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High Court : बैंक मैनेजर की सेवा समाप्ति रद्द, कोर्ट ने कहा- सजा की प्रकृति पर फिर से किया जाए विचार

Fri, 24 Apr 2026 02:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 Apr 2026 02:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुशासनिक कार्रवाई के एक मामले में हस्तक्षेप करते हुए यूको बैंक के एक पूर्व शाखा प्रबंधक की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है।

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Termination of Uco bank manager service cancelled, High court said nature of punishment should be reconsidered
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुशासनिक कार्रवाई के एक मामले में हस्तक्षेप करते हुए यूको बैंक के एक पूर्व शाखा प्रबंधक की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हालांकि कर्मचारी पर लगे आरोप गंभीर हैं, लेकिन बैंक ने सेवा से हटाने की सजा तय करते समय कानूनी प्रावधानों और द्विपक्षीय समझौतों की अनदेखी की है।

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अदालत ने बैंक प्रबंधन को याची को दी गई सजा की प्रकृति पर कानून के दायरे में रहकर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। गाजियाबाद में याची विनोद कुमार सेठी यूको बैंक के शाखा प्रबंधक के रूप में तैनात थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने बैंक के स्थापित नियमों का पालन न कर मेसर्स भव्य क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फर्जी बैंक गारंटी जारी की थी। इस कदाचार के लिए बैंक के अनुशासनिक प्राधिकारी ने मार्च 2007 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी और याचिकाकर्ता पर लगे दोनों आरोप सिद्ध हो चुके हैं, फिर भी सजा का पैमाना कानून सम्मत होना अनिवार्य है। कोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द करते हुए मामले को वापस बैंक के सक्षम प्राधिकारी के पास भेज दिया है। कहा कि प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों के आलोक में नया आदेश पारित किया जाए।

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