{"_id":"57ba0b574f1c1bc315d4f032","slug":"teen-killed-with-a-knife-godkr","type":"story","status":"publish","title_hn":"किशोर को चाकू से गोदकर मार डाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किशोर को चाकू से गोदकर मार डाला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 22 Aug 2016 01:44 AM IST
विज्ञापन
allahabad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। अल्लापुर में रविवार दोपहर घर के भीतर 15 साल के गुरदीन उर्फ बबलू की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वह घर में अकेला था। गोद लेने वाली बुजुर्ग शांति देवी सत्संग में गई थी। दोपहर में लौटने पर उन्होंने बरामदे में बबलू की रक्तरंजित लाश देखी। उसे सरिया और चाकू से गोदकर मारा गया था। घर में लूटपाट के भी निशान भी नहीं थे। मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों और क्राइम ब्रांच ने जांच तथा पूछताछ की।
अल्लापुर में पटेल चौराहा के निकट माली चौराहा पर 75 वर्षीय शांति देवी का पुराना मकान है। उनके पति रामप्रसाद गुप्ता का तीन साल पहले निधन हो चुका है। वह चाय-नाश्ता की दुकान चलाकर पत्नी संग गुजारा करते थे। उनका कोई पुत्र नहीं था। एक बेटी थी जिसका करेलाबाग में ब्याह किया गया था लेकिन वह भी बीमारी से चल बसी। धार्मिक प्रवृत्ति की शांति देवी ने 15 साल पहले बैरहना स्थित संत निरंकारी आश्रम में किसी महिला के एक माह के बच्चे को गोद लिया। उसका नाम गुरदीन उर्फ बबलू रखा। पति के देहांत के बाद पिछले तीन साल से शांति देवी गोद लिए पुत्र बबलू के साथ जीवन यापन कर रही थीं। बबलू ने कक्षा चार तक पढ़ाई की थी। फिर वह दुकानों में काम करने लगा। मौजूदा समय में वह कटरा इलाके में चाऊमीन की दुकान में काम करता था। शांति देवी हर रविवार को संत निरंकारी आश्रम में सत्संग में शामिल होने जाती थीं। बबलू भी उनके साथ सत्संग में जाता था। मगर इस रविवार की सुबह शांति देवी आश्रम के लिए निकलने लगीं तो बबलू ने उन्हें अकेले जाने के लिए कह दिया। उसनेे कहा कि वह घर में पुताई कराने के लिए मजदूरों से बात करने जाएगा। कुछ देर बाद आश्रम आएगा। मगर बबलू दोपहर तक आश्रम नहीं गया।
लाश देख रोते हुए बाहर आईं बुजुर्ग
करीब तीन बजे शांति देवी घर लौटीं तो दरवाजा खुला था। वह बरामदे में पहुंची तो वहां का नजारा देख हतप्रभ रह गईं। बबलू फर्श पर खून से लथपथ पड़ा था। आसपास भी खून बिखरा था। वह रोते-कलपते बाहर निकलीं और पड़ोसियों को बताया। लोगों ने जाकर देखा तो पता चला कि बबलू जीवित नहीं है। कुछ देर में जार्जटाउन पुलिस पहुंची। फिर सीओ डीपी तिवारी और एसपी सिटी राजेश यादव भी क्राइम ब्रांच के साथ पहुंच गए। मौके पर फोरेंसिक टीम को बुलाकर छानबीन की गई। बबलू ने कमीज पहन रखी थी। अंडरवियर नहीं थी। अलबत्ता गमछा जरूर था। उसका गला रेता गया था। सिर समेत कई जगह गहरे जख्म थे। पुलिस को वहां लोहे की एक खून सनी सरिया पड़ी मिली। अनुमान है कि उस पर सरिया और चाकू से हमला किया गया था। चाकू नहीं मिला है। बरामदे में ही किचन के बाहर टोकरी में रखे आलू-प्याज शव के पास बिखरे थे।
विज्ञापन
कत्ल के पीछे प्रापर्टी या फिर गलत संगत
15 साल के बबलू की हत्या के पीछे क्या वजह हो सकती है? उसकी किसी से कोई अदावत का भी पता नहीं चला है। ऐसे में पुलिस दो एंगल पर जांच कर रही है। एसपी सिटी राजेश यादव के मुताबिक, तफ्तीश का एक एंगल तो संपत्ति का है। शांति देवी के पति का निधन हो चुका था। कोई औलाद नहीं थी। बबलू ही संपत्ति का वारिस था। ऐसे में उसे मारने पर किसे फायदा हो सकता है? यह जांच की जा रही है। कुंडा से शांति देवी के भतीजों को बुलाया गया है। जांच का दूसरा पहलू यह है कि बबलू की संगत खराब थी। पता चला है कि वह गांजा का नशा करने वाले युवकों के साथ देखा जाता था। ऐसे में यह भी अंदेशा है कि नशेड़ियों ने ही घर में गलत नीयत से घुसकर उसके साथ खींचतान की हो। विरोध करने और शिकायत की धमकी पर उसे क्रूरता से मार डाला गया। घर के निरीक्षण में लूटपाट के निशान नहीं दिखे हैं। बुजुर्ग शांति देवी भी कुछ नहीं बता सकी हैं।
दो मोबाइल फोन भी उठा ले गए कातिल
बबलू के कत्ल की जांच में जुटी पुलिस को पता चला कि उसके पास दो मोबाइल फोन थे। मगर घर में दोनों मोबाइल नहीं मिले। साफ है कि कातिल ही दोनों मोबाइल ले गए हैं। शांति देवी को मोबाइल के नंबर नहीं मालूम थे। पुलिस ने किसी तरह नंबर जुटाए तो पता चला कि वे स्विच ऑफ हैं। आसपास के लोगों ने किसी को घर से निकलते नहीं देखा। पड़ोस के मकान का सीसीटीवी फुटेज चेक करने पर भी कोई सुराग नहीं मिल सका है।
विज्ञापन
अल्लापुर में पटेल चौराहा के निकट माली चौराहा पर 75 वर्षीय शांति देवी का पुराना मकान है। उनके पति रामप्रसाद गुप्ता का तीन साल पहले निधन हो चुका है। वह चाय-नाश्ता की दुकान चलाकर पत्नी संग गुजारा करते थे। उनका कोई पुत्र नहीं था। एक बेटी थी जिसका करेलाबाग में ब्याह किया गया था लेकिन वह भी बीमारी से चल बसी। धार्मिक प्रवृत्ति की शांति देवी ने 15 साल पहले बैरहना स्थित संत निरंकारी आश्रम में किसी महिला के एक माह के बच्चे को गोद लिया। उसका नाम गुरदीन उर्फ बबलू रखा। पति के देहांत के बाद पिछले तीन साल से शांति देवी गोद लिए पुत्र बबलू के साथ जीवन यापन कर रही थीं। बबलू ने कक्षा चार तक पढ़ाई की थी। फिर वह दुकानों में काम करने लगा। मौजूदा समय में वह कटरा इलाके में चाऊमीन की दुकान में काम करता था। शांति देवी हर रविवार को संत निरंकारी आश्रम में सत्संग में शामिल होने जाती थीं। बबलू भी उनके साथ सत्संग में जाता था। मगर इस रविवार की सुबह शांति देवी आश्रम के लिए निकलने लगीं तो बबलू ने उन्हें अकेले जाने के लिए कह दिया। उसनेे कहा कि वह घर में पुताई कराने के लिए मजदूरों से बात करने जाएगा। कुछ देर बाद आश्रम आएगा। मगर बबलू दोपहर तक आश्रम नहीं गया।
विज्ञापन
लाश देख रोते हुए बाहर आईं बुजुर्ग
करीब तीन बजे शांति देवी घर लौटीं तो दरवाजा खुला था। वह बरामदे में पहुंची तो वहां का नजारा देख हतप्रभ रह गईं। बबलू फर्श पर खून से लथपथ पड़ा था। आसपास भी खून बिखरा था। वह रोते-कलपते बाहर निकलीं और पड़ोसियों को बताया। लोगों ने जाकर देखा तो पता चला कि बबलू जीवित नहीं है। कुछ देर में जार्जटाउन पुलिस पहुंची। फिर सीओ डीपी तिवारी और एसपी सिटी राजेश यादव भी क्राइम ब्रांच के साथ पहुंच गए। मौके पर फोरेंसिक टीम को बुलाकर छानबीन की गई। बबलू ने कमीज पहन रखी थी। अंडरवियर नहीं थी। अलबत्ता गमछा जरूर था। उसका गला रेता गया था। सिर समेत कई जगह गहरे जख्म थे। पुलिस को वहां लोहे की एक खून सनी सरिया पड़ी मिली। अनुमान है कि उस पर सरिया और चाकू से हमला किया गया था। चाकू नहीं मिला है। बरामदे में ही किचन के बाहर टोकरी में रखे आलू-प्याज शव के पास बिखरे थे।
विज्ञापन
कत्ल के पीछे प्रापर्टी या फिर गलत संगत
15 साल के बबलू की हत्या के पीछे क्या वजह हो सकती है? उसकी किसी से कोई अदावत का भी पता नहीं चला है। ऐसे में पुलिस दो एंगल पर जांच कर रही है। एसपी सिटी राजेश यादव के मुताबिक, तफ्तीश का एक एंगल तो संपत्ति का है। शांति देवी के पति का निधन हो चुका था। कोई औलाद नहीं थी। बबलू ही संपत्ति का वारिस था। ऐसे में उसे मारने पर किसे फायदा हो सकता है? यह जांच की जा रही है। कुंडा से शांति देवी के भतीजों को बुलाया गया है। जांच का दूसरा पहलू यह है कि बबलू की संगत खराब थी। पता चला है कि वह गांजा का नशा करने वाले युवकों के साथ देखा जाता था। ऐसे में यह भी अंदेशा है कि नशेड़ियों ने ही घर में गलत नीयत से घुसकर उसके साथ खींचतान की हो। विरोध करने और शिकायत की धमकी पर उसे क्रूरता से मार डाला गया। घर के निरीक्षण में लूटपाट के निशान नहीं दिखे हैं। बुजुर्ग शांति देवी भी कुछ नहीं बता सकी हैं।
दो मोबाइल फोन भी उठा ले गए कातिल
बबलू के कत्ल की जांच में जुटी पुलिस को पता चला कि उसके पास दो मोबाइल फोन थे। मगर घर में दोनों मोबाइल नहीं मिले। साफ है कि कातिल ही दोनों मोबाइल ले गए हैं। शांति देवी को मोबाइल के नंबर नहीं मालूम थे। पुलिस ने किसी तरह नंबर जुटाए तो पता चला कि वे स्विच ऑफ हैं। आसपास के लोगों ने किसी को घर से निकलते नहीं देखा। पड़ोस के मकान का सीसीटीवी फुटेज चेक करने पर भी कोई सुराग नहीं मिल सका है।