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सीजीएचएस में खराब इंसुलिन की सप्लाई, वितरण रुका
Thu, 06 Aug 2020 05:05 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2020 05:05 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में लाखों रुपये के मूल्य की खराब इंसुलिन की सप्लाई कर दी गई। मरीजों की शिकायत पर जांच हुई तो मामले का खुलासा हुआ। सीजीएचएस प्रशासन ने अपनी सभी डिस्पेंसरियों में इंसुलिन के वितरण पर रोक लगा दी है और अगली सप्लाई तक मरीजों को इंडेंट के माध्यम से इंसुलिन बाजार से खरीदकर उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई है।
खराब सप्लाई के तहत आई इंसुलिन अब कंपनी को वापस भेजी जाएगी। प्रयागराज में सीजीएचएस की सात डिस्पेंसरियां हैं और इससे केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रित जुड़े हैं। इनकी संख्या तकरीबन एक लाख है। इन्हें सीजीएचएस से इलाज और मुफ्त दवाओं की सुविधा मिलती है।
डायबिटीज के मरीजों को कई प्रकार की इंसुलिन दी जाती है और इसमें बड़ी खेप ‘लेविमीर फ्लेक्स पेन’ की है। एक पेन की कीमत एक हजार रुपये है। इंसुलिन का इस्तेमाल होने के बाद फ्लेक्स पेन अनुपयोगी हो जाता है। एक पेन में भरी हुई इंसुलिन औसतन एक माह चलती है। इसके बाद सीजीएचए से मरीज को नया फ्लेक्स पेन आवंटित किया जाता है। लेविमीर फ्लेक्स पेन की इंसुलिन सीधे कंपनी से सीजीएचएस को सप्लाई की जाती है और इसे उपयोग करने वाले मरीजों की संख्या काफी अधिक है।
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सीजीएचएस के सूत्रों का कहना है कि कम से कम तीन माह की सप्लाई एक साथ मंगा ली जाती है। इस बार जो इंसुलिन आई है, उसके सभी फ्लेक्स पेन खराब हैं। फ्लेक्स पेन लीक होने के कारण इंसुलिन बह जा रही है। किसी फ्लेक्सपेन में आधी तो किसी में एक चौथाई इंसुलिन बची है। फ्लेक्स पेन के जिस हिस्से में निडिल फिट की जाती है, वह हिस्सा भी क्षतिग्रस्त है। ऐसे में मरीज को इंसुलिन की सही मात्रा भी नहीं मिल पा रही।
बड़ी बात यह कि इंसुलिन की एक्पायरी सितंबर २०२० है और सीजीएचएस के मेडिकल स्टोर डिपो (एमएसडी) एवं डिस्पेंसरियों में तीन माह का कोटा पड़ा है। ऐसे में मरीजों की जान को भी खतरा है। सूत्रों के मुताबिक पिछली सप्लाई में भी ऐसी ही गड़बड़ी सामने आई थी, लेकिन डिस्पेंसरियों में जैसे-तैसे लेविमीर इंसुलिन को मरीजों के बीच खपा दिया गया था। इस बार की सप्लाई और ज्यादा खराब है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब कंपनी से सीजीएचएस के एमएसडी में सप्लाई पहुंची तो इस पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?
बिना जांचे-परखे डिस्पेंसरियों में खराब इंसुलिन कैसे पहुंचा दी गई? कई मरीजों ने जब सीजीएचएस के अपर निदेशक से मामले की शिकायत की तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए खराब इंसुलिन मरीजों को वितरित किए जाने पर रोक लगा दी है और निर्देश दिए हैं कि इंडेंट के माध्यम से मरीजों को बाजार से इंसुलिन खरीदकर उपलब्ध कराई जाए।
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खराब सप्लाई के तहत आई इंसुलिन अब कंपनी को वापस भेजी जाएगी। प्रयागराज में सीजीएचएस की सात डिस्पेंसरियां हैं और इससे केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रित जुड़े हैं। इनकी संख्या तकरीबन एक लाख है। इन्हें सीजीएचएस से इलाज और मुफ्त दवाओं की सुविधा मिलती है।
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डायबिटीज के मरीजों को कई प्रकार की इंसुलिन दी जाती है और इसमें बड़ी खेप ‘लेविमीर फ्लेक्स पेन’ की है। एक पेन की कीमत एक हजार रुपये है। इंसुलिन का इस्तेमाल होने के बाद फ्लेक्स पेन अनुपयोगी हो जाता है। एक पेन में भरी हुई इंसुलिन औसतन एक माह चलती है। इसके बाद सीजीएचए से मरीज को नया फ्लेक्स पेन आवंटित किया जाता है। लेविमीर फ्लेक्स पेन की इंसुलिन सीधे कंपनी से सीजीएचएस को सप्लाई की जाती है और इसे उपयोग करने वाले मरीजों की संख्या काफी अधिक है।
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सीजीएचएस के सूत्रों का कहना है कि कम से कम तीन माह की सप्लाई एक साथ मंगा ली जाती है। इस बार जो इंसुलिन आई है, उसके सभी फ्लेक्स पेन खराब हैं। फ्लेक्स पेन लीक होने के कारण इंसुलिन बह जा रही है। किसी फ्लेक्सपेन में आधी तो किसी में एक चौथाई इंसुलिन बची है। फ्लेक्स पेन के जिस हिस्से में निडिल फिट की जाती है, वह हिस्सा भी क्षतिग्रस्त है। ऐसे में मरीज को इंसुलिन की सही मात्रा भी नहीं मिल पा रही।
बड़ी बात यह कि इंसुलिन की एक्पायरी सितंबर २०२० है और सीजीएचएस के मेडिकल स्टोर डिपो (एमएसडी) एवं डिस्पेंसरियों में तीन माह का कोटा पड़ा है। ऐसे में मरीजों की जान को भी खतरा है। सूत्रों के मुताबिक पिछली सप्लाई में भी ऐसी ही गड़बड़ी सामने आई थी, लेकिन डिस्पेंसरियों में जैसे-तैसे लेविमीर इंसुलिन को मरीजों के बीच खपा दिया गया था। इस बार की सप्लाई और ज्यादा खराब है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब कंपनी से सीजीएचएस के एमएसडी में सप्लाई पहुंची तो इस पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?
बिना जांचे-परखे डिस्पेंसरियों में खराब इंसुलिन कैसे पहुंचा दी गई? कई मरीजों ने जब सीजीएचएस के अपर निदेशक से मामले की शिकायत की तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए खराब इंसुलिन मरीजों को वितरित किए जाने पर रोक लगा दी है और निर्देश दिए हैं कि इंडेंट के माध्यम से मरीजों को बाजार से इंसुलिन खरीदकर उपलब्ध कराई जाए।
- ‘लेविमीर फ्लेक्स पेन की सप्लाई सीधे कंपनी से होती है। कई मरीजों ने फ्लेक्स पेन खराब होने की शिकायत की है। शिकायत सही पाई गई है। सप्लाई गड़बड़ है। फ्लेक्स पेन ठीक से काम नहीं कर रहा है। मरीजों को इंडेंट के माध्यम से इसुंलिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। खराब इंसुलिन कंपनी को वापस भेजी जाएगी और नई सप्लाई मंगाई जाएगी।’ डॉ. आरके श्रीवास्तव, अपर निदेशक, सीजीएचएस, प्रयागराज