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साक्ष्य के साथ अध्यक्ष, सदस्यों के निलंबन पर अड़े छात्र

Tue, 18 Apr 2017 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 18 Apr 2017 01:46 AM IST
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Students with suspicion on the Chairman, Members with evidence
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
सीसैट के मुद्दे पर राहत मिलने के बाद छात्रों ने अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीसैट के मामले में छात्रों और सरकार के बीच सेतु बने एमएलसी डीपी सिंह ने इस बार भी छात्रों की तरफ से आवाज उठाते हुए आयोग अध्यक्ष एवं सदस्यों के निलंबन और आयोग की कार्यप्रणाली की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय के नेतृत्व में छात्रों ने सोमवार को इलाहाबाद आए एमएलसी से मुलाकात की और उन्हें आयोग के खिलाफ 232 पन्नों का साक्ष्य भी सौंपा। डीपी सिंह ने छात्रों का आश्वस्त किया कि इस साक्ष्य के साथ वह प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं राज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगेंगे।
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एमएलसी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 316 (2-ख) एवं 317 (1) (2) के तहत राज्यपाल को शक्तियां प्रदान की गई हैं कि आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की ओर से किया गया कार्य कदाचार से प्रेरित है तो राज्यपाल और राष्ट्रपति इन्हें निलंबित कर जांच करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों ओर दिए गए 232 पन्नों के साक्ष्य को वह राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं राज्यपाल को सौंपेंगे और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार से उन्हें अवगत कराएंगे। एमएलसी ने आरोप लगाया कि जिस तरह लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में स्केलिंग एवं इंटरव्यू में धांधली के जरिये एक जाति विशेष को फायदा पहुंचा गया, उसी तरह वर्तमान अनुरुद्ध यादव के कार्यकाल में भी भर्तियों में घपला किया गया।
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समीक्षा अधिकारी का पेपर आउट होने के बाद परीक्षा निरस्त नहीं की गई, पीसीएस की परीक्षा में कॉपियां बदल दी गईं। भर्तियों में ऐसे ही अनेक घपले किए गए। इस मामले में उन्होंने 30 मार्च को विधानमंडल दल की बैठक में सीएम को 200 पन्नों का दस्तावेज सौंपा था। ऐसे में आयोग की भर्तियों में हुए घोटालों की सीबीआई जांच अनिवार्य हो गई है। जांच इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि आयोग की जिन भर्तियों में घोटाले हुए, उसके तहत चयनित प्रशासनिक अधिकारी आज से 20 साल बाद इसी प्रदेश में कलक्टर और कप्तान बनकर बैठेंगे। ऐसे में प्रदेश का हाल क्या होगा, इसका अंदाज सहज ही लगाया जा सकता है।
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