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मौन हुए मंच के महारथी बाले भैया

Thu, 23 Jun 2016 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 23 Jun 2016 01:08 AM IST
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The children were silent stage tycoon brother
बालचंद्र - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
जानेेमाने रंगपुरुष बालकृष्ण मालवीय नहीं रहे। वह तकरीबन 82 वर्ष के थे। मंगलवार को अपने गंगादर्शन कालोनी, रसूलाबाद स्थित आवास पर सुबह साढ़े दस बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी शोभा मालवीय और दो बेटों से भरा परिवार छोड़ गए हैं। सूचना मिलने पर बड़ा बेटा अमिताभ लंदन जबकि छोटा बेटा शील अमेरिका से चलकर इलाहाबाद पहुंचा। बड़े बेटे अमिताभ के मुताबिक बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े नौ बजे शवयात्रा रसूलाबाद घाट के लिए प्रस्थान करेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अमिताभ ने कहा, यह परिवार के लिए बड़ा आघात है। उन्हें दिल्ली ले जाकर एक बार चेकअप कराने की योजना थी लेकिन उन्होंने इसका अवसर नहीं दिया। बहुत खामोशी से सभी को अलविदा कह गए।
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रंगकर्मियों के बीच बाले भैया के नाम से मशहूर बालकृष्ण मालवीय ने इलाहाबाद के रंगकर्म को समृद्ध किया। उन्होंने ‘ट्रिपल ए’ संस्था बनाई थी जिसकी ओर से नियमित नाटकों का मंचन किया जाता था। निर्देशन और अभिनय के साथ ‘घासीराम कोतवाल’, ‘तुगलक’, ’अंधायुग’, ‘चारुलता’ सहित दो दर्जन से ज्यादा  नाटकों के साथ उन्होंने रंगमंच को नए मानक दिए। सिविल लाइंस स्थित पैलेस थिएटर में तकरीबन आठवें दशक तक  केवल रविवार की सुबह नौ बजे से होने वाले नाटकों का मंचन करने वाले रंगकर्मियो में वह प्रमुखता से शामिल थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके आवास पर रंगकर्मियों, रचनाकारों का जुटना शुरू हो गया। उनका जाना रंगकर्म के लिए गहरा आघात है।
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वह हमारे शहर के रंगमंच के स्वर्णयुग के प्रतिनिधि हस्ताक्षर थे। नाटकों की डिजाइनिंग और स्क्रिप्ट चयन में उनका कोई जवाब नहीं था। वह श्रेष्ठ कलाकार और निर्देशक थे। उन्होंने अपने समय के नामचीन नाटकों में बेजोड़ अभिनय तथा निर्देशन किया और साबित किया कि दर्शकों की कोई कमी नहीं है। उनके नाटकों को देखने के लिए दर्शक अगले शो का इंतजार करते थे। उन्होंने तकरीबन एक हजार प्रतिबद्ध दर्शकों का कुनबा तैयार किया था। 
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0 अजामिल, वरिष्ठ रंगनिर्देशक

नियमित रंगमंच को दिशा देने के क्रम में वर्ष 1984 में जब इलाहाबाद के ग्यारह नाट्य संस्थाओं को मिलाकर इलाहाबाद आर्टिस्ट फोरम का गठन किया गया तो मालवीय जी उसके अध्यक्ष और मैं उसका सचिव बना। रंगकर्म को उन्होंने समृद्ध किया और संस्कार दिए। उनका जाना हिन्दी रंगमंच के लिए गहरा आघात है।
0 अनिल रंजन भौमिक, वरिष्ठ रंगनिर्देशक

हिन्दी रंगमंच को नए आयाम देने में बालकृष्ण मालवीय का योगदान अहम है। धर्मवीर भारती के नाटक अंधायुग को उन्होंने कालजयी बना दिया था। रंगमंच के लिए उनकी प्रतिबद्धता अविस्मरणीय है। इलाहाबाद उनकी सांसों में हमेशा रहा। उनके जाने के साथ एक युग खत्म हो गया।
0 यश मालवीय, वरिष्ठ साहित्यकार

60-70 केदशकों में इलाहाबाद के रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वालों में बालकृष्ण मालवीय का नाम अहम है। अपने समय के सभी चर्चित नाटकों में काम करने सहित उन्होंने हमारी पीढ़ी को रंगमंच के संस्कार दिए। नाटकों और दर्शकों का वह स्तर अब दुर्लभ है। उन्हें जुनून की हद तक रंगमंच से प्रेम था। वह प्रतिबद्ध कलाकार और हमारे हीरो थे।


0 प्रो.अनीता गोपेश, वरिष्ठ कथाकार
बालकृष्ण मालवीय जैसे दिग्गज रंगकर्मी ने पैलेस थिएटर में महत्वपूर्ण नाटकों का मंचन किया। रंगकर्म को आम आदमी से जोड़ने में उनकी भूमिका सराहनीय है। उनके योगदान का उल्लेख किए बिना इलाहाबाद का रंगकर्म अधूरा रहेगा।
0 डॉ.अनुपम आनंद, वरिष्ठ रंगनिर्देशक
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