शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा : पीजीटी-टीजीटी परीक्षा में फेल थे, फिर भी जारी हुए नियुक्ति पत्र
इस फर्जीवाड़े का सरगना कौन है? इसका खुलासा पुलिस की जांच से होगा। पुलिस ने सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में अब तक किसी से पूछताछ नहीं हुई है।
विस्तार
फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिये कानपुर के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में ज्वाइन करने गए सभी अभ्यर्थी पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) और ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) परीक्षा-2021 में फेल हो गए थे। वह प्रतीक्षा सूची में भी नहीं थे। फिर भी फर्जी तरीके से नियुक्ति पत्र जारी करवाए और कानपुर में डीआईओएस से मिलकर दो ने कॉलेज में ज्वाइन भी कर लिया। इस मामले के खुलासे के बाद अन्य जिलों में नवनियुक्त अभ्यर्थियों के अभिलेखों की जांच होने लगी है। ऐसा खेल कई और जिलों में होने की संभावना है।
पीजीटी- टीजीटी भर्ती परीक्षा- 2021 में सीतापुर के गांव देवीपुर सिधौली निवासी अरविंद यादव, प्रयागराज के बी-23 जूही कॉलोनी म्योर रोड निवासी स्वाति द्विवेदी और कौवा बरांव करछना निवासी विनय सिंह, मिर्जापुर के बभनैया टोला महुअरिया निवासी आशीष पांडेय और नया शिवम बस्ती महुअरिया निवासी विनीता देवी, मुजफ्फरनगर के भेंडरा भंदूर निवासी नितिन कुमार, वाराणसी के कोइली ढढोरपुर निवासी रिक्षा पांडेय, मेरठ के मुल्ताननगर शेखपुरा निवासीस ज्योति यादव और आर-12 रामलीला ग्राउंड हस्तिनापुर की विनीता चौधरी शामिल हुए थे, लेकिन मेरिट में नहीं आए।
नियुक्ति पत्र में दूसरे के अनुक्रमांक का किया गया प्रयोग
इसमें सफल होने वालों को नियुक्ति दे दी गई। कुछ सफल अभ्यर्थियों ने ज्वाइन नहीं किया तो खाली रह गए पदों के सापेक्ष जुलाई 2023 में प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को मौका दिया गया। वह प्रक्रिया सितंबर तक पूरी हो गई। उसके बाद 18 अक्तूबर 2023 को इन अभ्यर्थियों ने कानपुर के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करवाया। फिर विनीता देवी ने 22 दिसंबर 2023 को और रिक्षा पांडेय ने दो मार्च को ज्वाइन कर लिया। इसके बाद सात अन्य को ज्वाइन करना था,लेकिन चुनाव आचार संहिता लग गई थी।
फर्जी पत्र के जरिये अक्तूबर से मार्च तक नियुक्ति का प्रयास होता रहा। अप्रैल में प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान यह मामला खुला। इस फर्जीवाड़े के पीछे भर्ती माफिया का हाथ माना जा रहा है। हो सकता है कि उसने कई और जिलों में भी ऐसे नियुक्ति पत्र भेजे हों। इस प्रकरण के खुलासे के बाद सभी जिलों के डीआईओएस ने नई नियुक्तियों की जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच कर रहे कानपुर के संयुक्त शिक्षा निदेशक मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि विनीता का दिसंबर से मार्च तक वेतन जारी हो गया था। विद्यालय के प्रबंधक ने उस धनराशि का चेक जमा करवा दिया है। इनके अभिलेखों की जांच से पता चला कि नियुक्ति पत्र में तीन ने दूसरे के अनुक्रमांक प्रयोग किया था।
पुलिस की जांच में पकड़ा जाएगा सरगना
इस फर्जीवाड़े का सरगना कौन है? इसका खुलासा पुलिस की जांच से होगा। पुलिस ने सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में अब तक किसी से पूछताछ नहीं हुई है।