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संगम नगरी के लिए सपना बनी नमामि गंगे योजना

Mon, 04 May 2015 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Mon, 04 May 2015 02:19 AM IST
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The confluence dream for township plan Nmami Gange
इलाहाबाद। नमामि गंगे योजना के नाम पर गंगा की स्वच्छता के लिए केंद्र सरकार ने संगम नगरी के लोगों को सपने तो बड़े-बड़े दिखाए लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सतह पर कुछ नहीं आया। पहले से चल रही योजनाओं को छोड़ दिया जाए तो केंद्र सरकार ने एक वर्ष में ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे यह लगे कि कुंभ नगरी संवरने लगी हो, फिर चाहे रिवर फ्रंट डेवलपमेंट हो या गंगा सफाई का काम। यह स्थिति तब है जब यहां वर्ष 2019 में अर्द्धकुंभ मेला लगना है। हालांकि नगर निगम ने नमामि गंगे योजना में गंगा की सफाई के नाम पर दो माह में 52 लाख रुपये बहा दिए लेकिन गंगा की स्थिति जस की तस है।
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गंगा की स्वच्छता और उसके किनारों को संवारने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं कीं। इसके लिए जल संसाधन, गंगा एवं नदी विकास मंत्रालय बनाया। इसकी मंत्री उमा भारती दो बार इलाहाबाद आई और गंगा की स्वच्छता का दावे दोहराए लेकिन सच्चाई इसके उलट है। बमरौली से द्रोपदी घाट, नेवादा, मऊ सरैया, ऊंचवागढ़ी, बेली, मेहंदौैरी, रसूलाबाद, शिवकुटी, गोविंदपुर, सलोरी, दारागंज, फाफामऊ और झूंसी के बड़े-छोटे 56 नालों से गंगा में गिरता और रात में मेहंदौरी एवं सलोरी एसटीपी से बिना ट्रीटमेंट के चोरी-छिपे छोड़ा जा रहा हजारों लीटर जहरीला पानी नमामि गंगे योजना की सच्चाई बयां कर रहा है। केंद्र सरकार की घोषणा के एक साल बाद ही इन नालों को एसटीपी से नहीं जोड़ा जा सका।
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केंद्र सरकार ने रिवर फ्रंट डेवलपमेंट की भी घोषणा की। इसे लेकर दिल्ली में बैठकें हुई, जिसमें महापौर से लेकर कमिश्नर, एडीए उपाध्यक्ष सहित अन्य अफसर शामिल हुए। वहां से लौटकर अफसरों ने दावा किया कि इलाहाबाद में 65 किलोमीटर रिवर फ्रंट डेवलपमेंट होगा। बमरौली के आगे गयासुद्दीनपुर गांव से तेलियरगंज तक गंगा के किनारे बांध बनेगा। इसी तरह तेलियरगंज से दारागंज तक बांध बनाया जाएगा। फाफामऊ और झूंसी में गंगा के किनारे इसी तरह काम होंगे। इसके लिए दिल्ली से कंसल्टेंट, आर्किटेक्ट बुलाए गए। एडीए ने नए यमुना पुल से पुराने पुल तक रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का खाका तैयार कराया। इसी तरह सिंचाई विभाग ने तेलियरगंज से दारागंज तक की योजना तैयार की। छह सौ करोड़ रुपये से अधिक की योजना का प्रस्ताव तैयार कर शासन के जरिए केंद्र को भेजा गया लेकिन वह भी अटक गया।
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 नमामि गंगे योजना के तहत संगम क्षेत्र में दारागंज से किलाघाट तक साफ सफाई सहित उससे जुड़ी उपकरण, गाड़ियां आदि खरीदने के लिए 4.10 करोड़ रुपये दिए। इस रकम से कॉम्पेक्टर, डंपर, रोबोट, कूड़ा गाड़ी, कंटेनर खरीदे जाने थे। इसके लिए टेंडर भी हो गया लेकिन सामान अब तक नहीं आया। हालांकि नगर निगम ने संगम क्षेत्र में डस्टबिन लगवाकर किनारा कर लिया। यहां सफाई कार्य नहीं हो रहा है।

नमामि गंगे योजना के तहत नगर निगम की ओर से गंगा सफाई का प्रयोग पूरी तरह असफल रहा। इसके लिए निगम ने फ्लोटिंग ट्रैस स्कीमिंग मशीन दो महीने के लिए किराए पर ली। 52 लाख रुपये देकर दो मशीनों से गंगा की सफाई कराई गई लेकिन गंगा में संगम से लेकर फाफामऊ और उसके आगे गंदगी जरा भी कम नहीं हुई। ऐसे में मशीन की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। निगम की योजना मशीन को कुछ और समय तक गंगा में चलाने की है। इसके लिए शासन और केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा गया है। एक फ्लोटिंग ट्रैस स्कीमिंग मशीन यहां स्थाई रूप से रखने की भी योजना है लेकिन दो माह में गंगा से नाम मात्र की गंदगी निकलाने वाली मशीन से आगे क्या काम हो सकेगा, यह तय नहीं है।

इलाहाबाद। सीवरेज और नान सीवरेज योजना के जो काम पहले जेएनएनयूआरएम और एनजीआरबीए के तहत हो रहे थे, अब वह नमामि गंगे योजना का हिस्सा हो गए हैं। सीवरेज योजना के तहत शहर में सीवर लाइन बिछाने के साथ एसटीपी का निर्माण होना है, जबकि नान सीवरेज के तहत रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, सार्वजनिक शौचालय, विद्युत शवदाह गृह, धोबीघाट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के काम होने हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को डिस्ट्रिक्ट सी के तहत पहले से बनी सीवरेज योजना के लिए 146.97 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिससे शहर उत्तरी के शिवकुटी, गोविंदपुर, इंजीनियरिंग कॉलेज, चांदपुर सलोरी, बघाड़ा, छोटा बघाड़ा, अल्लापुर आदि में सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू हो गया है। नगर निगम धोबीघाटों का निर्माण करा चुका है, जबकि शौचालयों का निर्माण जारी है। इसमें नया कुछ नहीं है।


इलाहाबाद। केंद्र सरकार ने रिवर फ्रंट डेवलपमेंट की घोषणा तो की लेकिन उसकी ओर से इसके लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। इस बीच प्रदेश सरकार ने रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना पर तेजी दिखाई और कुंभ नगरी की महत्ता को समझते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले महीने अरैल में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के लिए 125 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।
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