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इंदिरा मैराथन पर संकट, अभी कोई आदेश नहीं
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suspenstion on indira marathon 2020 , there is not any further order
प्रयागराज। कोविड संक्रमण के बीच इंदिरा मैराथन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसे लेकर आल इंडिया एथलेटिक्स फेडरेशन की ओर से अभी तक कोई आदेश नहीं दिया गया है। जबकि, आयोजन में मात्र 15 दिन बचे हैं। चूंकि नेशनल एथलेटिक्स के आयोजन को भी अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में इंदिरा मैराथन के आयोजन को लेकर आशंकाएं उठने लगी हैं। यदि ऐसा हुआ तो पहली बार यह दौड़ आयोजित नहीं होगी।
अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पहल पर हुई थी। इसके बाद से यह प्रतियोगिता लगातार जारी रही। मैराथन में तो देश भर के खिलाड़ी शामिल होते ही हैं, अलग-अलग वर्ग की क्रास कंट्री दौड़ में हजारों शहरी भी प्रतिभाग करते रहे हैं। इसके लिए एक महीने पहले से ही तैयारी शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार अभी तक इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। एक अधिकारी का कहना है कि फेडरेशन ने अभी किसी भी मैराथन या बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी है। दौड़ के एक-दो आयोजन हुए हैं लेकिन उसमें धावकों को दो मिनट के अंतराल पर छोड़ा गया, जो मैराथन में संभव नहीं है। दौड़ की दूरी और खिलाड़ियों की संख्या भी सीमित रही।
इसके अलावा कोविड संक्रमण के मद्देनजर जारी गाइडलाइन के अनुसार खिलाड़ी दो घंटे से अधिक मैदान में नहीं रुक सकते। इंदिरा आयोजन में इसका पालन भी मुश्किल है। इस तरह की कई पाबंदियों को देखते हुए इंदिरा मैराथन के आयोजन को लेकर आशंकाएं बन गई हैं। हालांकि क्षेत्रीय खेल अधिकारी अनिल तिवारी का कहना है कि अब भी अनुमति मिल गई तो आयोजन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी। खेल निदेशक आरपी सिंह का कहना है कि एथलेटिक्स एसोसिएशन से इंदिरा मैराथन को लेकर कोई आदेश नहीं आया है। इसलिए इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
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अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन की शुरुआत 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पहल पर हुई थी। इसके बाद से यह प्रतियोगिता लगातार जारी रही। मैराथन में तो देश भर के खिलाड़ी शामिल होते ही हैं, अलग-अलग वर्ग की क्रास कंट्री दौड़ में हजारों शहरी भी प्रतिभाग करते रहे हैं। इसके लिए एक महीने पहले से ही तैयारी शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार अभी तक इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। एक अधिकारी का कहना है कि फेडरेशन ने अभी किसी भी मैराथन या बड़े आयोजन की अनुमति नहीं दी है। दौड़ के एक-दो आयोजन हुए हैं लेकिन उसमें धावकों को दो मिनट के अंतराल पर छोड़ा गया, जो मैराथन में संभव नहीं है। दौड़ की दूरी और खिलाड़ियों की संख्या भी सीमित रही।
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इसके अलावा कोविड संक्रमण के मद्देनजर जारी गाइडलाइन के अनुसार खिलाड़ी दो घंटे से अधिक मैदान में नहीं रुक सकते। इंदिरा आयोजन में इसका पालन भी मुश्किल है। इस तरह की कई पाबंदियों को देखते हुए इंदिरा मैराथन के आयोजन को लेकर आशंकाएं बन गई हैं। हालांकि क्षेत्रीय खेल अधिकारी अनिल तिवारी का कहना है कि अब भी अनुमति मिल गई तो आयोजन की तैयारी पूरी कर ली जाएगी। खेल निदेशक आरपी सिंह का कहना है कि एथलेटिक्स एसोसिएशन से इंदिरा मैराथन को लेकर कोई आदेश नहीं आया है। इसलिए इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
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