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High Court:मां की ओर से बेटे-बहू पर दर्ज कराए गए केस में जारी समन आदेश रद्द, कोर्ट ने दिया गरुण पुराण का हवाला

Wed, 02 Oct 2024 05:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 02 Oct 2024 05:53 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने विवेक कुमार गोयल व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में गरुण पुराण के श्लोक लोभ मूलानि पापानि संकटानि तथैव च। लोभात्प्रवर्तते वैरमति लोभाद्विनश्यति।। यानि धन के लालच में आपराधिक केस कायम किया गया का उल्लेख किया।

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Summons order issued in the case filed by mother against son and daughter-in-law cancelled
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां की ओर से अपने बेटे-बहू के खिलाफ षड्यंत्र, अमानत में खयानत व कपट के आरोप में दर्ज कराए गए आपराधिक केस में सीजेएम आगरा की ओर से जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही छोटे बेटे की मौत पर नौ वर्षीय नाबालिग बच्ची को मिली एक करोड़ की बीमा राशि को उसके बालिग होने तक सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने विवेक कुमार गोयल व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में गरुण पुराण के श्लोक लोभ मूलानि पापानि संकटानि तथैव च। लोभात्प्रवर्तते वैरमति लोभाद्विनश्यति।। यानि धन के लालच में आपराधिक केस कायम किया गया का उल्लेख किया।

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कोर्ट ने कहा कि बेटे-बहू के खिलाफ उनकी मां के केस पर बहन ने पेश होकर बयान दिया कि कोई धोखाधड़ी नहीं की गई है। याची ने बच्ची को मिले धन को भविष्य में सुरक्षित करने के लिए बेहतर स्कीम में पैसे जमा किए हैं। मां पर जीएसटी बकाया वसूली की कार्रवाई की जा रही है। उसे भी बेटे के बीमे से 50 लाख रुपये मिले हैं, जो पोस्ट ऑफिस में जमा हैं।

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जीएसटी विभाग ने खाता सीज कर दिया है। इसपर कोर्ट ने विभिन्न स्कीमों में जमा राशि का मूल दस्तावेज सील कवर महानिबंधक कार्यालय में जमा करा दिया और आदेश दिया कि मां के खिलाफ जीएसटी वसूली की कार्रवाई का बच्ची के एक करोड़ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कोर्ट ने जिलाधिकारी आगरा व एसडीएम जलेसर को जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी को जिलाधिकारी के समक्ष पेश होने व चार हफ्ते में महानिबंधक को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा याचीगण के खिलाफ आपराधिक न्यास भंग व षड्यंत्र का केस नहीं बनता।

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