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साधना करने को आए थे स्वामी विवेकानंद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 12 Jan 2017 01:14 AM IST
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टैगोर थियेटर में स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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दुनिया को भारतीय दर्शन और संस्कृति के सूत्र से परिचित कराने वाले स्वामी विवेकानंद को भी संगम की रेती आकर्षित करती रही है। ध्यान और साधना के लिए उन्होंने संगम की रेती पर माघ मेें कल्पवास किया था।
स्वामी विवेकानंद 1890 ई. में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में प्रयाग आए और जनवरी 1891 में कल्पवास पूरा किया। यहीं पर रहकर उन्होंने सनातन धर्म, वैदिक दर्शन उपनिषद पुराणों का अध्ययन संतों के सानिध्य में रहकर किया। संगम की रेती का प्रभाव स्वामी विवेकानंद पर ऐसा पड़ा कि जब उन्होंने मिशन की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए देश के जिन पांच केंद्रों की परिकल्पना की इलाहाबाद उसमें शामिल रहा। मुट्ठीगंज स्थित रामकृष्ण मिशन मठ के सचिव स्वामी सर्वभूतानंद के मुताबिक संगमनगरी से विशेष लगाव होने के कारण ही वे 1897 में जब वे अस्पताल की स्थापना के लिए जब वाराणसी आए तो प्रयाग भी आए।
इस बार वे यहां पर एक शिवालय ठहरे थे। संगमनगरी में मठ की स्थापना उनकी प्रबल इच्छा थी। उनके इस इच्छा को उनके गुरु भाई पेशे से इंजीनियर रहे स्वामी विज्ञानानंद ने साकार किया। उन्होंने 1910 में मुट्ठीगंज मुहल्ले में आर्यकन्या इंटर और डिग्री कालेज के पास मुख्य मार्ग पर रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम की स्थापना की थी। जो रामकृष्ण देव, मां सारदा और स्वामी विवेकानंद के बताए सेवा कार्य को विस्तार देने में रत है।
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स्वामी विवेकानंद 1890 ई. में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में प्रयाग आए और जनवरी 1891 में कल्पवास पूरा किया। यहीं पर रहकर उन्होंने सनातन धर्म, वैदिक दर्शन उपनिषद पुराणों का अध्ययन संतों के सानिध्य में रहकर किया। संगम की रेती का प्रभाव स्वामी विवेकानंद पर ऐसा पड़ा कि जब उन्होंने मिशन की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए देश के जिन पांच केंद्रों की परिकल्पना की इलाहाबाद उसमें शामिल रहा। मुट्ठीगंज स्थित रामकृष्ण मिशन मठ के सचिव स्वामी सर्वभूतानंद के मुताबिक संगमनगरी से विशेष लगाव होने के कारण ही वे 1897 में जब वे अस्पताल की स्थापना के लिए जब वाराणसी आए तो प्रयाग भी आए।
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इस बार वे यहां पर एक शिवालय ठहरे थे। संगमनगरी में मठ की स्थापना उनकी प्रबल इच्छा थी। उनके इस इच्छा को उनके गुरु भाई पेशे से इंजीनियर रहे स्वामी विज्ञानानंद ने साकार किया। उन्होंने 1910 में मुट्ठीगंज मुहल्ले में आर्यकन्या इंटर और डिग्री कालेज के पास मुख्य मार्ग पर रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम की स्थापना की थी। जो रामकृष्ण देव, मां सारदा और स्वामी विवेकानंद के बताए सेवा कार्य को विस्तार देने में रत है।
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