिन किन्नर अखाड़े की ओर से ऐसा नहीं रहा। आचार्य महामंडलेश्वर के मुताबिक सोमवार को शुभ मुहूर्त में पूजन-अनुष्ठान के बाद छावनी में डेरा डाला जाएगा।