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UPPSC : एसटीएफ जांच तय करेगी आरओ-एआरओ परीक्षा का भविष्य, आंतरिक जांच समिति भी बढ़ी आगे

Wed, 21 Feb 2024 01:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 21 Feb 2024 01:40 PM IST
सार

समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 में पेपर लीक विवाद के बाद अब एसटीएफ की जांच ही इस परीक्षा का भविष्य तय करेगी।

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STF investigation will decide the future of RO-ARO exam, internal investigation committee also moved forward
यूपीपीएससी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 में पेपर लीक विवाद के बाद अब एसटीएफ की जांच ही इस परीक्षा का भविष्य तय करेगी। वहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की आंतरिक जांच समिति भी अभ्यर्थियों की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

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इन सबके बीच मंगलवार को सुबह 11 बजे के आसपास बड़ी संख्या में अभ्यर्थी यूपीपीएससी पहुंचे और आयोग का घेराव किया। शाम तक उनका धरना-प्रदर्शन भी चलता रहा। अभ्यर्थियों ने ज्ञापन देकर प्रारंभिक परीक्षा तत्काल निरस्त किए जाने की मांग की। अभ्यर्थियों ने पेपर लीक की जांच शीघ्र पूरी करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी की।
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फिलहाल, मामला एसटीएफ के पास जाने के बाद परीक्षा पर कोई भी निर्णय लेना आयोग के लिए आसान नहीं रह गया है। वायरल हुआ पेपर लाखाें मोबाइल फोन तक पहुंचा था। ऐसे में एसटीएफ के लिए भी यह पता लगा पाना इतना आसान नहीं रह गया है कि पेपर वायरल किए जाने की शुरुआत कब और कहां से हुई थी। यह पता लगाए बिना जांच भी पूरी नहीं होगी। ऐसे में यह मामला लंबा खिंच सकता है।

इससे पूर्व एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती-2018 में भी सामाजिक विज्ञान और हिंदी विषय का पेपर लीक होने के आरोप लगे थे और एसटीएफ ने इसकी जांच की थी। इस मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक को जेल तक जाना पड़ा था। लंबे समय तक चली जांच के बाद जब एसटीएफ ने जब क्लीन चिट दी तो उसके बाद आयोग ने सामाजिक विज्ञान और हिंदी विषय का परिणाम जारी किया था। जांच पूरी होने में तकरीबन एक साल का समय लग गया था।

आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2023 के पेपर लीक विवाद में तो दो स्तर पर जांच चल रही है। इस बार आयोग ने भी अपने स्तर से तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है और इसकी निगरानी एवं रोज अपडेट लेने के लिए अलग से मॉनीटरिंग कमेटी भी बना दी गई है। ऐसे में परीक्षा को लेकर जो भी निर्णय होगा, वह आंतरिक जांच समिति और एसटीएफ की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, किया प्रदर्शन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने पेपर लीक के विरोध में मंगलवार की शाम यूनिवर्सिटी रोड पर कैंडल मार्च निकाला और प्रदर्शन किया। वहीं, छात्रसंघ भवन पर हुई आपातकालीन बैठक में प्रतियोगियों एवं छात्रनेताओं ने आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। छात्रनेता सत्यम कुशवाहा और हरिओम त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले में हस्तक्षेप करें और छात्रहित में फैसला करें। बैठक में शोध छात्र आनंद मिश्र, अजय बागी, आदित्य छपरा, हर्षित द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

सड़क पर उतरे प्रतियोगी तो लगा जाम

आरओ/एआरओ परीक्षा में पेपर लीक विवाद के बीच परीक्षा निरस्त कराने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र सड़क पर उतरे तो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग चौराहे से लेकर बस अड्डे चौराहे तक जाम जैसी स्थिति हो गई। आयोग चौराहे की ओर से सिविल लाइंस बस अड्डे चौराहे की तरफ जाने वाली एक लेन बंद कर दिए जाने और आयोग के गेट के सामने सैकड़ों प्रतियोगियों के इकट्ठा होने से शाम तक सड़क पर आवागमन बाधित रहा। हालांकि, बस अड्डे की ओर से आयोग चौराहे की तरफ जाने वाली लेन पर ट्रैफिक चलता रहा।

आरवाईए ने दिया आंदोलन को समर्थन

इंकलाबी नौजवान सभा (आईवाईए) ने पीपर लीक के खिलाफ जारी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। आयोग के गेट पर जारी धरने में शामिल आरवाईए के राज्य सचिव सुनील मौर्य कहा कि भाजपा सरकार रोजगार देने के वादे के साथ सत्ता में आई थी लेकिन युवाओं को सिर्फ पेपर लीक मिला, रोजगार नहीं।

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