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जिले में फैला खसरा, चिकनपॉक्स का प्रकोप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 14 May 2016 01:35 AM IST
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स्वास्थ्य
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
मौसम में हो रहे उठापटक का असर लोगों की सेहत पर सीधे पड़ रहा है। लोग जुकाम, बुखार के साथ खसरा, चिकनपॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में इसका प्रकोप फैला हुआ है। बच्चे इसकी चपेट में अधिक हैं। उपचार के लिए बेली, कॉल्विन, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, चिल्ड्रेन अस्पताल, फाफामऊ स्थित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, यूनानी मेडिकल कॉलेज सहित निजी अस्पतालों में ऐसे मरीजों की भीड़ लगी हुई है।
मौसम में पिछले महीने से लगातार उठापटक हो रही है। पारा 45 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचकर फिर नीचे आ गया। बीच-बीच में बादल छाने से तेज गर्मी के बीच उमस भी बन जाती। इससे वायरल बीमारी फैलाने वाले वायरस को भी लोगों पर अटैक करने का मौका मिला। लोग जुकाम, बुखार के साथ-साथ खसरा, चिकनपॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ गए। फाफामऊ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डॉ. डीएस सिंह कहते हैं कि उनकी ओपीडी में रोजाना 25 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सालय की दूसरे चिकित्सकों की ओपीडी का भी यही हाल है।
शहर में यह बीमारी जहां करेली, अटाला, गौसनगर, कल्याणी देवी, तेलियरगंज, दारागंज, अलोपीबाग, झूंसी, नैनी, पश्चिमी शहर के कई मुहल्लों में इस बीमारी ने पांव पसारे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों जैसे थरवई, रामनगर, सहसों, सैदाबाद, हंडिया, फुलपुर, बहरिया, यमुनापार के करछना, कोरांव, मेजा, शंकरगढ़ जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में हैं। एलोपैथिक में इस बीमारी कोई सही दवा नहीं है। आमतौर चिकित्सक एंटी बायोटिक और बुखार की दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। डॉ. डीएस सिंह कहते हैं कि होम्योपैथिक में इसके बचाव की दवा है। बीमारी की चपेट में आने पर भी दवाएं दी जाती हैं।
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इससे मरीज को राहत मिलती है। बीमारी का असर कम रहता है। खसरे के तो टीके स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए जाते हैं, जबकि चिकनपॉक्स के टीके खरीदकर लगवाने पड़ते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक चिकनपॉक्स के टीके एक साल तक के लिए ही काम करते हैं। मरीजों को साफ-सफाई रखने के साथ आइसोलेशन में रहना पड़ता है।
खसरा के लक्षण
- कान के पीछे से चेहरे पर लाल दाने आना
- खुजली होना, आंखों में खुजली
- लगातार बुखार बने रहना
- शरीर में कमजोरी, प्रतिरोधक क्षमता कम होना
- भूख नहीं लगती
- बीमारी का असर दो हफ्ते तक
चिकनपाक्स के लक्षण
- दाना पीठ और पेट से शुरू होता है
- शरीर में धीरे-धीरे फैल जाता है
- बुखार का असर हफ्ते भर बना रहता है
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मौसम में पिछले महीने से लगातार उठापटक हो रही है। पारा 45 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचकर फिर नीचे आ गया। बीच-बीच में बादल छाने से तेज गर्मी के बीच उमस भी बन जाती। इससे वायरल बीमारी फैलाने वाले वायरस को भी लोगों पर अटैक करने का मौका मिला। लोग जुकाम, बुखार के साथ-साथ खसरा, चिकनपॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ गए। फाफामऊ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डॉ. डीएस सिंह कहते हैं कि उनकी ओपीडी में रोजाना 25 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सालय की दूसरे चिकित्सकों की ओपीडी का भी यही हाल है।
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शहर में यह बीमारी जहां करेली, अटाला, गौसनगर, कल्याणी देवी, तेलियरगंज, दारागंज, अलोपीबाग, झूंसी, नैनी, पश्चिमी शहर के कई मुहल्लों में इस बीमारी ने पांव पसारे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों जैसे थरवई, रामनगर, सहसों, सैदाबाद, हंडिया, फुलपुर, बहरिया, यमुनापार के करछना, कोरांव, मेजा, शंकरगढ़ जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में हैं। एलोपैथिक में इस बीमारी कोई सही दवा नहीं है। आमतौर चिकित्सक एंटी बायोटिक और बुखार की दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। डॉ. डीएस सिंह कहते हैं कि होम्योपैथिक में इसके बचाव की दवा है। बीमारी की चपेट में आने पर भी दवाएं दी जाती हैं।
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इससे मरीज को राहत मिलती है। बीमारी का असर कम रहता है। खसरे के तो टीके स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए जाते हैं, जबकि चिकनपॉक्स के टीके खरीदकर लगवाने पड़ते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक चिकनपॉक्स के टीके एक साल तक के लिए ही काम करते हैं। मरीजों को साफ-सफाई रखने के साथ आइसोलेशन में रहना पड़ता है।
खसरा के लक्षण
- कान के पीछे से चेहरे पर लाल दाने आना
- खुजली होना, आंखों में खुजली
- लगातार बुखार बने रहना
- शरीर में कमजोरी, प्रतिरोधक क्षमता कम होना
- भूख नहीं लगती
- बीमारी का असर दो हफ्ते तक
चिकनपाक्स के लक्षण
- दाना पीठ और पेट से शुरू होता है
- शरीर में धीरे-धीरे फैल जाता है
- बुखार का असर हफ्ते भर बना रहता है