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हार्डकॉपी देना बंद करें, विद्यार्थियों को सिर्फ डिजिटल डिग्री दें : राज्यपाल
Fri, 17 Jul 2026 02:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:41 AM IST
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छात्रों को डिग्री की हार्डकॉपी देना बंद करें। डिजिलॉकर पर डिग्री उपलब्ध है। छात्र वहां से डाउनलोड करें। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बृहस्पतिवार को प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय (पीआरएसयू) के दीक्षांत समारोह में सभी विश्वविद्यालयों को यह निर्देश जारी किए।
बतौर कुलाधिपति दीक्षांत समारोह में शामिल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों को डिजिटल, जवाबदेह और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय डिग्री की हार्डकॉपी देना बंद करें और विद्यार्थियों को केवल डिजिटल डिग्री उपलब्ध कराएं। इससे डिग्री व मार्कशीट के प्रिंट पर होने वाला खर्च बचेगा और डिग्री का सुरक्षित व पारदर्शी रिकॉर्ड भी तैयार होगा।
उन्होंने परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षक मूल्यांकन में गलती करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। ऐसे शिक्षकों के वेतन से कटौती की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों के भविष्य से किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन में एक छोटी सी गलती भी छात्र के पूरे भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
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ऐसे में शिक्षक पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करें। उन्होंने कुलपति से कहा कि उत्तरपुस्तिकाएं विद्यार्थियों के लिए खोल दी जाएं और जरूरत पड़े तो ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं। इससे यह पता चलेगा कि किसकी गलती है। उन्होंने दो विश्वविद्यालयों में की गई कार्रवाई का उदाहरण भी दिया।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के कई विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के बेहतर भवन और संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन उनका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। दोपहर बाद खाली रहने वाले शैक्षणिक परिसरों का उपयोग कौशल विकास, रोजगारपरक प्रशिक्षण और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए ताकि युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा सके।
दीक्षांत में 242 मेधावियों को मेडल, 81822 को मिलीं उपाधियां
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में 81822 विद्यार्थियों को उपाधियां मिलीं जिनमें 61753 स्नातक व 20129 परास्नातक विद्यार्थी शामिल हैं। वहीं, 242 मेधावियों को मेडल प्रदान किए गए जिनमें 73 स्वर्ण, 82 रजत और 87 कांस्य पदक शामिल हैं। मेडल पाने वाले मेधावियों में 66.53 फीसदी छात्राएं व 33.47 फीसदी छात्र शामिल हैं। राज्यपाल ने कहा कि छात्राओं की उल्लेखनीय सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं।
शिप्रा यादव को मिला कुलाधिपति स्वर्ण पदक
-रज्जू भइया के नौवें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक नैनी स्थित सड़वा की रहने वाली शिप्रा यादव को मिला। वह प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय परिसर में परास्नातक जीव विज्ञान की छात्रा हैं।
महापुरुषों के नाम पर हों प्रतियोगिताएं
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का जिन महापुरुषों के नाम पर नामकरण हुआ है, वहां उनके जीवन, विचार व योगदान से विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं। चित्रकला, भाषण, निबंध व लेखन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचित कराया जाए ताकि छात्र उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार सकें।
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बतौर कुलाधिपति दीक्षांत समारोह में शामिल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों को डिजिटल, जवाबदेह और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय डिग्री की हार्डकॉपी देना बंद करें और विद्यार्थियों को केवल डिजिटल डिग्री उपलब्ध कराएं। इससे डिग्री व मार्कशीट के प्रिंट पर होने वाला खर्च बचेगा और डिग्री का सुरक्षित व पारदर्शी रिकॉर्ड भी तैयार होगा।
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उन्होंने परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षक मूल्यांकन में गलती करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। ऐसे शिक्षकों के वेतन से कटौती की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों के भविष्य से किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन में एक छोटी सी गलती भी छात्र के पूरे भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
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ऐसे में शिक्षक पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करें। उन्होंने कुलपति से कहा कि उत्तरपुस्तिकाएं विद्यार्थियों के लिए खोल दी जाएं और जरूरत पड़े तो ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं। इससे यह पता चलेगा कि किसकी गलती है। उन्होंने दो विश्वविद्यालयों में की गई कार्रवाई का उदाहरण भी दिया।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के कई विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के बेहतर भवन और संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन उनका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है। दोपहर बाद खाली रहने वाले शैक्षणिक परिसरों का उपयोग कौशल विकास, रोजगारपरक प्रशिक्षण और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए ताकि युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा सके।
दीक्षांत में 242 मेधावियों को मेडल, 81822 को मिलीं उपाधियां
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) राज्य विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में 81822 विद्यार्थियों को उपाधियां मिलीं जिनमें 61753 स्नातक व 20129 परास्नातक विद्यार्थी शामिल हैं। वहीं, 242 मेधावियों को मेडल प्रदान किए गए जिनमें 73 स्वर्ण, 82 रजत और 87 कांस्य पदक शामिल हैं। मेडल पाने वाले मेधावियों में 66.53 फीसदी छात्राएं व 33.47 फीसदी छात्र शामिल हैं। राज्यपाल ने कहा कि छात्राओं की उल्लेखनीय सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं।
शिप्रा यादव को मिला कुलाधिपति स्वर्ण पदक
-रज्जू भइया के नौवें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक नैनी स्थित सड़वा की रहने वाली शिप्रा यादव को मिला। वह प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय परिसर में परास्नातक जीव विज्ञान की छात्रा हैं।
महापुरुषों के नाम पर हों प्रतियोगिताएं
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का जिन महापुरुषों के नाम पर नामकरण हुआ है, वहां उनके जीवन, विचार व योगदान से विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं। चित्रकला, भाषण, निबंध व लेखन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचित कराया जाए ताकि छात्र उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार सकें।