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Prayagraj News: प्रधान बनने का सपना नहीं हुआ पूरा, पांच साल गुजरे, अब चुनाव की तैयारी में जुटे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:40 AM IST
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The dream of becoming a Pradhan did not come true, five years have passed, now he is busy preparing for the elections
मेजा तहसील के 21 लोगों का प्रधान बनने का सपना पूरा नहीं हो सका। पांच साल तक चले मुकदमे में एसडीएम न्यायालय में तारीख पर तारीख मिलती रही लेकिन प्रधान की कुर्सी नसीब नहीं हो सकी। इधर, कार्यकाल भी बीतने को आ गया। अब मुकदमे की पैरवी करने के बजाय गांव में पंचायत चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं को रिझाने में लोग जुट गए हैं। पिछले चुनाव में कम वोट से पराजित होने की बात बताकर अगले चुनाव में प्रधान बनाए जाने की वकालत कर रहे हैं।
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मेजा में ग्राम प्रधान का चुनाव 15 अप्रैल 2021 को हुआ था। जिसमें से 23 ग्राम पंचायतों के प्रत्याशी दो, चार और नौ वोट से पंचायत चुनाव जीत कर प्रधान बन गए थे। दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशियों ने धांधली से चुनाव जीतने का आरोप लगाते हुए मेजा एसडीएम न्यायालय में उप्र पंचायती राज अधिनियम 1947 के तहत दोबारा मतगणना के लिए वाद दाखिल किया था। मेजा के दरी ग्राम पंचायत के विजय शंकर मिश्र को हरविलास यादव ने सात मतों से पराजित किया था। विजय शंकर ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए एसडीएम न्यायालय में पुर्नमतगणना के लिए वाद दाखिल किया है।
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वहीं रामनगर में संगीता यादव बनाम जीरा देवी, उषा सिंह बनाम अनीता देवी, रंजना द्विवेदी बनाम रेनू पांडेय, सूर्यबली बनाम सतीश, सोनकली बनाम रेशमा देवी, राधेश्याम तिवारी बनाम मंगला प्रसाद सहित 23 गांव में कम मतों से पराजित हुए प्रत्याशियों ने वाद दाखिल किया था। इस पांच वर्ष में एसडीएम न्यायालय ने तिसेन तुलापुर और बभनी ग्राम पंचायत के दाखिल वाद में फैसला सुनाया बाकी 21 पराजित प्रत्याशियों के मुकदमे में सिर्फ तारीख पर तारीख मिलती रही। अब, प्रधान बनने का सपना 21 लोगों का सपना पूरा नहीं हो सका। बल्कि वह सभी लोग पुन: पंचायत चुनाव में जुट गए हैं। मतदाताओं को रिझाने के लिए दिन-रात एक कर दिया है। पंचायत चुनाव में बीएलओ द्वारा मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम बढ़ाने और घटाने के कार्य में प्रधान उम्मीदवारों की निगाह टिकी हुई है। आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं।
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अधिवक्ताओं की हड़ताल की वजह से महीने भर तक कोर्ट नहीं चल पाई थी। अब नियमित कोर्ट चल रही है। फिलहाल पंचायत चुनाव नजदीक आ जाने से पुनर्मतगणना के लिए वाद दाखिल करने वालों में मुकदमे की पैरवी को लेकर दिलचस्पी कम दिख रही है। फिलहाल मुकदमे सुने जा रहे हैं।

सुरेंद्र प्रताप यादव उप जिलाधिकारी मेजा।


तिसेन तुलापुर और बभनी में भी जीते प्रधान के पक्ष में आया था फैसला
तिसेन तुलापुर और बभनी ग्राम पंचायत के आए फैसले में भी पुनर्मतगणना का आदेश नहीं हुआ था। बल्कि जो प्रधान थे उन्हीं के पक्ष में फैसला आया था। दोनों ग्राम पंचायतों में पराजित प्रत्याशियों की मंशा पूरी नहीं हो सकी थी।
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