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शख्सियत : अमेरिका में सिखाया भरतनाट्यम व कथक, देश-विदेश में जगाएंगे सनातन की अलख

Wed, 05 Feb 2025 04:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Feb 2025 04:20 PM IST
सार

अमर उजाला कार्यालय में खास बातचीत के दाैरान इंद्रवदन त्रिवेदी ने बताया कि अमेरिका के ह्यूस्टन में उन्होंने 1991 में भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी की क्लासेज शुरू की थी। लगभग दो दशक तक क्लासेज चलाने के बाद 2011 में उनका रुझान सनातन धर्म-अध्यात्म की ओर हुआ।

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Taught Bharatnatyam and Kathak in America, will awaken the flame of Sanatan in India and abroad
इंद्रवदन त्रिवेदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दो दशक तक अमेरिका में रहकर वहां के लोगों को भरतनाट्यम और कथक सिखाने वाले 78 वर्षीय गुजराती कलाकार अब महाकुंभ से देश-विदेश में सनातन की अलख जगाएंगे। इसके लिए वे आध्यत्मिक गुरुओं से लगातार धर्म संस्कृति पर चर्चा कर रहे हैं। साथ ही सनातन संस्कृति के रहस्यों को जानने का प्रयास कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी सनातन के प्रति उनका जोश और उत्साह देखने लायक है। उनका कहना है कि अमेरिका लाैटकर वे हंसवाणी नाम से वेबसाइट बनाएंगे। साथ ही सोशल मीडिया पर सनाधर्म धर्म और संस्कृति की अलख जगाएंगे। बात हो रही गुजरात के अहमदाबाद निवासी इंद्रवदन त्रिवेदी की, जो अब अमेरिका के ह्यूस्टन में रह रहे हैं।

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अमर उजाला कार्यालय में खास बातचीत के दाैरान इंद्रवदन त्रिवेदी ने बताया कि अमेरिका के ह्यूस्टन में उन्होंने 1991 में भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी की क्लासेज शुरू की थी। लगभग दो दशक तक क्लासेज चलाने के बाद 2011 में उनका रुझान सनातन धर्म-अध्यात्म की ओर हुआ। इसके बाद से लगातार वो विभिन्न देशों की यात्रा कर सनातन की अलख जगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक वे करीब 90 देशों की यात्रा कर चुके हैं। इसी क्रम में अब महाकुंभ में पहुंचकर धर्म गुरुओं से चर्चा कर रहे हैं।

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हरिहरानंद, रामभद्राचार्या, रविंद्र पुरी सहित कई संतों से मिल चुके हैं। आगामी योजना के संबंध में उनका कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को जागरूक कर देश-विदेश में सनातन का संदेश देना है। इसके लिए वे द मदर इंडिया नाम से डाक्यूमेट्री फिल्म बना रहे हैं, जिसे जल्द ही सोशल मीडिया पर रिलीज करेंगे। 78 साल की उम्र में भले ही पैरों से चलने में उन्हें दिक्कत है, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भी हाैसला और जज्बा जवान है।
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